हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: भर्ती के समय फिट था सैनिक, सेवा के दौरान बीमारी हुई तो सैनिक को मिलेगी दिव्यांगता पेंशन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि भर्ती के समय फिट सैनिक को सेवा के दौरान बीमारी होने पर दिव्यांगता पेंशन का लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी गई।
- पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सैनिकों की दिव्यांगता पेंशन पर दिया बड़ा फैसला
- भर्ती के समय फिट सैनिक को सेवा के दौरान बीमारी होने पर मिलेगा पेंशन लाभ
- केंद्र सरकार की याचिका खारिज, पूर्व सार्जेंट की आजीवन दिव्यांगता पेंशन बरकरार
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सैनिकों के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई सैनिक भर्ती के समय पूरी तरह चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ पाया गया था और सेवा के दौरान उसे कोई बीमारी या दिव्यांगता विकसित होती है, तो सामान्य परिस्थितियों में उसे सैन्य सेवा से संबंधित माना जाएगा। ऐसे मामलों में सैनिक दिव्यांगता पेंशन का हकदार होगा।
हाईकोर्ट ने यह फैसला भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त सार्जेंट जोगेंद्र सिंह के मामले में सुनाया। अदालत ने केंद्र सरकार की याचिका को खारिज करते हुए पूर्व सार्जेंट को दी गई आजीवन दिव्यांगता पेंशन को बरकरार रखा है। साथ ही उनकी 20 प्रतिशत दिव्यांगता को 50 प्रतिशत मानकर पेंशन देने के आदेश को भी सही ठहराया।
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने 29 मई को दिए अपने फैसले में कहा कि केवल मेडिकल बोर्ड की यह राय कि बीमारी सैन्य सेवा से संबंधित नहीं है, किसी सैनिक के वैधानिक अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकती। विशेषकर तब, जब भर्ती के समय सैनिक पूरी तरह स्वस्थ पाया गया हो।
मामले के अनुसार पंचकूला निवासी जोगेंद्र सिंह अगस्त 1994 में भारतीय वायुसेना में भर्ती हुए थे। भर्ती से पहले उनका विस्तृत मेडिकल परीक्षण किया गया था और उन्हें पूरी तरह फिट घोषित किया गया था। लगभग 27 वर्षों की सेवा के बाद वह 15 अगस्त 2021 को सेवानिवृत्त हुए। सेवा के दौरान उन्हें डायबिटीज मेलिटस टाइप-2 बीमारी हो गई थी।
मेडिकल बोर्ड ने उनकी दिव्यांगता 20 प्रतिशत आंकी थी, लेकिन साथ ही यह भी कहा था कि यह बीमारी न तो सैन्य सेवा के कारण हुई और न ही सेवा के कारण बढ़ी। इसी आधार पर केंद्र सरकार ने उन्हें दिव्यांगता पेंशन देने का विरोध किया था।
हालांकि सशस्त्र बल अधिकरण (आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल) ने पूर्व सार्जेंट के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें दिव्यांगता पेंशन देने तथा 20 प्रतिशत दिव्यांगता को बढ़ाकर 50 प्रतिशत मानने का आदेश दिया था। ट्रिब्यूनल ने उन्हें आजीवन पेंशन लाभ देने के निर्देश भी दिए थे।
केंद्र सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सरकार की ओर से दलील दी गई कि मेडिकल बोर्ड ने स्पष्ट रूप से बीमारी को सैन्य सेवा से असंबद्ध बताया है, इसलिए दिव्यांगता पेंशन और 'राउंडिंग ऑफ' का लाभ नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के धर्मवीर सिंह बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए कहा कि यदि सैनिक भर्ती के समय स्वस्थ था और बाद में बीमारी सामने आती है तो कानून उसके पक्ष में यह अनुमान लगाता है कि बीमारी सेवा के दौरान उत्पन्न हुई या सेवा से प्रभावित हुई है।
हाईकोर्ट ने राम अवतार बनाम भारत संघ तथा रीत एमपी सिंह बनाम भारत संघ मामलों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि दिव्यांगता पेंशन में मिलने वाला 'राउंडिंग ऑफ' लाभ केवल उन सैनिकों तक सीमित नहीं है जिन्हें सेवा से बाहर कर दिया गया हो। यदि सेवानिवृत्ति के बाद भी दिव्यांगता सैन्य सेवा से जुड़ी पाई जाती है, तो सैनिक इस लाभ का हकदार रहेगा।
इसी आधार पर अदालत ने ट्रिब्यूनल के आदेश को सही ठहराते हुए पूर्व सार्जेंट जोगेंद्र सिंह की 20 प्रतिशत दिव्यांगता को 50 प्रतिशत मानकर आजीवन पेंशन देने के आदेश को बरकरार रखा। इस फैसले को पूर्व सैनिकों के लिए एक बड़ी राहत और महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।
Akhil Mahajan