मोदी ने चुनावी रैली में फिल्मों का जिक्र किया:बोले- विपक्ष ने धुरंधर, कश्मीर फाइल्स और केरल स्टोरी को झूठ बताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल की रैली में विपक्ष पर निशाना साधते हुए ‘द कश्मीर फाइल्स’, ‘द केरल स्टोरी’ और ‘धुरंधर’ फिल्मों का जिक्र किया और CAA-UCC पर भी बयान दिया।

मोदी ने चुनावी रैली में फिल्मों का जिक्र किया:बोले- विपक्ष ने धुरंधर, कश्मीर फाइल्स और केरल स्टोरी को झूठ बताया

केरल रैली में PM मोदी ने फिल्मों का किया जिक्र
विपक्ष पर झूठ फैलाने का आरोप, CAA-UCC पर भी घेरा
‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरल स्टोरी’ को लेकर बयान


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के थिरुवल्ला में आयोजित एनडीए की चुनावी रैली में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष हर मुद्दे पर झूठ फैलाने का काम करता है और फिल्मों को भी इसी नजरिए से देखता है।

PM मोदी ने कहा कि जब नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लाया गया था, तब भी विपक्ष ने लोगों को गुमराह करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि आज CAA लागू हो चुका है और देश को कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन फिर भी विपक्ष का झूठ फैलाने का सिलसिला जारी है।अपने भाषण में उन्होंने The Kerala Story, The Kashmir Files और Dhurandhar जैसी फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष ने इन सभी फिल्मों को झूठ करार दिया। मोदी ने कहा कि यह विपक्ष की आदत बन चुकी है कि हर चीज को नकारना और भ्रम फैलाना ही उनका काम रह गया है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इन दिनों फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) और यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर भी इसी तरह की गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गोवा में दशकों से UCC लागू है, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।

रैली के दौरान पीएम मोदी ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में रोड शो भी किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उन्होंने कहा कि देश में विकास और स्थिरता के लिए झूठ की राजनीति से बाहर निकलना जरूरी है।गौरतलब है कि Dhurandhar हाल ही में रिलीज हुई फिल्म है, जो वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बताई जाती है। वहीं The Kerala Story और The Kashmir Files पहले ही राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रह चुकी हैं।

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्माने के आसार हैं, क्योंकि चुनावी समय में ऐसे मुद्दे अक्सर बड़े राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं।