50 लाख खर्च कर अमेरिका भेजा, 25 लाख में घर लौटा बेटे का श*व
करनाल के 24 वर्षीय गौरव की अमेरिका में ट्रक हादसे में मौत हो गई। परिवार को शव भारत लाने में 25 लाख रुपये खर्च करने पड़े, जबकि विदेश भेजने में 50 लाख रुपये लगे थे।
अमेरिका में सड़क हादसे में करनाल के 24 वर्षीय गौरव की मौत
शव भारत लाने में परिवार को करीब 25 लाख रुपये खर्च करने पड़े
अमेरिका भेजने के लिए पहले ही प्लॉट और दुकान बेचकर 50 लाख रुपये लगाए थे
हरियाणा के करनाल जिले के गांव बालरागड़ान में उस समय मातम छा गया, जब अमेरिका में सड़क हादसे का शिकार हुए 24 वर्षीय गौरव का शव मंगलवार सुबह गांव पहुंचा। बेटे का पार्थिव शरीर कफन में लिपटा देख मां और बहन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। दोनों बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ीं। पूरे गांव की आंखें नम हो गईं।
परिजनों के अनुसार गौरव की 27 मई को अमेरिका में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। सोमवार देर शाम उसका शव अमेरिका से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, जहां से एम्बुलेंस के जरिए उसे गांव लाया गया। गांव में अंतिम संस्कार किया गया, जहां पिता ने नम आंखों से बेटे को मुखाग्नि दी।
26 मई को हुई थी आखिरी बातचीत
मृतक के पिता रामफल ने बताया कि 26 मई को गौरव से उनकी आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। वह अमेरिका के कैलिफोर्निया में ट्रक चलाने का काम करता था और एक डिलीवरी के लिए जा रहा था।
रास्ते में एक रेस्टोरेंट पर रुककर उसने परिवार को फोन किया और बताया कि वह चाय पीने के लिए रुका है। इसके बाद उसने दोबारा बात करने की बात कही, लेकिन वह कॉल परिवार के लिए आखिरी साबित हुई।
ट्रक खाई में गिरा, मौके पर मौत
परिजनों को बाद में अमेरिकी पुलिस अधिकारियों से जानकारी मिली कि रेस्टोरेंट से निकलने के कुछ समय बाद गौरव के ट्रक का संतुलन बिगड़ गया। ट्रक सड़क से नीचे खाई में जा गिरा। हादसा इतना गंभीर था कि गौरव की मौके पर ही मौत हो गई।
दोपहर करीब ढाई बजे अमेरिकी पुलिस अधिकारियों का फोन आया, जिसने परिवार को इस दुखद हादसे की सूचना दी।
शव भारत लाने में खर्च हुए 25 लाख रुपये
गौरव की मौत के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसका शव भारत लाने की थी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर मदद मांगी, लेकिन कोई ठोस सहायता नहीं मिल सकी।
आखिरकार अमेरिका में रहने वाले कुछ भारतीय परिचितों की मदद से शव को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसमें परिवार के करीब 25 लाख रुपये खर्च हो गए।
अमेरिका भेजने के लिए बेचना पड़ा था प्लॉट और दुकान
पिता रामफल ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए गौरव करीब दो साल पहले अमेरिका गया था। हालांकि उन्होंने बेटे को विदेश जाने से रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए दृढ़ था।
गौरव एक एजेंट के माध्यम से डंकी रूट से करीब छह महीने की यात्रा के बाद अमेरिका पहुंचा था। उसे अमेरिका भेजने में परिवार के लगभग 50 लाख रुपये खर्च हुए थे। इसके लिए परिवार को अपना प्लॉट और दुकान तक बेचनी पड़ी थी।
इकलौता बेटा था गौरव
रामफल ने बताया कि परिवार के पास केवल करीब दो एकड़ कृषि भूमि है, जिससे घर का गुजारा चलता है। गौरव परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी एक बहन है, जिसकी शादी करीब एक वर्ष पहले हो चुकी है।
बेटे की मौत के बाद अब परिवार में केवल माता-पिता ही रह गए हैं। गांव में हर किसी की जुबान पर यही चर्चा है कि बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश गया युवक अब ताबूत में लौटकर घर आया।
pooja