“हरियाणा राज्यसभा चुनाव: जीत का गणित साफ, जानें फिर भी क्यों बना हुआ है उलटफेर का डर?”

हरियाणा राज्यसभा चुनाव में विधानसभा का गणित भाजपा और कांग्रेस को एक-एक सीट देता दिख रहा है, लेकिन क्रॉस वोटिंग और वोट रद्द होने की आशंका से उलटफेर की चर्चा बनी हुई है।

सत्ता-विपक्ष के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई, सैनी और हुड्डा की साख दांव पर

➤ विधानसभा के मौजूदा गणित में भाजपा और कांग्रेस को एक-एक सीट मिलती दिख रही
➤ क्रॉस वोटिंग और वोट रद्द होने की आशंका से बढ़ा राजनीतिक सस्पेंस
➤ सैनी और हुड्डा की प्रतिष्ठा से जुड़ गया चुनाव

हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव में विधानसभा का गणित काफी हद तक साफ दिखाई दे रहा है। मौजूदा संख्या बल के आधार पर एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में उलटफेर की चर्चा लगातार बनी हुई है। विश्लेषकों का कहना है कि हरियाणा में पहले भी राज्यसभा चुनाव के दौरान आखिरी वक्त पर राजनीतिक समीकरण बदले हैं। इसी वजह से इस बार भी दल पूरी सतर्कता बरत रहे हैं और अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं।

विधानसभा का गणित क्या कहता है

हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। इनमें Bharatiya Janata Party के 48 विधायक हैं, जबकि Indian National Congress के 37 विधायक हैं। इसके अलावा Indian National Lok Dal के 2 विधायक और 3 निर्दलीय विधायक भी हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को 31 वोट की जरूरत होती है। इस हिसाब से भाजपा अपने विधायकों के दम पर एक सीट आसानी से जीत सकती है। वहीं कांग्रेस के पास भी 31 से ज्यादा विधायक हैं, इसलिए वह भी एक सीट जीतने की स्थिति में है। इसी कारण सामान्य राजनीतिक गणित के आधार पर दोनों दलों के खाते में एक-एक सीट जाती दिखाई दे रही है।

फिर भी क्यों बना हुआ है सस्पेंस

हालांकि सीटों का गणित लगभग साफ है, लेकिन कुछ ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से उलटफेर की आशंका अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सबसे बड़ा कारण क्रॉस वोटिंग की संभावना है। अगर किसी पार्टी के कुछ विधायक दूसरी पार्टी या किसी अन्य उम्मीदवार को वोट दे देते हैं तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। दूसरा कारण वोट रद्द होने की संभावना भी है। राज्यसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया थोड़ी अलग होती है और अगर कोई विधायक गलत तरीके से वोट डाल देता है तो उसका वोट अमान्य हो सकता है। हरियाणा में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जब वोट रद्द होने या क्रॉस वोटिंग की वजह से परिणाम अप्रत्याशित रहे।

इनेलो के रुख पर भी नजर

इस चुनाव में Indian National Lok Dal के दो विधायकों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है। हालांकि पार्टी ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है कि वह किसे समर्थन देगी। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इनेलो मतदान से दूरी बना सकती है। अगर ऐसा होता है तो चुनावी गणित में कुछ बदलाव संभव है।

निर्दलीय उम्मीदवार की उम्मीद

राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार Satish Nandal भी मैदान में हैं। मौजूदा गणित के अनुसार उनकी जीत आसान नहीं मानी जा रही है, लेकिन अगर क्रॉस वोटिंग होती है या किसी पार्टी के वोट रद्द होते हैं तो उनके लिए अवसर बन सकता है। यही कारण है कि राजनीतिक दलों की नजर अपने विधायकों को एकजुट रखने पर है और मतदान की पूरी प्रक्रिया पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।

ऐसे में उलटफेर संभव है, लेकिन यह केवल कुछ खास स्थितियों में ही हो सकता है। मौजूदा गणित में भाजपा और कांग्रेस की एक-एक सीट लगभग तय मानी जा रही है। फिर भी राजनीति में आखिरी समय तक कुछ समीकरण बदल सकते हैं। हरियाणा राज्यसभा चुनाव में उलटफेर इन 4 तरीकों से हो सकता है 👇

1️⃣ क्रॉस वोटिंग

सबसे बड़ा कारण यही हो सकता है।
अगर कांग्रेस के कुछ विधायक भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को वोट दे देते हैं तो समीकरण बदल सकता है।

उदाहरण के लिए:

  • कांग्रेस के पास 37 वोट हैं

  • जीत के लिए 31 चाहिए

अगर 6-7 विधायक भी क्रॉस वोटिंग कर दें तो कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध की सीट खतरे में पड़ सकती है।

2️⃣ वोट रद्द होना

राज्यसभा चुनाव में वोट डालने का तरीका अलग होता है।
अगर कोई विधायक सही तरीके से नंबरिंग नहीं करता या गलती कर देता है तो उसका वोट रद्द हो सकता है।

ऐसी स्थिति पहले भी हरियाणा में हो चुकी है (2016 और 2022 में)।
अगर कांग्रेस या किसी दल के वोट रद्द हो जाते हैं तो नतीजे पलट सकते हैं।

3️⃣ इनेलो का समर्थन

Indian National Lok Dal के 2 विधायक हैं।
अगर ये दोनों किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में जाते हैं तो संख्या बढ़ सकती है।

हालांकि अभी चर्चा है कि इनेलो मतदान से दूरी बना सकती है।

4️⃣ निर्दलीय और अतिरिक्त वोटों का गणित

भाजपा के पास 48 विधायक हैं।
एक सीट जीतने के बाद उसके पास 17 अतिरिक्त वोट बचते हैं

अगर ये वोट और 3 निर्दलीय विधायक मिलकर किसी उम्मीदवार को समर्थन देते हैं, और साथ में क्रॉस वोटिंग भी हो जाए, तो तीसरा उम्मीदवार भी मुकाबले में आ सकता है।

आसान भाषा में समझें

  • सामान्य स्थिति:

    • भाजपा 1 सीट

    • कांग्रेस 1 सीट

  • उलटफेर की स्थिति:

    • कांग्रेस के कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग करें

    • या वोट रद्द हो जाएं

    • या अतिरिक्त समर्थन मिल जाए

सत्ता-विपक्ष के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई, सैनी और हुड्डा की साख दांव पर


हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए चल रहा चुनाव केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए प्रतिष्ठा की बड़ी राजनीतिक लड़ाई बन गया है। इस चुनाव में जहां सत्तारूढ़ भाजपा अपनी रणनीतिक ताकत दिखाना चाहती है, वहीं कांग्रेस अपने विधायकों की एकजुटता और नेतृत्व की मजबूती साबित करने की कोशिश कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के परिणाम से प्रदेश की राजनीति में नेतृत्व की पकड़ और संगठनात्मक क्षमता का बड़ा संदेश जाएगा।

भाजपा के लिए इतिहास दोहराने का मौका

सत्तारूढ़ दल Bharatiya Janata Party के सामने इस चुनाव में इतिहास दोहराने का अवसर है। भाजपा पहले भी राज्यसभा की दोनों सीटों पर कब्जा बनाए हुए थी और इस बार भी पार्टी रणनीतिक तैयारी के साथ मैदान में उतरी है।

पार्टी का लक्ष्य केवल सीट जीतना ही नहीं बल्कि यह भी दिखाना है कि विधानसभा चुनाव के बाद भी उसकी राजनीतिक पकड़ मजबूत है और विपक्ष के कुछ विधायकों पर भी उसका प्रभाव बना हुआ है।

कांग्रेस की किलेबंदी और सतर्कता

दूसरी ओर Indian National Congress ने क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए अपने विधायकों को पहले हिमाचल प्रदेश में ठहराया था। पार्टी ने उन्हें एक साथ रखने के लिए विशेष व्यवस्था की ताकि कोई विधायक सत्ता पक्ष के संपर्क में न आ सके।

कांग्रेस नेतृत्व ने पूरे चुनाव पर करीबी नजर बनाए रखी है और पार्टी हाईकमान भी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है।

हुड्डा की प्रतिष्ठा भी दांव पर

इस चुनाव को नेता प्रतिपक्ष Bhupinder Singh Hooda की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

अगर कांग्रेस उम्मीदवार Karmveer Bauddh जीत हासिल करते हैं तो यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस विधायकों पर हुड्डा की पकड़ मजबूत है और वे अपने नेतृत्व तथा संगठनात्मक प्रभाव को बनाए हुए हैं।

लेकिन यदि चुनाव में हार होती है तो विपक्ष के साथ-साथ पार्टी के अंदर भी यह चर्चा तेज हो सकती है कि विधायकों पर उनका नियंत्रण कमजोर पड़ गया है।

रोहतक को हुड्डा का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार Satish Nandal भी रोहतक से हैं और जाट बिरादरी से आते हैं। यदि नांदल जीत हासिल करते हैं तो इसे हुड्डा के गढ़ में भाजपा की राजनीतिक सेंध के रूप में देखा जाएगा।

सैनी की पहली बड़ी परीक्षा

मुख्यमंत्री बनने के बाद Nayab Singh Saini के लिए भी यह चुनाव पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।

अगर भाजपा दोनों सीटों पर जीत हासिल करती है तो इससे सैनी की रणनीतिक क्षमता और राजनीतिक पकड़ को मजबूत माना जाएगा। इसके साथ ही पार्टी नेतृत्व के सामने उनका कद और प्रभाव भी बढ़ सकता है।

विधानसभा में वोटों का गणित

हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। इनमें भाजपा के पास 48 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। इसके अलावा Indian National Lok Dal के 2 विधायक और 3 निर्दलीय विधायक भी हैं।

एक उम्मीदवार को जीत के लिए 31 वोट की आवश्यकता होती है। भाजपा अपने 48 वोटों के दम पर एक सीट आसानी से जीत सकती है। वहीं कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, इसलिए वह भी एक सीट जीतने की स्थिति में दिखाई दे रही है।

भाजपा के पास एक सीट जीतने के बाद 17 वोट बचते हैं। यदि ये वोट और तीन निर्दलीय विधायक सतीश नांदल को समर्थन देते हैं तो उनकी संख्या बढ़ सकती है। अगर इनेलो के दोनों विधायक भी उनके साथ आते हैं तो उन्हें जीत के लिए अभी भी 9 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।