महाकाल मंदिर में VIP दर्शन पर SC की सख्त टिप्पणी, जानें क्या कहा
महाकालेश्वर मंदिर में VIP दर्शन पर रोक लगाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मंदिर में प्रवेश तय करना न्यायपालिका का काम नहीं है।
- महाकाल मंदिर में VIP दर्शन पर रोक की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
- कोर्ट बोली- मंदिर में प्रवेश तय करना न्यायपालिका का काम नहीं
- अनुच्छेद 14 के उल्लंघन की दलील को नहीं माना गया
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए उसे खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मंदिर में किसे प्रवेश देना है और किसे नहीं, यह तय करना अदालत का काम नहीं है।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ के समक्ष आया, जिसमें जस्टिस महादेवन और जस्टिस जॉयमाला बागची भी शामिल थे। याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने महाकाल मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी दर्शन को लेकर भेदभाव का आरोप लगाया था।
याचिका में कहा गया था कि वीआईपी लोगों को गर्भगृह में प्रवेश देकर जल अर्पण और पूजा की अनुमति दी जाती है, जबकि आम श्रद्धालुओं को दूर से ही दर्शन करने पड़ते हैं। इसे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि गर्भगृह में प्रवेश के नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी वीआईपी को प्रशासनिक आदेश से गर्भगृह में जाने दिया जाता है, तो आम जनता को भी वही अधिकार मिलना चाहिए।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर अदालत मंदिरों में प्रवेश के नियम तय करने लगेगी, तो न्यायपालिका पर अत्यधिक बोझ बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन और मंदिर प्रबंधन का विषय है, न कि अदालत का।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि आज अनुच्छेद 14 के तहत गर्भगृह में प्रवेश की मांग की जा रही है, तो कल अनुच्छेद 19 के तहत मंत्र पढ़ने का अधिकार भी मांगा जा सकता है। कोर्ट ने इसे खतरनाक परंपरा बताते हुए याचिका खारिज कर दी।
इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भी इसी याचिका को खारिज कर चुका था, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी।
Akhil Mahajan