अब सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स प्राइवेट आयुष अस्पतालों में भी कर सकेंगे इलाज
हरियाणा सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए दो नए प्राइवेट आयुष अस्पतालों को इम्पैनल्ड किया है। अब प्रदेश में करीब एक दर्जन आयुष अस्पतालों में सरकारी कर्मचारी इलाज कर सकेंगे। अस्पताल तीन वर्षों के लिए मान्यता प्राप्त रहेंगे।
➤ हरियाणा सरकार ने दो नए प्राइवेट आयुष अस्पतालों को इम्पैनल्ड किया
➤ अब प्रदेश में करीब एक दर्जन आयुष अस्पताल कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए उपलब्ध
➤ इम्पैनल्ड अस्पताल तीन वर्ष की अवधि के लिए मान्यता प्राप्त रहेंगे
हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ कई प्राइवेट अस्पतालों को भी इम्पैनल्ड किया गया है ताकि मरीजों को इलाज के लिए अधिक विकल्प मिल सकें। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर कर्मचारी को उसकी सुविधा और जरूरत के अनुसार इलाज का पूरा अधिकार मिले।
कर्मचारियों की मांग को ध्यान में रखते हुए अब सरकार ने आयुष अस्पतालों को भी इस योजना में शामिल किया है। हाल ही में सरकार ने दो और प्राइवेट आयुष अस्पतालों को इम्पैनल्ड कर लिया है, जिससे इनकी कुल संख्या अब करीब एक दर्जन तक पहुंच गई है। यह निर्णय न केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देगा बल्कि सरकारी स्वास्थ्य ढांचे पर बोझ को भी कम करेगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जिन दो नए अस्पतालों को इम्पैनल्ड किया गया है, उनमें झज्जर जिले के खेड़ी तालुका, पटौदा में स्थित संस्कारम हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर और हिसार जिले के बरवाला में स्थित वेदा मृता हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। अब हरियाणा के सरकारी कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके आश्रित इन अस्पतालों में भी इलाज करवा सकेंगे और सरकार द्वारा तय बीमारियों के लिए किए गए इलाज के मेडिकल बिल पास करवा पाएंगे।
आयुष निदेशालय की ओर से बताया गया कि प्रत्येक इम्पैनल्ड अस्पताल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो किसी भी शिकायत या समस्या की स्थिति में विभाग से समन्वय करेगा। इस व्यवस्था से मरीजों को पारदर्शी और जवाबदेह सेवाएं मिलेंगी।
इसके अलावा, सरकार ने इम्पैनल्ड अस्पतालों को कुछ अनिवार्य शर्तों के पालन का निर्देश दिया है। किसी भी आपात स्थिति, आपदा या मरीजों की अधिकता के समय ये अस्पताल अपनी एम्बुलेंस, आईसीयू, बर्न यूनिट, वार्ड बेड आदि सुविधाएं साझा करेंगे। यह प्रावधान स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूती देगा और मरीजों को त्वरित उपचार सुनिश्चित करेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये अस्पताल तीन वर्षों के लिए इम्पैनल्ड रहेंगे। इस अवधि के बाद उन्हें पुनः आवेदन कर नवीनीकरण कराना होगा। इसके साथ ही सभी अस्पतालों को राज्य सरकार के सभी वैधानिक नियमों, दिशा-निर्देशों और अधिसूचनाओं का पूर्ण पालन करना होगा।
प्रदेश सरकार का यह कदम न केवल कर्मचारियों के हित में है, बल्कि यह आयुष चिकित्सा को भी मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक अहम पहल है। इस योजना से सरकारी कर्मचारियों को अब आधुनिक चिकित्सा के साथ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचार का भी लाभ मिलेगा।
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