गैस, ब्लोटिंग और कब्ज से परेशान? थाली में इन चीजों का रखें ध्यान
गैस, ब्लोटिंग, कब्ज और एसिडिटी की समस्या में कौन-से खाद्य पदार्थ परेशानी बढ़ा सकते हैं और कौन राहत देने में मदद कर सकते हैं, जानें पूरी जानकारी।
गैस और ब्लोटिंग में कुछ फूड बढ़ा सकते हैं परेशानी
■ एसिडिटी में टमाटर से बचना कुछ लोगों के लिए फायदेमंद
■ कब्ज में पपीता और गैस में अदरक राहत दे सकते हैं
पेट से जुड़ी समस्याएं आजकल काफी आम हो गई हैं। गैस, ब्लोटिंग, कब्ज और एसिडिटी जैसी परेशानियां कई बार हमारे खान-पान से भी जुड़ी होती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति का पाचन तंत्र अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। जो चीज एक व्यक्ति को राहत देती है, वही दूसरे व्यक्ति में परेशानी बढ़ा सकती है।
भोजन की मात्रा, उसे पकाने का तरीका, पानी की पर्याप्त मात्रा और आंतों की स्थिति भी पाचन पर असर डालती है। इसलिए पेट की समस्या होने पर केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को अच्छा या खराब मानना सही नहीं है। अपनी सहनशीलता के अनुसार भोजन का चुनाव करना ज्यादा जरूरी है।
ब्लोटिंग में ब्रोकली या खीरा
ब्रोकली में फाइबर और कुछ ऐसे कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं, जिन्हें आंतों के बैक्टीरिया फर्मेंट करते हैं। कुछ लोगों में इस प्रक्रिया के कारण गैस और पेट फूलने की समस्या बढ़ सकती है।
इसके मुकाबले खीरा पानी से भरपूर होता है और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। जिन लोगों को बार-बार ब्लोटिंग की शिकायत रहती है, वे अपनी सहनशीलता के अनुसार खीरे को भोजन में शामिल कर सकते हैं।
हालांकि, अगर किसी व्यक्ति को खीरा खाने के बाद भी पेट फूलने या असहजता की शिकायत होती है तो उसकी मात्रा कम करना बेहतर हो सकता है।
एसिडिटी में टमाटर या केला
टमाटर प्राकृतिक रूप से एसिडिक होता है। ऐसे में एसिड रिफ्लक्स या सीने में जलन की समस्या से परेशान कुछ लोगों में टमाटर या टमाटर से बने खाद्य पदार्थ लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।
दूसरी ओर केला आमतौर पर पेट के लिए हल्का माना जाता है और कुछ लोगों को एसिडिटी के दौरान इसे खाने से आराम महसूस हो सकता है। हालांकि, केला भी हर व्यक्ति के लिए समान रूप से फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं है।
अगर किसी खास खाद्य पदार्थ के सेवन के बाद बार-बार एसिडिटी बढ़ती है तो उसकी मात्रा और सेवन का समय ध्यान में रखना चाहिए।
कब्ज में कच्चा केला या पपीता
कब्ज की समस्या में भोजन में फाइबर और पर्याप्त तरल पदार्थ का महत्व रहता है। कच्चे केले में रेजिस्टेंट स्टार्च अधिक मात्रा में पाया जाता है, जो कुछ लोगों में कब्ज की परेशानी बढ़ा सकता है।
वहीं पपीता फाइबर से भरपूर फल है और इसमें पाचन से जुड़े एंजाइम भी पाए जाते हैं। संतुलित मात्रा में पपीता खाना कुछ लोगों के लिए नियमित मल त्याग में मददगार हो सकता है।
कब्ज की समस्या में केवल किसी एक फल पर निर्भर रहने के बजाय पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि पर भी ध्यान देना जरूरी है।
गैस में चने या अदरक
चना प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ है, लेकिन इसमें मौजूद कुछ फर्मेंटेबल कार्बोहाइड्रेट आंतों में बैक्टीरिया द्वारा टूटने के दौरान गैस पैदा कर सकते हैं। इसलिए जिन लोगों को पहले से गैस की समस्या रहती है, उन्हें चने की मात्रा अपनी सहनशीलता के अनुसार रखनी चाहिए।
दूसरी ओर अदरक का इस्तेमाल लंबे समय से पाचन को सपोर्ट करने के लिए किया जाता रहा है। कुछ लोगों में अदरक गैस और पेट की असहजता को कम करने में मदद कर सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि गैस होने पर हर व्यक्ति को चना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। भोजन की मात्रा और शरीर की प्रतिक्रिया को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
हर व्यक्ति के लिए एक जैसा डाइट प्लान नहीं
पाचन संबंधी समस्याओं में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर व्यक्ति का शरीर अलग प्रतिक्रिया करता है। किसी खाद्य पदार्थ से परेशानी होने पर उसकी मात्रा कम करके देखी जा सकती है और भोजन के बाद होने वाले लक्षणों पर ध्यान दिया जा सकता है।
बहुत ज्यादा तला-भुना और भारी भोजन, अनियमित खान-पान तथा पर्याप्त पानी न पीना भी पाचन संबंधी परेशानी को बढ़ा सकता है। इसलिए संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और नियमित दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है।
अगर गैस, ब्लोटिंग, कब्ज या एसिडिटी लगातार बनी रहती है, बहुत ज्यादा बढ़ जाती है या इसके साथ तेज दर्द, उल्टी, खून आने, वजन कम होने या निगलने में परेशानी जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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