हंटावायरस और नोरोवायरस ने बढ़ाई दुनियाभर की टेंशन, जानिए दोनों वायरस में क्या है बड़ा फर्क
हंटावायरस और नोरोवायरस के बढ़ते मामलों ने दुनियाभर में चिंता बढ़ा दी है। जानिए दोनों वायरस कैसे फैलते हैं, इनके लक्षण क्या हैं और कौन ज्यादा खतरनाक है।
हंटावायरस और नोरोवायरस के मामलों ने दुनियाभर में चिंता बढ़ाई
दोनों वायरस के फैलने का तरीका और शरीर पर असर पूरी तरह अलग
हंटावायरस दुर्लभ लेकिन ज्यादा घातक, नोरोवायरस बेहद तेजी से फैलने वाला संक्रमण
दुनियाभर में इन दिनों हंटावायरस और नोरोवायरस संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। हाल ही में क्रूज शिप्स पर सामने आए मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों को अलर्ट मोड पर ला दिया है। एक तरफ हंटावायरस संक्रमण से कई लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं, वहीं दूसरी तरफ नोरोवायरस के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर ये दोनों वायरस क्या हैं और इनमें कितना फर्क है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक, एमवी होंडियस नाम के क्रूज शिप पर हंटावायरस संक्रमण के पांच मामले सामने आए थे। इनमें से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, संक्रमितों में दो भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बताया गया कि यह जहाज अर्जेंटीना से यात्रा पर निकला था और बाद में संक्रमण की पुष्टि हुई।
स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि जहाज से कई यात्री अलग-अलग जगहों पर उतर चुके थे। ऐसे में संक्रमण के फैलने की आशंका बनी हुई है। हालांकि, भारत में इसे लेकर फिलहाल ज्यादा खतरे की स्थिति नहीं बताई गई है।
दूसरी ओर, एक अन्य क्रूज शिप ‘कैरिबियन प्रिंसेस’ पर नोरोवायरस फैलने से 100 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC के अनुसार, 102 यात्रियों और 13 क्रू सदस्यों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इस वायरस के कारण उल्टी, दस्त और पेट से जुड़ी गंभीर समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
क्या है हंटावायरस?
हंटावायरस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरल संक्रमण है। यह मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के मल, पेशाब या लार के संपर्क में आने से फैलता है। जब संक्रमित कण हवा में मिल जाते हैं और व्यक्ति सांस के जरिए उन्हें अंदर लेता है, तब संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
इसके शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं। संक्रमित व्यक्ति को बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। गंभीर मामलों में फेफड़ों में पानी भरने लगता है और सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है। इस स्थिति को हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम कहा जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक खेत, गोदाम, पुराने मकान और ऐसी जगहें जहां चूहों की संख्या ज्यादा हो, वहां संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
नोरोवायरस क्या है?
नोरोवायरस एक बेहद संक्रामक वायरस है, जो पेट और आंतों में संक्रमण पैदा करता है। इसे गैस्ट्रोएंटेराइटिस का बड़ा कारण माना जाता है। इस वायरस के कारण अचानक उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
यह वायरस मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी के जरिए फैलता है। यदि संक्रमित व्यक्ति खाना बनाते समय हाथ अच्छी तरह साफ नहीं करता तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है। स्कूल, होटल, अस्पताल, क्रूज शिप और भीड़भाड़ वाली जगहों पर इसके मामले अधिक सामने आते हैं।
हालांकि, नोरोवायरस आमतौर पर जानलेवा नहीं माना जाता, लेकिन बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में यह गंभीर डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है।
भारत में कितना खतरा?
आईसीएमआर ने फिलहाल कहा है कि भारत में हंटावायरस के कम्युनिटी लेवल पर फैलने का कोई खतरा नहीं है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. नवीन कुमार के अनुसार, देश में लोगों को तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ साफ-सफाई और सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
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