मरी हुई पत्नी के नाम 90 गाड़ियां! करनाल के बुजुर्ग की पेंशन कटते ही खुला सरकारी सिस्टम का चौंकाने वाला खेल

करनाल में सरकारी रिकॉर्ड की बड़ी चूक सामने आई है, जहां 6 साल पहले मृत महिला के नाम 16 जिलों में 90 वाहन दर्ज कर दिए गए। इसी वजह से बुजुर्ग पति की बुढ़ापा पेंशन बंद हो गई।

मरी हुई पत्नी के नाम 90 गाड़ियां! करनाल के बुजुर्ग की पेंशन कटते ही खुला सरकारी सिस्टम का चौंकाने वाला खेल

➤ करनाल में 6 साल पहले मृत महिला के नाम 16 जिलों में 90 वाहन दर्ज
➤ करोड़ों की संपत्ति दिखाकर 70 वर्षीय पति की बुढ़ापा पेंशन बंद
➤ दो महीने से दफ्तरों के चक्कर, अब तक नहीं सुधरी फैमिली आईडी


हरियाणा के करनाल जिले में सरकारी रिकॉर्ड सिस्टम की ऐसी चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने न सिर्फ एक बुजुर्ग की नींद उड़ा दी, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक 70 वर्षीय बुजुर्ग को तब झटका लगा, जब यह सामने आया कि उनकी 6 साल पहले मृत पत्नी के नाम पर हरियाणा के 16 जिलों में 90 वाहन दर्ज कर दिए गए हैं। इसी ‘कागजी करोड़पति’ बनने की वजह से बुजुर्ग की बुढ़ापा पेंशन बंद कर दी गई।

पीड़ित रविंद्र का कहना है कि उनके पास खुद के नाम पर भी सिर्फ एक पुरानी बाइक और एक टूटी-फूटी स्कूटी है, जबकि उनकी पत्नी के नाम सरकारी रिकॉर्ड में कार, ट्रक, बाइक और स्कूटी तक दर्ज कर दी गई हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन गाड़ियों को पत्नी के नाम दिखाया गया है, उनमें से कई तो उनकी मृत्यु के बाद खरीदी हुई बताई जा रही हैं।

रविंद्र ने बताया कि वे दिसंबर में बैंक पहुंचे थे, ताकि नवंबर महीने की पेंशन निकाल सकें। बैंक में पता चला कि उनकी पेंशन खाते में आई ही नहीं है, जबकि गांव के अन्य बुजुर्गों की पेंशन जमा हो चुकी थी। इसके बाद वे समाज कल्याण विभाग के कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें बताया गया कि उनकी पेंशन बंद कर दी गई है।

जब उन्होंने फैमिली आईडी ऑनलाइन निकाली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। फैमिली आईडी में उनकी पत्नी को ‘करोड़ों की संपत्ति वाली’ बताया गया था।

 16 जिलों में 90 वाहन, रिकॉर्ड देख उड़े होश

रविंद्र के अनुसार, फैमिली आईडी में फरीदाबाद, सोनीपत, करनाल, पानीपत, रेवाड़ी, नारनौल, बहादुरगढ़, हिसार, गुरुग्राम, कुरुक्षेत्र, सिरसा, रोहतक समेत कुल 16 जिलों के आरटीओ में उनकी पत्नी के नाम 90 वाहन दर्ज हैं। इन वाहनों में बाइक, स्कूटी, कार और ट्रक तक शामिल हैं।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पत्नी सविता की मौत 2019 में हो चुकी थी, लेकिन रिकॉर्ड में 2021 और उसके बाद खरीदी गई गाड़ियां भी उनके नाम पर चढ़ी दिखाई जा रही हैं।

नियमों की मार पड़ी बुजुर्ग पर

हरियाणा सरकार की बुढ़ापा पेंशन योजना के तहत 60 साल से अधिक उम्र के उन लोगों को पेंशन दी जाती है, जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपए से कम हो। सरकारी रिकॉर्ड में पत्नी के नाम 90 वाहन दर्ज होने से परिवार को उच्च आय वर्ग में डाल दिया गया और इसी आधार पर रविंद्र की पेंशन नवंबर 2025 से बंद कर दी गई।दो महीने से दफ्तर-दफ्तर भटकने को मजबूर

रविंद्र का कहना है कि वे पिछले दो महीने से समाज कल्याण विभाग और अन्य कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी फैमिली आईडी ठीक नहीं की गई। हर दफ्तर से सिर्फ आश्वासन मिलता है, कार्रवाई कहीं नजर नहीं आती।

यह मामला न सिर्फ एक बुजुर्ग की पेंशन का है, बल्कि सरकारी डेटा सिस्टम में भारी लापरवाही और जवाबदेही की कमी को भी उजागर करता है। सवाल यह है कि आखिर मृत व्यक्ति के नाम इतनी बड़ी संख्या में वाहन दर्ज कैसे हो गए और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?