पूर्व विधायक सहीराम बिश्नोई को मरणोपरांत ‘बिश्नोई रत्न’ सम्मान

हरियाणा के पूर्व विधायक सहीराम बिश्नोई को मरणोपरांत ‘बिश्नोई रत्न’ सम्मान देने की घोषणा हुई है। परिवार ने राजकीय सम्मान के बिना अंतिम संस्कार पर नाराजगी जताई है।

पूर्व विधायक सहीराम बिश्नोई को मरणोपरांत  ‘बिश्नोई रत्न’ सम्मान
  • पूर्व विधायक सहीराम बिश्नोई को मरणोपरांत ‘बिश्नोई रत्न’ सम्मान मिलेगा
  • भजनलाल, कुलदीप बिश्नोई समेत सिर्फ 3 लोगों को मिला था यह सम्मान
  • परिजनों ने राजकीय सम्मान के बिना अंतिम संस्कार पर जताई नाराजगी

हरियाणा के सबसे बुजुर्ग पूर्व विधायक सहीराम धारणिया बिश्नोई को मरणोपरांत ‘बिश्नोई रत्न’ सम्मान देने की घोषणा की गई है। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा ने यह फैसला उनके निधन के बाद लिया है। यह सम्मान अब तक हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल, पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई और राजस्थान के पूर्व डीजीपी भागीरथ बिश्नोई को ही मिला था। सहीराम बिश्नोई इस सम्मान को पाने वाले चौथे व्यक्ति होंगे।

खास बात यह है कि पहली बार किसी व्यक्ति को मरणोपरांत यह सम्मान दिया जा रहा है। महासभा की ओर से 29 मई को आयोजित शोक सभा कार्यक्रम में उनके परिवार को यह सम्मान सौंपा जाएगा।

वहीं दूसरी ओर सहीराम धारणिया का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ नहीं होने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बिश्नोई समाज और परिवार के लोगों ने इस पर नाराजगी जताई है। सहीराम के दोहते सोमप्रकाश बिश्नोई ने कहा कि उनके नाना की अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ होनी चाहिए थी।

22 मई को सिरसा जिले के सकताखेड़ा गांव में 104 साल की उम्र में सहीराम बिश्नोई का निधन हो गया था। वे वर्ष 1957 में संयुक्त पंजाब के अबोहर विधानसभा क्षेत्र से जनसंघ के टिकट पर विधायक चुने गए थे। वे बिश्नोई समाज से विधायक बनने वाले पहले व्यक्ति थे।

इसके अलावा सहीराम धारणिया करीब 40 वर्षों तक अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के अध्यक्ष भी रहे। परिवार के अनुसार 104 वर्ष की उम्र में भी वे बिना चश्मा लगाए अखबार पढ़ लेते थे और खेती-बाड़ी का काम खुद संभालते थे।

अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा (रजि.) मुक्तिधाम मुकाम की ओर से जारी पत्र में विभिन्न राज्यों के मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक और समाज के प्रतिनिधियों को 29 मई की शोक सभा में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार नहीं होने पर भाजपा नेताओं की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। हरियाणा बीज विकास निगम के अध्यक्ष उदय शर्मा ने कहा कि उन्हें राजकीय सम्मान न मिलने की वजह की जानकारी नहीं है, लेकिन पार्टी की ओर से पूरा सम्मान दिया गया। वहीं भाजपा जिला अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने कहा कि वे उस समय बाहर थे और उन्हें मामले की जानकारी नहीं है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूर्व विधायक होने के नाते उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जा सकता था। इससे पहले सिरसा में पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री लक्ष्मण दास अरोड़ा का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया था।

सहीराम धारणिया का जन्म 12 जनवरी 1922 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की बहावलपुर रियासत के गांव तालिया (कुम्भाणा) में हुआ था। देश विभाजन के दौरान वे हजारों लोगों के साथ भारत आए और उनका पुनर्वास करवाने में अहम भूमिका निभाई। परिवार के अनुसार उन्होंने “गहने बेचो, हथियार खरीदो” अभियान भी चलाया था।

उन्होंने लाहौर यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की थी और 1957 में अबोहर से चुनाव जीतकर विधायक बने। इसके बाद उन्होंने राजनीति से ज्यादा समाज सेवा को प्राथमिकता दी। 20 साल तक महासभा के सचिव और 20 साल तक अध्यक्ष पद संभाला।

परिवार के अनुसार सहीराम धारणिया सादा जीवन जीते थे और चिंता मुक्त रहते थे। यही उनकी लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य का सबसे बड़ा कारण था।