आखिर क्यों बच्चों को मोबाइल से दूर रहने की सलाह दे रहीं साइना नेहवाल ?जाने
पंचकूला में साइना नेहवाल ने बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की सलाह दी। उन्होंने भारतीय बैडमिंटन के मौजूदा प्रदर्शन पर चिंता जताते हुए सुधार की जरूरत बताई।
साइना नेहवाल ने बच्चों को मोबाइल से दूर रहने की सलाह दी
भारतीय बैडमिंटन के मौजूदा प्रदर्शन को बताया चिंताजनक
पंचकूला में शोरूम उद्घाटन के दौरान साझा किए संघर्ष और सफलता के अनुभव
भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और ओलिंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल रविवार को पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित एक शोरूम के उद्घाटन समारोह में पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने भारतीय बैडमिंटन की मौजूदा स्थिति, युवा खिलाड़ियों, मोबाइल की लत और अपने संघर्षों को लेकर खुलकर बातचीत की।
साइना ने बच्चों में बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि आज की पीढ़ी को खेल और फिटनेस की ओर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों को मोबाइल कम दें और उन्हें रनिंग व एक्सरसाइज जैसी गतिविधियों के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा, “आजकल बहुत ज्यादा डिस्ट्रैक्शन हैं। बच्चे मोबाइल में ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे वे शारीरिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। उन्हें मेहनत और फिटनेस पर ध्यान देना चाहिए।”
साइना ने पंचकूला से जुड़ी अपनी पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि जब वह 13 साल की थीं, तब यहां एक टूर्नामेंट खेलने आई थीं और उसे जीतने में सफल रही थीं। उन्होंने कहा कि सुपरस्टार बनने के पीछे कई वर्षों की लगातार मेहनत छिपी होती है।
उन्होंने कहा, “सुपरस्टार बनना आसान नहीं है। मैंने लगातार 10 से 15 साल तक कड़ी मेहनत की, तब जाकर यह मुकाम हासिल कर पाई।”
भारतीय बैडमिंटन के मौजूदा प्रदर्शन पर भी साइना ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले भारत को लगातार अच्छे परिणाम मिल रहे थे, लेकिन अब कुछ कमियां नजर आ रही हैं, जिन्हें सुधारने की जरूरत है।
साइना ने कहा, “10 साल पहले जैसे रिजल्ट आते थे, अब वैसी निरंतरता नहीं दिख रही। खिलाड़ी अच्छा खेल रहे हैं, लेकिन हमें और बेहतर प्रदर्शन की जरूरत है।”
उन्होंने देश में बैडमिंटन लीग की संख्या बढ़ाने की भी वकालत की। साइना का कहना था कि ज्यादा लीग होने से बच्चों का खेल के प्रति आकर्षण बढ़ेगा और नए खिलाड़ी सामने आएंगे।
अपने करियर की सफलता का श्रेय साइना ने अपने माता-पिता और कोच पुलेला गोपीचंद को दिया। उन्होंने बताया कि गोपीचंद खिलाड़ियों के लिए सुबह 3 बजे से रात 8 बजे तक मेहनत करते थे और हमेशा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में जुटे रहते थे।
साइना ने कहा, “हर बच्चे में एक साइना छिपी है। अगर मैं वर्ल्ड नंबर-1 बन सकती हूं तो कोई भी बच्चा मेहनत के दम पर आगे बढ़ सकता है। मेरा सपना हमेशा बैडमिंटन से जुड़े रहने का है।”
pooja