रिफाइनरी में मजदूरों का उबाल बरकरार, इफटू बोली– वेतन बढ़ाओ, झूठे केस हटाओ
पानीपत रिफाइनरी में चल रहे मजदूर आंदोलन को इफटू का समर्थन मिला है। वेतन वृद्धि, झूठे केस रद्द करने और ईएसआई सुविधाएं देने की मांग उठी है।
■ रिफाइनरी मजदूरों के आंदोलन को इफटू का खुला समर्थन
■ वेतन वृद्धि और झूठे केस रद्द करने की मांग
■ मजदूरों ने शोषण, कटौती और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के लगाए आरोप
पानीपत, 1 मार्च। रिफाइनरी क्षेत्र में चल रहे मजदूर आंदोलन को अब इंडियन फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियंस (इफटू) का खुला समर्थन मिल गया है। इफटू की केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉमरेड मृगांक ने रिफाइनरी मजदूरों की वेतन वृद्धि सहित सभी लंबित मांगों को तत्काल पूरा करने और आंदोलनकारी मजदूरों पर दर्ज झूठे पुलिस केस वापस लेने की मांग केंद्र व राज्य सरकार से की है।
इफटू की पांच सदस्यीय टीम ने रिफाइनरी क्षेत्र की मजदूर बस्तियों का दौरा किया। टीम में केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉमरेड मृगांक, प्रदेश संयोजक एवं आरटीआई एक्टिविस्ट कॉमरेड पीपी कपूर, कॉमरेड रवि, कॉमरेड परदेसी और कॉमरेड गुल मोहम्मद शामिल रहे। इस दौरान मजदूरों ने खुले तौर पर अपने साथ हो रहे शोषण और कठिन हालात की जानकारी दी।
जमीन पर आक्रोश शांत नहीं, आंदोलन जारी रहेगा
कॉमरेड पीपी कपूर ने कहा कि जिला प्रशासन और रिफाइनरी प्रबंधन के दावों के विपरीत ग्राउंड लेवल पर मजदूरों का आक्रोश शांत नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक वेतन वृद्धि और अन्य मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। मजदूरों की मांगों को लागू करने के बजाय उन पर झूठे पुलिस केस दर्ज कर डर का माहौल बनाया जा रहा है।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि कम वेतन पर 10 से 12 घंटे तक कड़ा श्रम कराया जाता है। ठेकेदार मजदूरों के बैंक खातों में वेतन डालने के बाद उनसे हजारों रुपए वापस ले लेते हैं। यदि मजदूर पैसे लौटाने से मना करे तो अगले महीने की सैलरी रोक दी जाती है।
ईएसआई कटती है, लेकिन सुविधा शून्य
मजदूरों का कहना है कि करीब 80 हजार मजदूरों की मजदूरी से हर महीने ईएसआई के नाम पर करोड़ों रुपए काटे जाते हैं, लेकिन रिफाइनरी क्षेत्र में ईएसआई अस्पताल या डिस्पेंसरी तक उपलब्ध नहीं है। कटौती की रसीद भी नहीं दी जाती।
मजदूर बस्तियों में साफ पेयजल, शौचालय और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बंद कमरों में रहने को मजबूर मजदूर इन हालात को नरक से बदतर बता रहे हैं। बाजार की सुविधा न होने के कारण उन्हें दुगने दाम पर राशन खरीदना पड़ता है।
इफटू नेताओं का आरोप है कि रिफाइनरी प्रबंधन ठेकेदारों को पचास-साठ माइनस रेट पर ठेके देता है, जिससे ठेकेदार घाटा पूरा करने के लिए मजदूरों का शोषण करते हैं।
राजनीतिक प्रतिनिधियों पर भी सवाल
मजदूरों में इस बात को लेकर भी रोष है कि कोई विधायक, सांसद या जनप्रतिनिधि उनकी समस्याएं सुनने नहीं आया। इफटू ने चेतावनी दी कि मजदूर अब जाग चुका है और शोषण अधिक दिन तक नहीं सहन करेगा।
Akhil Mahajan