50 बच्चों से भरी स्कूल बस गड्ढे में उतरी, बड़ा हादसा टला
महेंद्रगढ़ के नारनौल में 50 बच्चों से भरी निजी स्कूल बस सड़क से उतरकर गड्ढे में चली गई। स्थानीय लोगों ने सभी बच्चों और टीचर को सुरक्षित बाहर निकाला। बड़ा हादसा टल गया।
नारनौल में 50 बच्चों से भरी स्कूल बस गड्ढे में उतरने से बड़ा हादसा टला
बस के दोनों टायर गड्ढे में धंसे, स्थानीय लोगों ने बच्चों और टीचर को सुरक्षित निकाला
स्कूल प्रबंधन ने दूसरी बस भेजकर सभी बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाया
महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल में मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। प्राइवेट स्कूल की करीब 50 बच्चों से भरी बस अचानक असंतुलित होकर पक्की सड़क से नीचे गड्ढे में उतर गई। गनीमत रही कि बस पलटी नहीं और सभी बच्चे, टीचर तथा चालक सुरक्षित बच गए।
जानकारी के अनुसार शहर के कुलताजपुर रोड स्थित एक निजी स्कूल की बस बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। बस ने नहर पार सिंघाना रोड स्थित हीरानगर कॉलोनी से बच्चों को लेने के बाद आगे बढ़ना शुरू किया। इसी दौरान चालक का संतुलन बिगड़ गया और बस सड़क से नीचे उतर गई।
हादसे में बस के कंडक्टर साइड के आगे और पीछे दोनों टायर सड़क किनारे बने गड्ढे में धंस गए। बस का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और उसके पलटने का खतरा पैदा हो गया। हालांकि चालक ने किसी तरह बस को संभाल लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
बस के गड्ढे में उतरते ही अंदर बैठे बच्चों में चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और बिना देर किए बच्चों तथा बस में मौजूद महिला टीचर को सुरक्षित बाहर निकाला। स्थानीय लोगों के मुताबिक बस में उस समय करीब 50 बच्चे सवार थे। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी भी बच्चे या स्टाफ को चोट नहीं लगी।
हादसे के बाद मौके पर मौजूद महिलाओं ने बस चालक को जमकर खरी-खोटी सुनाई। उनका कहना था कि सड़क पर्याप्त चौड़ी है और अन्य स्कूल बसें भी इसी रास्ते से सुरक्षित निकलती हैं। ऐसे में बस को सड़क से नीचे उतारना चालक की लापरवाही को दर्शाता है।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक भी मौके पर पहुंच गए। वे अपने-अपने बच्चों को संभालते नजर आए। हादसे के बाद कई बच्चे डरे और सहमे हुए दिखाई दिए।
घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रबंधन भी मौके पर पहुंच गया। इसके बाद दूसरी बस की व्यवस्था कर सभी बच्चों को सुरक्षित स्कूल भेजा गया। इस पूरे घटनाक्रम में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, जिससे सभी ने राहत की सांस ली।
pooja