सोना-चांदी से लेकर शेयर बाजार तक मचा हड़कंप, वैश्विक तनाव ने बिगाड़ी निवेशकों की नींद
पश्चिम एशिया तनाव और मजबूत डॉलर के चलते सोना-चांदी के साथ भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों में बढ़ी चिंता।
➤ सोना-चांदी में तेज गिरावट, निवेशकों को डबल झटका
➤ सेंसेक्स करीब 2000 अंक टूटा, बाजार में मची घबराहट
➤ पश्चिम एशिया तनाव और मजबूत डॉलर से वैश्विक असर
वैश्विक तनाव और मजबूत डॉलर का असर अब सीधे भारतीय बाजारों पर दिख रहा है। गुरुवार को कमोडिटी बाजार और शेयर बाजार दोनों में एक साथ बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया और बाजार का माहौल पूरी तरह डर में बदल गया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुलियन बाजार दबाव में नजर आया। 24 कैरेट सोना 0.57% गिरकर 1,52,150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि चांदी 1.21% टूटकर 2,45,197 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। मार्च महीने में अब तक सोना करीब 4% और चांदी लगभग 16% टूट चुकी है, जो निवेशकों के कमजोर होते भरोसे का बड़ा संकेत है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जहां स्पॉट गोल्ड 1.22% गिरा और स्पॉट सिल्वर 2.25% से ज्यादा लुढ़का। यह गिरावट सिर्फ घरेलू नहीं बल्कि पूरी दुनिया में फैले दबाव को दिखाती है।
इसी के साथ भारतीय शेयर बाजार में भी बड़ा भूचाल आया। प्री-ओपनिंग में ही सेंसेक्स करीब 2000 अंक तक गिर गया, और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,953.21 अंक टूटकर 74,750.92 पर आ गया। वहीं निफ्टी 580.05 अंक गिरकर 23,197.75 पर पहुंच गया।
रुपया भी दबाव में आया और 49 पैसे गिरकर 92.89 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे विदेशी निवेश और महंगाई को लेकर चिंता और बढ़ गई।
इस बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। ईरान के गैस उत्पादन क्षेत्र और कतर की एलएनजी सुविधा पर हमलों की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को खतरे में डाल दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर की मजबूती ने सोना-चांदी और शेयर बाजार दोनों पर दबाव बना दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति बेहद संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ऊर्जा संकट के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा रही है, जिससे निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।
इस बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.5%–3.75% के बीच स्थिर रखा, लेकिन फेड चेयर जेरोम पॉवेल ने “अनिश्चितता” पर जोर देकर सख्त संकेत दिए। उनका यह रुख बाजार के लिए नकारात्मक माना जा रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर दबाव और बढ़ गया।
एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली, जहां जापान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और ताइवान के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में रहे। वहीं अमेरिकी बाजार भी पहले से गिरावट में थे, जिससे साफ है कि यह एक ग्लोबल सेल-ऑफ का संकेत है।
कुल मिलाकर, सोना-चांदी से लेकर शेयर बाजार तक एक साथ आई यह गिरावट इस बात का संकेत है कि वैश्विक अनिश्चितता अपने चरम पर है। ऐसे में निवेशकों को बेहद सावधानी और सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है।
Akhil Mahajan