नया इनकम टैक्स कानून 2026: 60 साल पुराना सिस्टम बदलेगा, ITR भरने के नियम होंगे सख्त
नया इनकम टैक्स एक्ट 2026 लागू होने जा रहा है। ITR-1 से ITR-7 तक नियम बदलेंगे, डिजिटल फाइलिंग अनिवार्य होगी और डिस्क्लोजर सख्त होंगे।
➤ 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट
➤ ITR-1 से ITR-7 तक नियम बदले, डिजिटल फाइलिंग अनिवार्य
➤ छोटे टैक्सपेयर्स पर भी बढ़ेगा डिस्क्लोजर का बोझ
भारत की इनकम टैक्स व्यवस्था अब एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की ओर बढ़ रही है। केंद्र सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट, 2025 को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की घोषणा कर दी है, जिसके साथ ही करीब 60 साल पुराना इनकम टैक्स एक्ट, 1961 समाप्त हो जाएगा। इस नए कानून को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने इनकम टैक्स रूल्स, 2026 का ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें संशोधित ITR फॉर्म्स भी शामिल किए गए हैं। सरकार ने इन ड्राफ्ट नियमों को पब्लिक डोमेन में रखते हुए टैक्सपेयर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और अन्य प्रोफेशनल्स से 22 फरवरी 2026 तक सुझाव मांगे हैं।
सबसे अहम बात यह है कि नया कानून लागू होने के बाद आम टैक्सपेयर के लिए रिटर्न फाइल करने का तरीका, पात्रता और जवाबदेही पहले से काफी अलग और सख्त हो जाएगी। ITR-1 से लेकर ITR-7 तक की पूरी व्यवस्था को नए सिरे से संरचित किया गया है, ताकि टैक्स सिस्टम ज्यादा डिजिटल, डेटा-आधारित और पारदर्शी बन सके।
ITR-1 अब भी सरल, लेकिन दायरा सीमित
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार ITR-1 (सहज) पहले की तरह उन रेजिडेंट इंडिविजुअल्स के लिए रहेगा, जिनकी आय केवल सैलरी, एक हाउस प्रॉपर्टी और ब्याज जैसे साधारण स्रोतों से होती है। हालांकि, इसमें सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब डिजिटल फाइलिंग सामान्य नियम होगी। केवल 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के सुपर सीनियर सिटिजन्स को ही पेपर फाइलिंग की छूट मिलेगी। बाकी सभी टैक्सपेयर्स को EVC या डिजिटल सिग्नेचर के जरिए ऑनलाइन रिटर्न फाइल करना अनिवार्य होगा।
ITR-2 बनेगा जटिल मामलों का डिफॉल्ट फॉर्म
जिन टैक्सपेयर्स की आय बिजनेस या प्रोफेशन से नहीं है, लेकिन जिनके पास कैपिटल गेंस, एक से अधिक हाउस प्रॉपर्टी, फॉरेन इनकम या फॉरेन एसेट्स हैं, उन्हें सीधे ITR-2 फाइल करना होगा। नए नियमों के तहत जैसे ही कोई टैक्सपेयर ITR-1 के दायरे से बाहर होगा, वह स्वतः ITR-2 में शिफ्ट हो जाएगा।
नए कैपिटल गेंस फ्रेमवर्क और विदेशी संपत्तियों पर सख्त निगरानी के चलते ITR-2 में अब पहले से कहीं ज्यादा डिटेल डिस्क्लोजर देना अनिवार्य होगा।
ITR-3 में बिजनेस टैक्सपेयर्स पर बढ़ेगा दबाव
बिजनेस या प्रोफेशन से आय अर्जित करने वालों के लिए ITR-3 ही मुख्य फॉर्म रहेगा। ड्राफ्ट नियम स्पष्ट करते हैं कि जैसे ही कोई टैक्सपेयर प्रिजम्पटिव टैक्सेशन की सीमाओं से बाहर जाएगा, उसे ITR-3 भरना अनिवार्य होगा।
इसमें पर्क्विजिट्स, कैपिटल गेंस और स्पेशल इनकम कैटेगरी से जुड़े नए प्रावधानों के कारण प्रोफेशनल्स, ट्रेडर्स और हाई-इनकम टैक्सपेयर्स के लिए डिस्क्लोजर का बोझ काफी बढ़ जाएगा।
ITR-4 (सुगम) पर सबसे कड़ी सख्ती
सबसे बड़ा झटका ITR-4 (सुगम) फाइल करने वालों को लगने वाला है। यह फॉर्म अब भी प्रिजम्पटिव टैक्सेशन वालों के लिए रहेगा, लेकिन इसके लिए पात्रता की शर्तें काफी सख्त कर दी गई हैं।
अब वे टैक्सपेयर ITR-4 नहीं भर पाएंगे जिनके पास फॉरेन एसेट्स या फॉरेन इनकम, कंपनी डायरेक्टरशिप, अनलिस्टेड शेयर, 50 लाख से अधिक सालाना आय, दो से ज्यादा हाउस प्रॉपर्टी, कैरी फॉरवर्ड लॉस या 5,000 रुपये से ज्यादा कृषि आय है।
इसका मतलब साफ है कि ITR-4 अब पहले जैसा आसान विकल्प नहीं रहेगा और कई छोटे बिजनेस ओनर्स को मजबूरी में ITR-3 में जाना पड़ेगा।
ITR-5 और ITR-6 में डिजिटल निगरानी मजबूत
ITR-5 और ITR-6 का बेसिक ढांचा पहले जैसा ही रहेगा, लेकिन नए नियमों में डिजिटल कंप्लायंस, ऑडिट रिपोर्टिंग और डेटा लिंकिंग को और सख्त किया गया है। कंपनियों के लिए डिजिटल सिग्नेचर से फाइलिंग पहले की तरह अनिवार्य रहेगी।
इसके साथ ही ITR-A को बिजनेस रीऑर्गनाइजेशन से और ITR-BL को ब्लॉक असेसमेंट मामलों से जोड़ा गया है।
ITR-7 में ट्रस्ट्स और संस्थानों पर कड़ी नजर
ITR-7, जो चैरिटेबल ट्रस्ट्स, धार्मिक संस्थानों और राजनीतिक दलों के लिए होता है, उसमें पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। अब डोनेशन, ऑडिट रिपोर्ट और फंड के उपयोग की पूरी जानकारी सीधे रिटर्न से लिंक होगी।
ड्राफ्ट नियम चेतावनी देते हैं कि फाइलिंग में देरी या गड़बड़ी होने पर रजिस्ट्रेशन और टैक्स छूट दोनों खतरे में पड़ सकती हैं।
सरकार बदलाव क्यों कर रही है
ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स, 2026 का साफ संदेश है कि आने वाले समय में टैक्स सिस्टम पूरी तरह डिजिटल, सिंपल रिटर्न्स सीमित, डिस्क्लोजर ज्यादा और डेटा-आधारित जांच पर केंद्रित होगा। सरकार ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है और टैक्सपेयर्स के पास 22 फरवरी 2026 तक मौका है कि वे अपने सुझाव दें।
1 अप्रैल 2026 से नया कानून लागू होते ही ITR के नाम भले वही रहें, लेकिन फाइलिंग की प्रक्रिया और जिम्मेदारियां पूरी तरह बदल जाएंगी।
Akhil Mahajan