सावन शिवरात्रि पर हरियाणा के शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, ड्राइवर छोरी निशु ने खींचा ध्यान, पिता के इलाज के लिए थामा ट्रक का स्‍टेयरिंग अब, गंगाजल लाकर करवाया स्‍नान

हरियाणा में सावन शिवरात्रि पर शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। जींद की निशु देशवाल, सीसवाल धाम और CM सैनी के लिए लाई कांवड़ चर्चा में रही।

सावन शिवरात्रि पर हरियाणा के शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब,  ड्राइवर छोरी निशु ने खींचा ध्यान, पिता के इलाज के लिए थामा ट्रक का स्‍टेयरिंग अब, गंगाजल लाकर करवाया स्‍नान

सुबह से शिवालयों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें
जींद की ड्राइवर छोरी निशु देशवाल ने हरिद्वार से गंगाजल लाकर माता-पिता को कराया स्नान
सीसवाल धाम में शिवलिंग से लिपटे कांवड़िए, CM सैनी के लिए गंगाजल लेकर चंडीगढ़ पहुंचे समर्थक


हरियाणा में सावन शिवरात्रि के अवसर पर मंगलवार सुबह तड़के से ही शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। प्रदेशभर के मंदिरों में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं। सुबह की पहली किरण के साथ ही पूजा-अर्चना शुरू हो गई और मंदिर परिसर हर-हर महादेव, बोल बम के जयकारों से गूंज उठे।

संगमेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

कांवड़ लेकर हरिद्वार और अन्य तीर्थस्थलों से लौटे श्रद्धालु अपने-अपने क्षेत्र के शिवालयों में पहुंचे और शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित किया। इस दौरान कई जगहों पर अनोखी कांवड़ों और श्रद्धालुओं की आस्था ने लोगों का ध्यान खींचा।

शिव मंदिर में जलाभिषेक करते श्रद्धालु।

मंदिरों को सावन शिवरात्रि के लिए विशेष रूप से सजाया गया है। कई मंदिरों में भगवान शिव का विशेष शृंगार किया गया। श्रद्धालु कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र अर्पित कर श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कांवड़ियों के पहुंचने से शिवालयों के साथ आसपास के बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद, पेयजल और भंडारे की व्यवस्था की गई है।

जींद की ड्राइवर छोरी निशु ने हरिद्वार से लाया गंगाजल, माता-पिता को कराया स्नान

जींद के हाड़वा गांव की ड्राइवर छोरी निशु देशवाल इस बार अपनी आस्था के साथ-साथ अपने संघर्ष की कहानी को लेकर भी चर्चा में हैं। निशु हरिद्वार से गंगाजल लेकर पहुंचीं और उन्होंने अपने माता-पिता को उसी गंगाजल से स्नान कराया।

बताया गया कि पिता की बीमारी की वजह से निशु को हैवी ड्राइविंग लाइसेंस लेना पड़ा। इसके बाद उन्होंने गाड़ी और पिकअप चलाना शुरू किया। खास बात यह है कि 90 लड़कों की ट्रेनिंग में निशु अकेली लड़की थीं। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने के बाद माता-पिता को गंगाजल से स्नान कराना उनके लिए आस्था और भावनाओं से जुड़ा विशेष पल रहा।

सीसवाल धाम में शिवलिंग से लिपट गए कांवड़िए

हिसार के आदमपुर स्थित ऐतिहासिक सीसवाल धाम में सावन शिवरात्रि पर अनोखा नजारा देखने को मिला। जलाभिषेक के बाद कुछ कांवड़िए विशाल शिवलिंग से लिपट गए। श्रद्धालुओं की इस आस्था ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा।

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यह मंदिर करीब 5000 साल पुराना है। हालांकि, मंदिर की इतनी प्राचीनता को प्रमाणित करने वाला कोई ऐतिहासिक प्रलेख उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के बीच सीसवाल धाम की धार्मिक आस्था और मान्यता काफी गहरी है।

CM नायब सैनी के लिए गंगाजल लेकर चंडीगढ़ पहुंचे समर्थक

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कई समर्थक कांवड़ लेकर चंडीगढ़ स्थित सीएम हाउस भी पहुंचे। इनमें नूंह के तावड़ू से ब्लॉक समिति सदस्य हरपाल, बहादुरगढ़ के पार्षद जसबीर सैनी और कैथल से एक टीचर शामिल हैं।

इन लोगों का कहना है कि वे हरिद्वार से मुख्यमंत्री नायब सैनी के लिए गंगाजल लेकर आए हैं। हालांकि, उन्हें सीएम हाउस के अंदर प्रवेश नहीं मिल सका।

इससे पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रात में कुरुक्षेत्र में कांवड़ लेकर पहुंचे शिवभक्तों से मुलाकात की। उन्होंने कुरुक्षेत्र से चंडीगढ़ आते समय साहा और बरवाला के बीच कांवड़ियों से भेंट की और उनकी यात्रा की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन कांवड़ियों की श्रद्धा, आस्था और उत्साह ने उन्हें अभिभूत किया।

सोनीपत के शंभू दयाल मंदिर में लंबी कतारें

सोनीपत के ऐतिहासिक शंभू दयाल मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। करीब 600 साल पुराने इस ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है।

मंदिर के प्रधान पुजारी डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद शास्त्री का कहना है कि इसी मंदिर में आकर श्रवण कुमार ने भोले बाबा का जलाभिषेक किया था। उनकी मान्यता के अनुसार पांडवों ने भी इस मंदिर में एक दिन का अज्ञातवास बिताया था। मंदिर को हजारों वर्ष पुराना बताया जाता है और यहां पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।

सोनीपत के शहजादपुर गांव की ममता ने बताया कि वह कई साल से शिवरात्रि पर इस प्राचीन शंभू दयाल मंदिर में आ रही हैं। उनका कहना है कि यहां जलाभिषेक करने से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है और भोले बाबा की कृपा बनी रहती है।

फरीदाबाद से नारनौल तक शिवालयों में उमड़ी भीड़

फरीदाबाद के बल्लभगढ़ स्थित शिव मंदिर में सुबह से ही कांवड़ियों और शिवभक्तों की भीड़ जल चढ़ाने के लिए पहुंचती रही। नेशनल हाईवे पर डाक कांवड़ लेकर आने वाले कांवड़िए भी अपने-अपने मंदिरों की ओर जाते दिखाई दिए।

करनाल के मेन मार्केट स्थित शिव मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रही। पंचकूला के पिंजौर शिव मंदिर में महिलाएं पूजा करती नजर आईं। रेवाड़ी की नई बस्ती में प्राचीन महादेव मंदिर को सजाया गया और श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।

कैथल के श्री 11 रुद्री मंदिर में भी सुबह से शिवभक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचे। नारनौल के नर्मदेश्वर मंदिर नई सराय में 'ऊं जय शिव ओंकारा' की गूंज सुनाई दी। गुरुग्राम के गुफावाले मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। यहां शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने के बाद कांवड़ मंदिर परिसर में रखी गईं और सुबह से ढोल भी बजते रहे।

सिरसा की तारा बाबा कुटिया में शिवरात्रि के अवसर पर कांडा परिवार और अन्य लोगों ने हवन किया। कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।

रेवाड़ी पहुंची हरिद्वार की रथ कांवड़ यात्रा

हरिद्वार की हर की पौड़ी से चली रथ कांवड़ यात्रा भी रेवाड़ी पहुंची। कांवड़िए गांव पाल्हावास जमापुर के मंदिर की ओर जाते दिखाई दिए। कांवड़ियों ने बताया कि यह उनकी पहली यात्रा रही और रास्ते में उन्हें सभी जगह अच्छी व्यवस्था मिली।

सावन शिवरात्रि के चलते प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कांवड़ियों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। मंदिरों के आसपास धार्मिक माहौल के साथ बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ी हुई है।

सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न हुए और उन्हें स्वीकार किया। इसी कारण सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है।

हरियाणा में कांवड़ यात्रा के बाद सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। हरिद्वार समेत अन्य तीर्थस्थलों से गंगाजल लेकर लौटे कांवड़िए सुबह से ही अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में पहुंच रहे हैं। मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतारें, कांवड़ियों के जत्थे और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरे प्रदेश में शिवभक्ति का माहौल बना हुआ है।