9 जून 2026 को सोमवती अमावस्या पर बन रहा है दुर्लभ संयोग
Somvati Amavasya 2026 पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। जानिए इस दिन का धार्मिक महत्व, पितरों की कृपा के लिए किन 3 चीजों का दान शुभ माना गया है।
9 जून 2026 को सोमवती अमावस्या पर बन रहा है दुर्लभ संयोग
सोमवार और अमावस्या का मिलन पितृ तर्पण व दान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है
तिल, अन्न और वस्त्र का दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलने की मान्यता
हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। वर्ष 2026 में 9 जून को पड़ रही सोमवती अमावस्या को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करीब तीन साल बाद ऐसा विशेष संयोग बना है, जिसे पितृ पूजन, तर्पण, स्नान और दान-पुण्य के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन किए गए पुण्य कर्मों का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। विशेष रूप से पितरों की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व
सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, जबकि अमावस्या तिथि पितरों की स्मृति और तर्पण के लिए विशेष होती है। जब ये दोनों योग एक साथ बनते हैं तो इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान, पितरों का तर्पण, पीपल वृक्ष की पूजा और जरूरतमंदों को दान करने से परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है। साथ ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
इन 3 चीजों का दान माना जाता है शुभ
1. काले तिल का दान
धार्मिक ग्रंथों में काले तिल को पितृ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ बताया गया है। सोमवती अमावस्या पर तिल का दान और तर्पण करने से पितृ दोष शांत होने तथा पूर्वजों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
2. अन्न का दान
गरीब और जरूरतमंद लोगों को चावल, गेहूं या अन्य खाद्य सामग्री का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इससे पितर संतुष्ट होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
3. वस्त्र का दान
जरूरतमंद लोगों को वस्त्र दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इस दिन क्या करें?
सोमवती अमावस्या पर सुबह स्नान कर भगवान शिव की पूजा करें। पितरों के निमित्त तर्पण करें और अपनी श्रद्धा अनुसार दान-पुण्य करें। पीपल वृक्ष की पूजा और परिक्रमा भी शुभ मानी जाती है।
क्या है मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए सत्कर्मों से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक आस्था और परंपराएं हैं।
pooja