हरियाणा में चलते कैंटर में दौड़ा करंट, लगी आग; 15 श्रद्धालु झुलसे, गैस सिलेंडर नहीं फटे तो टला बड़ा हादसा

करनाल के घरौंडा में हाईटेंशन तार की चपेट में श्रद्धालुओं से भरे कैंटर में आग लग गई। हादसे में बच्चे समेत 15 लोग झुलसे और सभी अस्पताल रेफर हुए।

हरियाणा में चलते कैंटर में दौड़ा करंट, लगी आग; 15 श्रद्धालु झुलसे, गैस सिलेंडर नहीं फटे तो टला बड़ा हादसा

हाईटेंशन तार के संपर्क में आते ही श्रद्धालुओं से भरे कैंटर में दौड़ा करंट और लगी आग

बागड़ धाम जा रहे महिला, पुरुष और बच्चों समेत 15 श्रद्धालु झुलसे

कैंटर में रखे गैस सिलेंडर नहीं फटे, सभी घायलों को करनाल ट्रामा सेंटर रेफर किया


करनाल के घरौंडा में रविवार को एक दर्दनाक हादसे में हाईटेंशन बिजली की तार की चपेट में आने से श्रद्धालुओं से भरे कैंटर में करंट दौड़ गया और देखते ही देखते उसमें आग लग गई। हादसे में महिला, पुरुष और बच्चों समेत 15 श्रद्धालु झुलस गए। कैंटर में करीब 40 से 50 श्रद्धालु सवार थे, जो राजस्थान के बागड़ धाम की धार्मिक यात्रा पर जा रहे थे। हादसा शहर के वार्ड नंबर-15 में गंदे नाले के पास हुआ। करंट लगने के बाद कैंटर में आग की लपटें उठने लगीं, जिससे मौके पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। सबसे राहत की बात यह रही कि कैंटर में रखे गैस सिलेंडर नहीं फटे। यदि आग की चपेट में आकर सिलेंडर फट जाते तो हादसा और भी भयावह हो सकता था। झुलसे सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद करनाल ट्रामा सेंटर रेफर किया गया है।

जानकारी के अनुसार घरौंडा से करीब 40 से 50 श्रद्धालु एक कैंटर में सवार होकर राजस्थान के बागड़ धाम के लिए धार्मिक यात्रा पर निकले थे। श्रद्धालुओं के साथ कैंटर में खाने-पीने का सामान भी रखा हुआ था। यात्रा के दौरान खाना बनाने के लिए कैंटर में गैस सिलेंडर भी रखे गए थे। धार्मिक यात्रा को लेकर श्रद्धालु उत्साहित थे और सभी एक साथ अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए थे।

बताया जा रहा है कि कैंटर को शहर के वार्ड नंबर-15 स्थित गंदे नाले के पास खड़ा किया गया था। इसी दौरान कैंटर के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली की तार उसके संपर्क में आ गई। तार के कैंटर को छूते ही उसमें तेज करंट दौड़ गया। कैंटर में बैठे श्रद्धालु इसकी चपेट में आ गए और कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए।

करंट लगने के बाद हालात उस समय और भयावह हो गए, जब कैंटर में आग लग गई। वाहन के अंदर से आग की लपटें उठती देखकर श्रद्धालुओं और आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। लोग घायलों को कैंटर से बाहर निकालने में जुट गए। इस दौरान सबसे बड़ी चिंता कैंटर में रखे गैस सिलेंडरों को लेकर थी। आग के बीच सिलेंडरों के फटने की आशंका से आसपास मौजूद लोगों में भी डर का माहौल बन गया।

गनीमत रही कि आग की चपेट में आने के बावजूद गैस सिलेंडर नहीं फटे। सिलेंडर फट जाते तो आसपास मौजूद लोगों की जान पर भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता था और हादसा बेहद गंभीर रूप ले सकता था। समय रहते श्रद्धालुओं को कैंटर से बाहर निकाल लिया गया और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

हादसे के बाद मौके पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए झुलसे श्रद्धालुओं को कैंटर से बाहर निकालने में मदद की। घटना की सूचना मिलने के बाद घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद सभी घायलों को करनाल ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया।

हादसे में झुलसे महिला, पुरुष और बच्चों को उपचार के लिए करनाल ले जाया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद घायलों के परिजनों में भी हड़कंप मच गया। परिजन अपने-अपने लोगों की कुशलक्षेम जानने के लिए अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। हादसे के बाद श्रद्धालुओं के परिवारों में चिंता और दहशत का माहौल बना हुआ है।

बताया जा रहा है कि श्रद्धालु बागड़ धाम की धार्मिक यात्रा को लेकर उत्साहित थे। करीब 40 से 50 लोग एक साथ कैंटर में सवार होकर निकले थे। लेकिन वार्ड नंबर-15 में कुछ देर के लिए कैंटर खड़ा करना उनके लिए जिंदगी का सबसे खौफनाक पल बन गया। हाईटेंशन तार के संपर्क में आते ही कैंटर में करंट दौड़ा और उसके बाद आग लगने से यात्रियों के बीच चीख-पुकार मच गई।

हादसे के बाद कैंटर चालक की लापरवाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि कैंटर को हाईटेंशन तारों के नीचे खड़ा किया गया था तो वाहन की ऊंचाई और तारों की स्थिति को देखते हुए चालक को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए थी। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह और इसमें किसकी लापरवाही रही, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

इस घटना ने हाईटेंशन तारों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। जिस स्थान पर कैंटर खड़ा था, वहां से हाईटेंशन तार गुजर रही थी। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि तारों की ऊंचाई कितनी थी और क्या वहां भारी वाहनों को खड़ा करने की सुरक्षित व्यवस्था थी।

हादसे की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि कैंटर में गैस सिलेंडर रखे हुए थे। करंट लगने के बाद वाहन में आग लग गई थी। यदि आग की चपेट में आने से सिलेंडर फट जाते तो कैंटर में झुलसे लोगों के अलावा आसपास मौजूद लोगों और वाहनों को भी भारी नुकसान हो सकता था। सिलेंडरों के नहीं फटने से एक और बड़े हादसे की आशंका टल गई।

पुलिस और प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। हादसे में झुलसे सभी घायलों का करनाल ट्रामा सेंटर में उपचार चल रहा है। अब जांच में हादसे की वास्तविक वजह, कैंटर को उस स्थान पर खड़ा किए जाने और हाईटेंशन तारों की स्थिति से जुड़े पहलुओं को देखा जाएगा।