शिमला बाईपास फोरलेन में मकान गिरने पर हाईकोर्ट सख्त, NHAI-गावर को 2.23 करोड़ मुआवजे का आदेश
शिमला बाईपास फोरलेन निर्माण के दौरान चमियाना में मकान गिरने के मामले में हिमाचल हाईकोर्ट ने NHAI और गावर कंपनी को 2.23 करोड़ रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
शिमला बाईपास निर्माण में मकान गिरने पर हाईकोर्ट सख्त
■ NHAI और गावर कंपनी को 2.23 करोड़ रुपये मुआवजा देने के निर्देश
■ चार सप्ताह में 50-50 प्रतिशत राशि रंजना देवी को देनी होगी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला बाईपास फोरलेन निर्माण के दौरान चमियाना में मकान गिरने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने NHAI और गावर शिमला हाईवे प्राइवेट लिमिटेड को संयुक्त रूप से नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए रंजना देवी को कुल 2.23 करोड़ रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि दोनों पक्ष मुआवजे की राशि का 50-50 प्रतिशत भुगतान करेंगे। यह भुगतान आदेश की तारीख से चार सप्ताह के भीतर रंजना देवी को करना होगा।
चमियाना में निर्माण के दौरान गिरा था मकान
मामला शिमला के चमियाना क्षेत्र का है। फोरलेन निर्माण के दौरान रंजना देवी का मकान गिर गया था। इसके बाद उनके नुकसान और मुआवजे को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
यह मामला जनहित याचिका के तौर पर सामने आया था। इसकी शुरुआत चंदा देवी की ओर से भेजे गए एक पत्र से हुई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनके 3.5 मंजिला मकान के साथ स्थित रंजना देवी का घर फोरलेन निर्माण के दौरान गिर गया। इसके चलते चंदा देवी का अपना मकान भी असुरक्षित हो गया।
2.23 करोड़ से ज्यादा का नुकसान आंका गया
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने मूल्यांकन रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार रंजना देवी के मकान की कीमत 1,65,17,336 रुपये आंकी गई।
इसके अलावा घर के भीतर मौजूद घरेलू सामान का नुकसान 58,38,588 रुपये निर्धारित किया गया। दोनों राशियों को मिलाकर कुल नुकसान 2,23,55,924 रुपये आंका गया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मूल्यांकन के आधार पर निर्धारित पूरी राशि रंजना देवी को दी जानी चाहिए।
जुलाई 2025 में आकलन, फिर भी नहीं मिला मुआवजा
खंडपीठ ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि नुकसान का आकलन जुलाई 2025 में ही हो चुका था। इसके बावजूद रंजना देवी को अब तक मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया गया।
अदालत ने कहा कि NHAI निर्माण कार्य से हुए नुकसान की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। निर्माण के कारण हुए नुकसान के लिए संबंधित एजेंसियों को जवाबदेह होना होगा।
NHAI और गावर कंपनी को चार सप्ताह की समय सीमा
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश जारी किया है।
अदालत के निर्देश के अनुसार NHAI और M/s गावर शिमला हाईवे प्राइवेट लिमिटेड को 2,23,55,924 रुपये की कुल मुआवजा राशि में बराबर हिस्सेदारी करनी होगी। दोनों को 50-50 प्रतिशत राशि चार सप्ताह के भीतर रंजना देवी को देनी होगी।
चंदा देवी के मकान का भी होगा मूल्यांकन
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चंदा देवी के असुरक्षित मकान का भी मूल्यांकन करने के निर्देश दिए हैं। यह मूल्यांकन 8 जून 2022 को गठित राज्य स्तरीय समिति के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
यह समिति Right of Way से बाहर निजी भूमि और भवनों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए गठित की गई थी। अदालत ने इसी व्यवस्था के तहत चंदा देवी के मकान की स्थिति और संभावित नुकसान का मूल्यांकन करने को कहा है।
23 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मुआवजे के भुगतान के लिए चार सप्ताह की समय सीमा तय की है। मामले में आगे की सुनवाई 23 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
अब अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि अदालत के निर्देश के अनुसार मुआवजे की राशि का भुगतान किया गया या नहीं और चंदा देवी के असुरक्षित मकान के मूल्यांकन की प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंची है।
pooja