हिमाचल के मुख्य सचिव पर जमीन घोटाले के गंभीर आरोप IAS अधिकारियों के बीच खुलकर सामने आई टकराव की जंग

हिमाचल के मुख्य सचिव संजय गुप्ता पर चेस्टर हिल प्रोजेक्ट से जुड़े जमीन घोटाले के आरोप लगे हैं। उन्होंने आरोपों को साजिश बताया है, जबकि मामले की जांच जारी है।

हिमाचल के मुख्य सचिव पर जमीन घोटाले के गंभीर आरोप IAS अधिकारियों के बीच खुलकर सामने आई टकराव की जंग

■ हिमाचल के मुख्य सचिव पर जमीन घोटाले के आरोप, IAS लॉबी में टकराव
■ चेस्टर हिल प्रोजेक्ट को लेकर विवाद, सोलन DC कर रहे जांच
■ CS संजय गुप्ता ने आरोपों को बताया साजिश, कई अफसरों पर पलटवार


हिमाचल प्रदेश की नौकरशाही में बड़ा विवाद सामने आया है, जहां मुख्य सचिव संजय गुप्ता पर जमीन घोटाले के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला सोलन जिले के चर्चित चेस्टर हिल-2 और चेस्टर हिल-4 प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसमें कथित गड़बड़ियों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। आरोप है कि इन प्रोजेक्ट्स को फायदा पहुंचाने के बदले में कथित तौर पर पैसे लिए गए और उसी रकम से पंजाब में जमीन खरीदी गई।

इन आरोपों के बीच मुख्य सचिव संजय गुप्ता खुद मीडिया के सामने आए और उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पंजाब के खरड़ में जो जमीन खरीदी है, वह पूरी तरह वैध है और करीब 1 करोड़ 38 लाख रुपये में अपने निजी पैसों से खरीदी गई है। उन्होंने दावा किया कि जमीन खरीदने के लिए उन्होंने सरकार से आवश्यक अनुमति भी ली थी और उनके पास सभी दस्तावेज मौजूद हैं।

संजय गुप्ता ने इस पूरे मामले को साजिश करार देते हुए पूर्व मुख्य सचिव आर डी दीवान, प्रबोध सक्सेना और इंजीनियर सुनील ग्रोवर पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उन्होंने बिजली बोर्ड में रहते हुए सरकार को फायदा पहुंचाया और कुछ अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की थी, जिससे नाराज होकर उनके खिलाफ यह साजिश रची जा रही है।

वहीं अधिवक्ता विनय शर्मा ने छोटा शिमला थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि मुख्य सचिव ने 3.18 एकड़ जमीन खरीदी, जिसकी वास्तविक बाजार कीमत करीब 25 करोड़ रुपये है, जबकि इसे 1.38 करोड़ रुपये में दिखाया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह खरीद चेस्टर हिल प्रोजेक्ट से जुड़े कथित पैसों से की गई हो सकती है।

इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी नेताओं राकेश सिंघा और संजय चौहान ने कहा कि प्रदेश में रियल एस्टेट के नाम पर भू-माफिया सक्रिय हैं और कुछ अधिकारी उनके साथ मिलकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो सचिवालय का घेराव किया जाएगा।

उधर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि यदि जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल इस पूरे मामले की जांच सोलन के डीसी स्तर पर की जा रही है और आने वाले दिनों में इसकी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। यह विवाद न केवल प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि प्रदेश की नौकरशाही में गहराते आपसी टकराव को भी उजागर कर रहा है।