शर्मिला ने कॉमनवेल्थ में रचा इतिहास, हरियाणा को दिलाया गोल्ड
हरियाणा की शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स के पैरा शॉट पुट F57 में गोल्ड मेडल जीता। पोलियो, आर्थिक तंगी और निजी संघर्षों के बावजूद उन्होंने इतिहास रच दिया।
हरियाणा की शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स के पैरा शॉट पुट F57 में गोल्ड मेडल जीता
2 साल की उम्र में पोलियो और वैवाहिक संघर्ष के बावजूद नहीं मानी हार
आर्थिक तंगी में घर बेचा, अब देश के लिए गोल्ड जीतकर रचा इतिहास
हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स के महिला पैरा शॉट पुट F57 इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। शर्मिला ने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी सफलता संघर्ष, हिम्मत और आत्मविश्वास की प्रेरणादायक कहानी बन गई है।
शर्मिला का जीवन शुरुआत से ही चुनौतियों से भरा रहा। महेंद्रगढ़ जिले के छितरौली गांव में जन्मी शर्मिला को महज 2 साल की उम्र में पोलियो हो गया, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हो गया। पिता छोटे किसान थे और मां दृष्टिबाधित हैं। आर्थिक तंगी के कारण उनका बेहतर इलाज नहीं हो सका। परिवार की परिस्थितियों के चलते कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी गई।
जीवन का सबसे कठिन दौर तब आया, जब 26 साल की उम्र में पहले पति ने उन्हें छोड़ दिया। उस समय उनकी दो बेटियां थीं। दोनों बेटियों के साथ वह मायके लौट आईं। इसके बाद 28 साल की उम्र में उन्होंने अजीत से दूसरी शादी की। अजीत ने अखबार में पैरा खिलाड़ियों की खबर पढ़ने के बाद शर्मिला को पैरा एथलेटिक्स में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर उनका साथ दिया।
34 साल की उम्र में शर्मिला ने रेवाड़ी में कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में F57 सीटेड शॉट पुट की ट्रेनिंग शुरू की। आर्थिक हालात इतने कमजोर थे कि 2023 में ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाने के लिए परिवार को अपना घर तक बेचना पड़ा। इसके बाद परिवार किराए के मकान में रहने लगा, लेकिन शर्मिला ने अपने सपनों से समझौता नहीं किया।
शर्मिला इससे पहले 2022 के बर्मिंघम पैरा कॉमनवेल्थ गेम्स में चौथे स्थान पर रही थीं। इसके बाद उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया। सितंबर 2025 में दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी उन्होंने प्रभावशाली प्रदर्शन किया और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर अपने संघर्ष को सफलता में बदल दिया।
शर्मिला का एक अलग परिचय हरियाणा रोडवेज की पहली महिला कंडक्टर के रूप में भी रहा है। 2018 में रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान उन्हें अस्थायी रूप से नौकरी मिली थी, लेकिन हड़ताल समाप्त होने के बाद नौकरी चली गई। उस घटना ने उन्हें ऐसा मुकाम हासिल करने की प्रेरणा दी, जिसे कोई उनसे छीन न सके।
उनकी दोनों बेटियां भी खेलों में आगे बढ़ रही हैं। बड़ी बेटी अनुज जेवलिन थ्रो और छोटी बेटी लक्ष्मी लॉन्ग जंप की खिलाड़ी हैं। दोनों राज्य स्तर पर खेल चुकी हैं। वहीं, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शर्मिला धनखड़ को कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने पर बधाई देते हुए उनके संघर्ष और उपलब्धि की सराहना की।
pooja