हरियाणा में HRMS बना शिक्षकों-लिपिकों का सिरदर्द, 3 साल बाद भी प्रमोशन रिकॉर्ड अपडेट नहीं
हरियाणा के HRMS पोर्टल में 3 साल बाद भी शिक्षकों और लिपिकों के रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुए। ACP समेत कई वित्तीय व सेवा लाभ चार महीने से अटके हैं।
3 साल बाद भी HRMS में नहीं बदला शिक्षकों का पद
➤ ACP समेत कई वित्तीय और सेवा लाभ 4 महीने से अटके
➤ निदेशालय और NIC के बीच फंसे कर्मचारी, आश्वासन के अलावा कुछ नहीं
हरियाणा शिक्षा विभाग का HRMS पोर्टल अब कर्मचारियों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बनता जा रहा है। तकनीकी खामियों, प्रशासनिक सुस्ती और विभागीय समन्वय की कमी के चलते प्रदेश के सैकड़ों शिक्षक और लिपिक अपने ही वैध सेवा लाभों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
सबसे गंभीर स्थिति उन TGT शिक्षकों की है, जिन्हें वर्ष 2023 में पदोन्नत कर PGT बनाया गया था। शिक्षक नए पदों पर कार्यभार संभालकर वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन HRMS पोर्टल पर उनका रिकॉर्ड आज भी पुराने पद और प्राथमिक शिक्षा विभाग के कर्मचारी के तौर पर दर्ज है।
इसी तरह प्राथमिक से माध्यमिक विभाग में स्थानांतरित हुए लिपिकों का विभागीय रिकॉर्ड भी पोर्टल पर अपडेट नहीं हुआ है। इसका सीधा असर उनकी सेवा संबंधी प्रक्रियाओं पर पड़ रहा है।
पदोन्नति हो गई, पोर्टल पर पुराना पद
वर्ष 2023 में बड़ी संख्या में TGT शिक्षकों को PGT पद पर पदोन्नति दी गई थी। इसके बाद उन्हें नए स्कूलों में तैनाती भी मिल गई और वे लगातार नए पद की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
इसके बावजूद HRMS में उनका पुराना पद ही दिखाई दे रहा है। कई मामलों में कर्मचारी आज भी प्राथमिक शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हैं, जबकि वास्तविक रूप से वे माध्यमिक शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे हैं।
लिपिकों के साथ भी इसी तरह की समस्या सामने आ रही है। विभागीय स्थानांतरण के बावजूद HRMS में उनका रिकॉर्ड सही विभाग में अपडेट नहीं हुआ है।
चार महीने से ACP और दूसरे लाभ अटके
रिकॉर्ड में पद और विभाग से जुड़ी गलत जानकारी का असर कर्मचारियों के ACP, CCA, ACR, वेतन निर्धारण, वरिष्ठता और ऑनलाइन ट्रांसफर जैसी प्रक्रियाओं पर पड़ रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे संबंधित लाभों के लिए जरूरी शर्तें पूरी करते हैं, लेकिन HRMS में रिकॉर्ड सही नहीं होने के कारण उनकी फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
ACP समेत कई वित्तीय और सेवा लाभ पिछले करीब चार महीने से अटके हुए हैं। इससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।
निदेशालय भेजता है NIC, NIC मांगता है रिकॉर्ड
समस्या को ठीक कराने के लिए कर्मचारी पंचकूला स्थित शिक्षा निदेशालय पहुंच रहे हैं। वहां से उन्हें NIC के पास भेज दिया जाता है।
NIC की ओर से बताया जाता है कि जब तक शिक्षा निदेशालय प्रभावित कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड और आधिकारिक निर्देश नहीं भेजता, तब तक पोर्टल में जरूरी बदलाव नहीं किए जा सकते।
इस तरह निदेशालय और NIC के बीच जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही है। दोनों स्तरों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा सीधे कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।
स्कूल से चंडीगढ़ तक चक्कर
HRMS में रिकॉर्ड सुधारने का अधिकार स्कूल स्तर पर नहीं होने के कारण कर्मचारियों के लिए पूरी प्रक्रिया और ज्यादा जटिल हो गई है।
कर्मचारी पहले BEO, फिर DEO और इसके बाद पंचकूला शिक्षा निदेशालय तक आवेदन लेकर पहुंच रहे हैं। कई कर्मचारी ब्लॉक कार्यालय, जिला शिक्षा कार्यालय और चंडीगढ़ स्थित संबंधित दफ्तरों के चक्कर लगा चुके हैं।
इसके बावजूद उन्हें अब तक ठोस समाधान के बजाय आश्वासन ही मिल रहे हैं।
हेल्पडेस्क पर शिकायतें, समाधान अब भी दूर
कर्मचारियों की ओर से HRMS हेल्पडेस्क पर लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। विभागीय अधिकारियों की ओर से भी इस संबंध में पत्राचार किया गया है।
इसके बावजूद तकनीकी टीम की ओर से लंबित रिकॉर्ड को पूरी तरह दुरुस्त नहीं किया जा सका है। कई गंभीर मामले महानिदेशक माध्यमिक शिक्षा तक भी पहुंच चुके हैं, लेकिन प्रभावित कर्मचारियों का रिकॉर्ड अब तक पूरी तरह अपडेट नहीं हुआ है।
डिजिटल व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
HRMS को कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड को डिजिटल, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इससे कागजी प्रक्रिया कम होने और कर्मचारियों को ऑनलाइन सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी।
लेकिन जब विभाग खुद किसी कर्मचारी की पदोन्नति का आदेश जारी कर देता है, उसे नए पद पर तैनाती मिल जाती है और वह उसी पद के अनुसार काम करता है, फिर भी पोर्टल पर पुराना पद दिखाई देता है, तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कर्मचारियों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया को आसान बनाना था, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक खामियों के कारण उन्हें पहले से ज्यादा दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
गलती की सजा कर्मचारी क्यों भुगतें
प्रभावित शिक्षकों का कहना है कि वर्ष 2023 में पदोन्नति के समय संबंधित स्कूलों के तत्कालीन प्रिंसिपल और क्लर्क स्तर पर रिकॉर्ड अपडेट करने में लापरवाही हुई। अब उसी गलती का असर कर्मचारियों के सेवा लाभों पर पड़ रहा है।
कर्मचारियों की मांग है कि इस समस्या को व्यक्तिगत शिकायतों के आधार पर निपटाने के बजाय विशेष अभियान चलाकर सभी प्रभावित कर्मचारियों का रिकॉर्ड एक साथ दुरुस्त किया जाए।
उनका कहना है कि शिक्षा निदेशालय, NIC और HRD को मिलकर लंबित मामलों की सूची तैयार करनी चाहिए और तय समय सीमा में सभी रिकॉर्ड अपडेट करने चाहिए। इसके बाद रुके हुए वित्तीय और सेवा लाभ भी तुरंत जारी किए जाने चाहिए।
हसला ने आंदोलन की दिशा में दिए संकेत
हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंधु ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल तकनीकी खामी का मामला नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है।
सतपाल सिंधु ने कहा कि एसोसिएशन जल्द ही शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक जितेंद्र दहिया से मुलाकात करेगी।
उन्होंने मांग की कि HRMS से जुड़े काम की जिम्मेदारी तत्काल किसी एक एजेंसी को दी जाए। साथ ही संबंधित एजेंसी की स्पष्ट जवाबदेही तय हो, ताकि कर्मचारियों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
निदेशक बोले- आवश्यक कार्रवाई की जाएगी
माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक जितेंद्र दहिया से इस संबंध में संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि HRMS की तकनीकी कमियां कब तक दूर होंगी। लंबित मामलों के निपटारे के लिए कोई निश्चित समय सीमा भी नहीं बताई गई।
इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि रिकॉर्ड अपडेट करने में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी या नहीं।
ऐसे में अब कर्मचारियों की नजर शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर है। तीन साल पुराने रिकॉर्ड सुधार और पिछले चार महीने से अटके सेवा लाभों को लेकर प्रभावित कर्मचारियों को उम्मीद है कि विभाग जल्द ठोस समाधान निकालेगा।
pooja