हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों के विदेशी दौरों पर रोक, तेल संकट के बीच हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला
हरियाणा सरकार ने तेल संकट और वैश्विक तनाव को देखते हुए सरकारी कर्मचारियों और मंत्रियों के विदेशी दौरों पर सख्ती शुरू कर दी है। जापान दौरा भी रद्द कर दिया गया।
➤ हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों के विदेशी दौरों पर सख्ती
➤ कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल का जापान दौरा रद्द
➤ तेल संकट और वैश्विक तनाव के बीच नई गाइडलाइन की तैयारी
हरियाणा सरकार ने अमेरिका-ईरान तनाव और संभावित तेल संकट को देखते हुए सरकारी खर्चों पर सख्ती शुरू कर दी है। इसी कड़ी में अब सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के विदेशी दौरों पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है। इतना ही नहीं, मंत्रियों के प्रस्तावित विदेश दौरे भी रद्द किए जा रहे हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार जल्द ही इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन जारी कर सकती है। नई व्यवस्था के तहत सिर्फ बेहद जरूरी सरकारी कार्यों या विशेष परिस्थितियों में ही विदेश यात्रा की अनुमति दी जाएगी।
हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के सिलसिले में 19 से 22 जून तक जापान जाना था, लेकिन अब उनका यह दौरा रद्द कर दिया गया है। इसकी पुष्टि खुद मंत्री विपुल गोयल ने की है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल मॉरीशस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके और श्रीलंका जैसे देशों में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक को-ऑर्डिनेटर ने भी जापान यात्रा के लिए आवेदन किया था। इसके लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से अनुमति मांगी गई, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली।
श्रम एवं ऊर्जा मंत्री अनिल विज के विभाग में भी कुछ कर्मचारियों ने निजी खर्च पर विदेश जाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन विभागीय स्तर पर उन्हें मंजूरी नहीं दी गई। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार फिलहाल विदेश यात्राओं को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पहले ही अपने सरकारी काफिले में 50 प्रतिशत कटौती कर चुके हैं। साथ ही मंत्रियों से भी अनावश्यक खर्च कम करने की अपील की गई है।
इसी के तहत कई मंत्री सप्ताह में एक दिन साइकिल से या पैदल कार्यालय पहुंच रहे हैं। सरकार इसे प्रशासनिक अनुशासन और संसाधनों के बेहतर उपयोग की पहल के रूप में पेश कर रही है।
सरकार की नई गाइडलाइन में विदेश यात्राओं के लिए मुख्यमंत्री स्तर की मंजूरी अनिवार्य की जा सकती है। यात्रा के उद्देश्य और उससे होने वाले लाभ का स्पष्ट विवरण देना होगा। अनावश्यक प्रतिनिधिमंडलों पर भी रोक लगाने की तैयारी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह कदम वैश्विक आर्थिक संकट और तेल संकट के दौर में संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश देता है। साथ ही सरकार प्रशासनिक मितव्ययिता को शीर्ष स्तर से लागू करना चाहती है।
अब तक हरियाणा सरकार ने क्या-क्या कटौतियां की, जानिए
1. मुख्यमंत्री के काफिले में 50% कटौती: मुख्यमंत्री के सुरक्षा और वाहन काफिले को आधा किया गया।
2. मंत्रियों को खर्चे घटाने के निर्देश: सभी मंत्रियों से सरकारी खर्च कम करने को कहा गया।
3. सप्ताह में एक दिन साइकिल या पैदल कार्यालय: ईंधन और संसाधनों की बचत के लिए हफ्ते में एक दिन साइकिल या पैदल दफ्तर जाने की सलाह है।
4. सरकारी कर्मचारियों के विदेश दौरों पर रोक: नई गाइडलाइन लागू होने तक अनुमति नहीं।
5. निजी खर्च पर विदेश यात्रा को भी मंजूरी नहीं: कई मामलों में विभागीय अनुमति रोकी गई।
सीएम कार्यालय के अधिकारी को भी मंजूरी नहीं
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक को-ऑर्डिनेटर ने भी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के सिलसिले में जापान दौरे के लिए अप्लाई किया गया था। इसके लिए सीएम से विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे मंजूरी नहीं दी।
अनिल विज के बिजली विभाग में भी अनुमति रोकी गई
श्रम एवं ऊर्जा मंत्री अनिल विज के विभाग में कुछ कर्मचारियों ने अपने निजी खर्च पर विदेश जाने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, विभागीय स्तर पर उन्हें भी मंजूरी नहीं दी गई। इससे संकेत मिलता है कि सरकार फिलहाल विदेश यात्राओं को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए है।
एक दिन साइकिल या पैदल पहुंच रहे मंत्री
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पहले ही अपने सरकारी काफिले में 50 प्रतिशत कटौती कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रियों से भी अनावश्यक खर्च कम करने की अपील की है। इसी के तहत कई मंत्री सप्ताह में एक दिन साइकिल से या पैदल अपने कार्यालय पहुंच रहे हैं। सरकार इसे प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन और संसाधनों के बेहतर उपयोग की पहल के रूप में पेश कर रही है।
Akhil Mahajan