फरीदाबाद में 8 हजार मकानों पर संकट, एक लाख लोग चिंता में

फरीदाबाद की नेहरू कॉलोनी में 8 हजार से अधिक मकानों पर ध्वस्तीकरण का खतरा मंडरा रहा है। RRTS परियोजना के चलते एक लाख लोग बेघर होने की आशंका से चिंतित हैं।

फरीदाबाद में 8 हजार मकानों पर संकट, एक लाख लोग चिंता में

फरीदाबाद की नेहरू कॉलोनी में 8 हजार मकानों पर संकट

एक लाख से ज्यादा लोग बेघर होने के डर में जी रहे

RRTS कॉरिडोर और एलिवेटेड रोड परियोजना के लिए हो रही कार्रवाई

फरीदाबाद में नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) और प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना के लिए चल रही कार्रवाई अब नेहरू कॉलोनी तक पहुंच गई है। नगर निगम ने कॉलोनी में बने हजारों मकानों को अवैध निर्माण बताते हुए नोटिस जारी किए हैं, जिसके बाद यहां रहने वाले लोगों में भय और अनिश्चितता का माहौल है।

नेहरू कॉलोनी में करीब 8 हजार मकान हैं और यहां एक लाख से अधिक लोग रहते हैं। हाल ही में रैपिड कॉरिडोर के लिए मंदिर और मस्जिद को हटाने की कार्रवाई के बाद अब कॉलोनी में भी ध्वस्तीकरण की तैयारी शुरू हो गई है।

नोटिस मिलने के बाद कई परिवारों ने अपने घर खाली करने शुरू कर दिए हैं। कुछ लोग ट्रकों और अन्य वाहनों में सामान भरकर दूसरी जगह भेज चुके हैं, जबकि कई परिवार अभी भी अपने घरों के बाहर बैठकर आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि वे पिछले 40 से 50 वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनके पास बिजली बिल, पानी बिल, वोटर आईडी और अन्य सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं। उनका सवाल है कि यदि वे इतने वर्षों से यहां रह रहे थे तो अब अचानक उनके घरों को अवैध कैसे घोषित किया जा रहा है।

कई परिवारों का कहना है कि मकान खाली करने के आदेश के बाद उनकी दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और लोग अपने कामकाज पर भी ध्यान नहीं दे पा रहे। घर टूटने के डर से लोग दिन-रात अपने मकानों के बाहर बैठे रहते हैं।

स्थानीय निवासी हेमराज ने बताया कि वह करीब 45 वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनका कहना है कि लोगों के पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। कई परिवारों को किराए पर मकान भी नहीं मिल रहे हैं, जिससे परेशानी और बढ़ गई है।

शिवकुमार का कहना है कि उनका जन्म इसी कॉलोनी में हुआ है और उनका परिवार लगभग 50 वर्षों से यहां रह रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार मकान खाली करवाने की कार्रवाई तो कर रही है, लेकिन पुनर्वास या रहने की व्यवस्था को लेकर कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है।

एक बुजुर्ग महिला ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि कॉलोनी के लोगों की रातें शोक की तरह गुजर रही हैं। घर छूटने का डर और भविष्य की चिंता लोगों को सोने नहीं दे रही है। कई परिवारों का इस जगह से भावनात्मक जुड़ाव भी है।

15 हजार करोड़ रुपए की RRTS परियोजना के तहत गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा कॉरिडोर विकसित किया जाना है। करीब 61 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगी। इसके साथ ही एक एलिवेटेड रोड भी प्रस्तावित है, जिससे NCR में कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

अधिकारियों के अनुसार फिलहाल कॉरिडोर के लिए लगभग 50 फीट क्षेत्र में ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। निर्माण कार्य की जरूरत के अनुसार आगे जमीन अधिग्रहण और हटाने की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि संबंधित निर्माण सरकारी भूमि पर किए गए हैं।

नेहरू कॉलोनी का इतिहास लगभग 50 वर्ष पुराना बताया जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 1975-76 में यहां करीब 20 परिवारों ने बसना शुरू किया था। समय के साथ यह क्षेत्र बड़ी आबादी वाले इलाके में बदल गया।

फरीदाबाद नगर निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने कहा कि सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई नियमों के तहत की जा रही है और किसी के साथ पक्षपात नहीं किया जाएगा।