हरियाणा कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल संभव: हिसार समेत 7 जिलाध्यक्षों पर तलवार, गर्ग के इस्तीफे के बाद तेज हुई गुटबाजी की चर्चा
हरियाणा कांग्रेस में हिसार जिलाध्यक्ष बजरंग दास गर्ग के इस्तीफे के बाद संगठनात्मक बदलाव की चर्चा तेज है। सात जिलों को लेकर भी नए समीकरणों की चर्चा है।
➤ हिसार से शुरू हुई हलचल, हरियाणा कांग्रेस के 7 जिलाध्यक्षों पर हाईकमान की नजर
➤ बजरंग दास गर्ग के इस्तीफे के बाद संगठन में गुटबाजी और नेतृत्व पर सवाल तेज
➤ AICC के पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेंगे, रिपोर्ट के बाद तय होगा किन चेहरों की होगी छुट्टी
हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से भीतर ही भीतर चल रही संगठनात्मक खींचतान अब खुलकर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। हिसार कांग्रेस के शहरी जिलाध्यक्ष बजरंग दास गर्ग के इस्तीफे के बाद पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। इसी बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी AICC ने सात जिलों में संगठन सृजन अभियान के तहत पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए हैं, जिसके बाद इन जिलों के मौजूदा जिलाध्यक्षों के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
हालांकि, एक महत्वपूर्ण बात यह है कि AICC के मौजूदा आदेश में किसी मौजूदा जिलाध्यक्ष को सीधे हटाने की घोषणा नहीं की गई है। पर्यवेक्षकों को जमीनी स्तर पर रायशुमारी और फीडबैक लेने की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में सात जिलाध्यक्षों की छुट्टी को फिलहाल संभावित संगठनात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, अंतिम फैसला हाईकमान की रिपोर्ट के बाद ही होगा। हरियाणा में कांग्रेस के जिला संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद पहले भी पार्टी नेतृत्व के एजेंडे में रही है।
सबसे ज्यादा नजर हिसार पर है। यहां शहरी जिलाध्यक्ष बजरंग दास गर्ग के पद छोड़ने के बाद अब ग्रामीण जिलाध्यक्ष बृजलाल बहबलपुरिया को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पार्टी के भीतर सवाल उठ रहा है कि क्या हाईकमान हिसार में पुराने संगठनात्मक ढांचे को बरकरार रखेगा या फिर नए चेहरों के जरिए गुटबाजी खत्म करने की कोशिश करेगा।
गर्ग के इस्तीफे से हिसार में अचानक क्यों बढ़ी हलचल
हिसार कांग्रेस के शहरी जिलाध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में निजी व्यस्तताओं और सामाजिक कार्यों को वजह बताया और कहा कि वह संगठनात्मक जिम्मेदारी के लिए अपेक्षित समय नहीं दे पा रहे हैं। हालांकि, उनके इस्तीफे के बाद पार्टी के भीतर इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
हिसार कांग्रेस में संगठनात्मक स्तर पर पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं। ग्रामीण जिलाध्यक्ष बृजलाल बहबलपुरिया और बजरंग दास गर्ग के बीच एक कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन को लेकर विवाद की चर्चा भी सामने आई थी। मामला इतना बढ़ा था कि दोनों नेताओं ने अनुशासन समिति के समक्ष माफी मांगी थी।
अब गर्ग के इस्तीफे के बाद स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी केवल शहरी संगठन में बदलाव करेगी या फिर हिसार के पूरे जिला संगठन को नए सिरे से तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
सात जिलों में पर्यवेक्षक भेजने का क्या है मतलब
AICC ने हरियाणा में ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी केवल नाम सुझाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि वे स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद कर संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे।
यही वजह है कि पार्टी के भीतर पर्यवेक्षकों की सक्रियता को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे नेताओं, मौजूदा पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेंगे। इसके बाद संभावित नामों और संगठन की स्थिति को लेकर अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंपेंगे।
रिपोर्ट में यदि मौजूदा नेतृत्व को लेकर असंतोष, निष्क्रियता या गुटीय खींचतान की शिकायतें सामने आती हैं, तो हाईकमान नए चेहरों पर दांव लगा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय कांग्रेस नेतृत्व को ही लेना होगा।
किन सात जिलों पर टिकी हैं निगाहें
संगठनात्मक बदलाव की चर्चा में हिसार सबसे ऊपर है। इसके अलावा सिरसा, अंबाला, यमुनानगर, फरीदाबाद, फतेहाबाद और गुरुग्राम के संगठन भी हाईकमान की समीक्षा के दायरे में बताए जा रहे हैं।
इन जिलों में पर्यवेक्षकों की सक्रियता के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी नए समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कई स्थानीय नेता अपने-अपने स्तर पर संगठन में नई जिम्मेदारी की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
लेकिन यह भी स्पष्ट है कि अभी इन जिलों के मौजूदा अध्यक्षों को हटाने का कोई अंतिम आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित संगठनात्मक फेरबदल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
कार्यकर्ताओं की राय से तय होगी नई टीम?
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा जमीनी फीडबैक माना जा रहा है। पर्यवेक्षकों के जिलों में पहुंचने के बाद स्थानीय नेताओं के साथ-साथ आम कार्यकर्ताओं से भी बातचीत की जाएगी।
यही फीडबैक यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि मौजूदा जिलाध्यक्षों को आगे मौका दिया जाए या नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी जाए।
इस प्रक्रिया में संगठन के प्रति सक्रियता, कार्यकर्ताओं से संपर्क, चुनावी प्रदर्शन और स्थानीय स्तर पर स्वीकार्यता जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं। कांग्रेस पहले भी हरियाणा में संगठन को मजबूत करने और गुटबाजी को कम करने के लिए जिला स्तर पर नए नेतृत्व की जरूरत पर जोर देती रही है।
विधायक नरेश सेलवाल के बयान से भी बढ़ी हलचल
हुड्डा गुट के वरिष्ठ विधायक नरेश सेलवाल ने AICC की प्रक्रिया की पुष्टि करते हुए कहा है कि हिसार समेत सात जिलों में पार्टी नए सिरे से टीम तैयार करने जा रही है।
उनके इस बयान के बाद हिसार कांग्रेस में चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है। खासकर गर्ग के इस्तीफे के तुरंत बाद संगठन को नए सिरे से तैयार करने की बात सामने आने से स्थानीय स्तर पर इसे महज सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया से जोड़कर नहीं देखा जा रहा।
हालांकि अंतिम फैसला पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और हाईकमान के निर्णय के बाद ही सामने आएगा।
बृजलाल की कुर्सी पर क्यों उठ रहे सवाल
बजरंग दास गर्ग के इस्तीफे के बाद हिसार के ग्रामीण जिलाध्यक्ष बृजलाल बहबलपुरिया को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि AICC ने केवल खाली पद भरने के बजाय सात जिलों में संगठन के नए सिरे से चयन की प्रक्रिया शुरू की है।
यानी अगर हाईकमान की रायशुमारी में मौजूदा संगठन को लेकर सकारात्मक फीडबैक नहीं आता है, तो केवल शहरी जिलाध्यक्ष का बदलाव ही नहीं, बल्कि जिला संगठन के दूसरे पदों और नेतृत्व पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि बृजलाल को हटाने का कोई आधिकारिक फैसला फिलहाल सामने नहीं आया है। इसलिए उनकी कुर्सी को लेकर चल रही चर्चाओं को अभी राजनीतिक अटकल ही माना जाना चाहिए।
हिसार में पुराने चेहरों पर भरोसा या नए नेतृत्व पर दांव?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हिसार कांग्रेस में हाईकमान क्या रणनीति अपनाता है।
एक विकल्प यह है कि पार्टी मौजूदा संगठन में सीमित बदलाव करे और अनुभवी चेहरों को बरकरार रखते हुए खाली पद को भरे। दूसरा रास्ता यह हो सकता है कि हाईकमान नए चेहरों को सामने लाकर संगठन में नई ऊर्जा और नई कार्यशैली लाने की कोशिश करे।
गुटबाजी की चर्चाओं के बीच दूसरा विकल्प कई कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि पार्टी नेतृत्व यह मानता है कि पुराने समीकरणों के कारण संगठन कमजोर हुआ है, तो नए नेतृत्व को मौका देकर जमीनी स्तर पर कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने की कोशिश की जा सकती है।
असली फैसला पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के बाद
फिलहाल कांग्रेस के भीतर सबसे ज्यादा इंतजार पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट का रहेगा। जिलों में नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत के बाद जो तस्वीर हाईकमान के सामने जाएगी, उसी के आधार पर आगे की रणनीति तय होने की संभावना है।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सातों जिलाध्यक्षों की छुट्टी तय हो गई है। लेकिन इतना जरूर है कि हिसार से शुरू हुई संगठनात्मक हलचल ने हरियाणा कांग्रेस के कई जिलों के नेतृत्व को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
बजरंग दास गर्ग का इस्तीफा, हिसार में पहले से चली आ रही संगठनात्मक खींचतान और सात जिलों में नए सिरे से संगठनात्मक प्रक्रिया ने कांग्रेस के भीतर नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है।
अब देखना यही होगा कि पर्यवेक्षकों को जमीनी कार्यकर्ताओं से क्या फीडबैक मिलता है और हाईकमान उस फीडबैक के आधार पर पुराने चेहरों पर भरोसा करता है या नए हाथों में संगठन की कमान सौंपता है। यही फैसला आने वाले दिनों में हरियाणा कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों की दिशा तय कर सकता है।
Akhil Mahajan