‘मेरा क्या बिगाड़ लिया’, ‘आंख दिखाना चाहते हो…’ जज को लिमिट बताने वाले वकील पर CJI सूर्यकांत भड़के

सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत ने अवमानना मामले में वकील को फटकार लगाई। जजों की मर्यादा, माफी और सहानुभूति पर अदालत की अहम टिप्पणी सामने आई।

‘मेरा क्या बिगाड़ लिया’, ‘आंख दिखाना चाहते हो…’ जज को लिमिट बताने वाले वकील पर CJI सूर्यकांत भड़के
  • सुप्रीम कोर्ट में वकील को CJI सूर्यकांत की कड़ी फटकार
  • जज को हद बताने पर अवमानना मामले में सख्त टिप्पणी
  • माफी मांगे तो हाईकोर्ट सहानुभूति बरते, SC का संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अदालत की मर्यादा और न्यायिक अनुशासन पर सख्त रुख अपनाते हुए एक वकील को कड़ी फटकार लगाई। मुख्यन्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि कोई जजों को आंखें दिखाना चाहता है तो कोर्ट भी देखने के लिए तैयार है। यह टिप्पणी उस अपील पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें अधिवक्ता महेश तिवारी ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जारी आपराधिक अवमानना नोटिस को चुनौती दी थी।

मामला पिछले वर्ष झारखंड हाईकोर्ट में हुई एक तीखी बहस से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान वकील महेश तिवारी की जस्टिस राजेश कुमार से बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस बहस में वकील द्वारा जज को “हद में रहने” जैसी टिप्पणी किए जाने के बाद हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया था।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल ऐसा आदेश चाहता है, जिससे वह यह दिखा सके कि उसका कुछ बिगड़ा नहीं। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि वकील माफी मांगना चाहता है तो उसे ऐसा करना चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि वह जजों को चुनौती देना चाहता है, तो कोर्ट मौजूद है और सब देखा जाएगा।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संतुलित रुख अपनाते हुए झारखंड हाईकोर्ट से कहा कि यदि वकील माफी मांगता है, तो उस पर सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाए। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि न्यायालय अनुशासन के साथ-साथ सुधार का अवसर भी देना चाहता है।

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब महेश तिवारी अपनी विधवा क्लाइंट के लिए राहत मांग रहे थे, जिनकी बिजली लाइन बकाया राशि के कारण काट दी गई थी। बहस के बाद मामला सुलझ गया था, लेकिन इसके बाद कोर्ट में हुए संवाद ने विवाद को और बढ़ा दिया, जो अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।