कुरुक्षेत्र में धान घोटाले में पहली FIR, ₹5.81 करोड़ का गबन उजागर 24 हजार क्विंटल धान गायब
कुरुक्षेत्र में धान घोटाले में पहली FIR दर्ज हुई है, जिसमें एक राइस मिल में 24 हजार क्विंटल धान की कमी और ₹5.81 करोड़ के गबन का मामला सामने आया है।
■ कुरुक्षेत्र में धान घोटाले में पहली FIR दर्ज, 24 हजार क्विंटल स्टॉक गायब
■ एक राइस मिल में ₹5.81 करोड़ के गबन का खुलासा, जांच के बाद कार्रवाई
■ फर्जी गेट पास और मिलीभगत के आरोपों से मचा हड़कंप
■ धान घोटाले पर पहली बड़ी कार्रवाई, करोड़ों के गबन ने खोली सिस्टम की पोल
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में लंबे समय से चर्चा में चल रहे धान घोटाले में आखिरकार पहली FIR दर्ज हो गई है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग (DFSC) की जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक राइस मिल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि मिल में 24,318.75 क्विंटल धान का स्टॉक कम पाया गया, जिसकी कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आधार पर करीब ₹5 करोड़ 81 लाख आंकी गई है।
DFSC इंस्पेक्टर रिंकू कुमार ने थाना सिटी पिहोवा में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 सीजन में संबंधित राइस मिल को कस्टम मिलिंग के लिए 39,373.75 क्विंटल धान आवंटित किया गया था। 25 नवंबर 2025 को चंडीगढ़ से आई टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में पूरा स्टॉक मौजूद पाया गया था, लेकिन इसके बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई।
करीब चार महीने बाद, 17 मार्च को DFSC के निर्देश पर AFSO शाहाबाद राजीव सैनी और IFS गौरव अरोड़ा की टीम ने दोबारा फिजिकल वेरिफिकेशन किया। इस दौरान मिल में भारी मात्रा में धान की कमी पाई गई। यह धान सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) के रूप में भारतीय खाद्य निगम (FCI) को सौंपा जाना था, लेकिन स्टॉक में भारी अंतर मिलने से मामला गंभीर हो गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए और इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
जिले में पहली FIR दर्ज होने के बाद अन्य राइस मिलर्स में हड़कंप मच गया है। मिल संचालकों को अब अपनी मिलों पर भी छापेमारी और जांच का डर सताने लगा है। प्रशासन की इस कार्रवाई को बड़े स्तर पर चल रहे संभावित घोटाले की शुरुआत माना जा रहा है।
किसान नेता प्रिंस वड़ैच ने इस पूरे मामले में राइस मिलर्स के साथ-साथ कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फर्जी गेट पास काटकर इस घोटाले को अंजाम दिया गया और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए, जिससे सच्चाई सामने आ सके।
इससे पहले भी करीब तीन महीने पहले जिले के 6 मार्केट कमेटी सेक्रेटरी को चार्जशीट किया गया था। इनमें थानेसर, पिहोवा, शाहाबाद, पिपली, इस्माइलाबाद और लाडवा के अधिकारी शामिल थे। इन पर आरोप था कि उन्होंने मिलर्स को गेट पास जारी करने के लिए अपने यूजर आईडी और पासवर्ड साझा किए।
भाकियू (चढूनी) के प्रवक्ता राकेश बैंस पहले ही पूरे प्रदेश में करीब ₹5 हजार करोड़ के धान घोटाले के आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने इस मामले की CBI जांच की मांग भी की थी और दावा किया था कि संगठन सरकार को हजारों करोड़ के घोटाले के सबूत सौंप चुका है।
शिकायतों के बाद कुरुक्षेत्र के DFSC अधिकारी को भी पद से हटाया जा चुका है। अब पहली FIR के साथ ही इस पूरे मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
shubham