BJP छोड़ेंगे कुलदीप बिश्नोई?
कुलदीप बिश्नोई परिवार के भाजपा से नाराज होने के संकेत मिल रहे हैं। असम-बंगाल जीत पर चुप्पी के बाद अब अमेरिका से लौटकर समर्थकों की बैठक की तैयारी है।
कुलदीप बिश्नोई परिवार के BJP छोड़ने की अटकलें तेज
असम-बंगाल जीत पर नहीं दी पार्टी को बधाई
अमेरिका से लौटकर समर्थकों संग बैठक कर सकते हैं कुलदीप बिश्नोई
हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर कुलदीप बिश्नोई चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हिसार के पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई और उनके परिवार के भाजपा से दूरी बनाने के संकेत मिल रहे हैं। असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा की बड़ी जीत के बाद भी बिश्नोई परिवार की तरफ से पार्टी को कोई सार्वजनिक बधाई नहीं दी गई।
खास बात यह रही कि कुलदीप बिश्नोई के बेटे और पूर्व विधायक भव्य बिश्नोई, जो हरियाणा भाजपा के युवा प्रभारी भी हैं, उन्होंने भी पार्टी को लेकर कोई बधाई संदेश जारी नहीं किया। जबकि विधानसभा चुनाव में भव्य बिश्नोई ने असम की तीन सीटों — खुमटाई, गुवाहाटी सेंट्रल और सादिया — पर प्रचार किया था और इन सीटों पर भाजपा को जीत मिली।
हालांकि भव्य बिश्नोई ने सोशल मीडिया पर प्रत्याशियों को जीत की बधाई जरूर दी, लेकिन भाजपा का नाम लेने से परहेज किया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि बिश्नोई परिवार भाजपा से नाराज चल रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कुलदीप बिश्नोई अगले सप्ताह 12 मई तक अमेरिका से भारत लौट सकते हैं। उनके निजी सचिव मोहित ने बताया कि वापसी के बाद कुलदीप अपने समर्थकों की बैठक बुला सकते हैं। इससे पहले भी कांग्रेस छोड़ने से पहले कुलदीप बिश्नोई ने समर्थकों की राय ली थी और बाद में भाजपा जॉइन की थी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कुलदीप बिश्नोई के सामने फिलहाल तीन बड़े विकल्प मौजूद हैं। पहला विकल्प भाजपा में बने रहने का है। माना जा रहा है कि वह पार्टी हाईकमान के सामने राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा के बयान का मुद्दा उठा सकते हैं।
दरअसल, पंचकूला में भाजपा की जनसभा के दौरान रेखा शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल और उनके बेटे चंद्रमोहन को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि इस इलाके में भजनलाल और चंद्रमोहन की बदमाशी चलती थी और इसी के दम पर चुनाव जीते जाते थे। इस बयान के बाद बिश्नोई परिवार की नाराजगी खुलकर सामने आई थी।
हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली इस बयान को रेखा शर्मा की निजी राय बता चुके हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विवाद सुलझाने की बात जरूर कही, लेकिन बयान की खुलकर निंदा नहीं की।
दूसरा विकल्प यह माना जा रहा है कि कुलदीप बिश्नोई अपनी पुरानी पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) को दोबारा सक्रिय कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें चुनाव आयोग की प्रक्रिया से गुजरना होगा। विलय के बाद पुरानी पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह दोबारा हासिल करना आसान नहीं माना जाता।
तीसरा विकल्प कांग्रेस में वापसी का बताया जा रहा है। कुलदीप बिश्नोई पहले भी कांग्रेस में रह चुके हैं, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मतभेदों के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। उन पर राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोप भी लगे थे।
इस बीच उनके बड़े भाई और कांग्रेस विधायक चंद्रमोहन पहले से कांग्रेस में सक्रिय हैं। चंद्रमोहन की गिनती कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा के करीबी नेताओं में होती है। दोनों नेताओं को कई राजनीतिक कार्यक्रमों में साथ देखा गया है।
राजनीतिक हलकों में अब सबकी नजर कुलदीप बिश्नोई की वापसी और समर्थकों की प्रस्तावित बैठक पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में हरियाणा की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।
pooja