90 साल की सास को कांवड़ में बैठाकर 250 KM पैदल चली बहू, हरियाणा की रागनी सिंगर बनीं मिसाल

हरियाणा की रागनी सिंगर काजल चौधरी 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बैठाकर 250 किमी पैदल चल रही हैं। वहीं पानीपत का किसान सतनाम 9 क्विंटल की नंदी कांवड़ के साथ 365 लीटर गंगाजल ला रहा है।

90 साल की सास को कांवड़ में बैठाकर 250 KM पैदल चली बहू, हरियाणा की रागनी सिंगर बनीं मिसाल

हरियाणवी रागनी सिंगर काजल चौधरी 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बैठाकर कर रहीं 250 किमी पैदल यात्रा
2025 में भी हरिद्वार से दिल्ली तक ऐसी ही यात्रा, इस साल करा चुकी हैं 84 कोस परिक्रमा
पानीपत के किसान सतनाम 9 क्विंटल की नंदी कांवड़ और 365 लीटर गंगाजल के साथ लौट रहे


सावन के पावन महीने में जहां लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए कांवड़ यात्रा कर रहे हैं, वहीं हरियाणा से सामने आई दो अनोखी कांवड़ यात्राएं लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। एक ओर हरियाणवी रागनी सिंगर काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास चंद्री देवी को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक करीब 250 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रही हैं, तो दूसरी ओर पानीपत के किसान सतनाम करीब 9 क्विंटल वजन की नंदी कांवड़ में 365 लीटर गंगाजल लेकर अपने गांव की ओर पैदल लौट रहे हैं। दोनों की श्रद्धा और संकल्प ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

सास चंद्री देवी को कांवड़ में बैठाकर निकलीं कलाकार काजल चौधरी।

90 साल की सास की सेवा बन गई मिसाल

काजल चौधरी मूल रूप से पलवल जिले के होडल क्षेत्र के हताना गांव की रहने वाली हैं और वर्तमान में दिल्ली के शाहदरा में रहती हैं। हरियाणवी रागनी, लोकगीत और धार्मिक भजनों से पहचान बनाने वाली काजल इस बार अपनी सेवा भावना के कारण चर्चा में हैं।

उन्होंने 21 जुलाई को हरिद्वार से अपनी 90 वर्षीय सास चंद्री देवी को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाकर यात्रा शुरू की। उनका लक्ष्य 11 अगस्त तक शाहदरा पहुंचने का है। फिलहाल वह मेरठ के मोदीपुरम तक पहुंच चुकी हैं।

रोज 15 किलोमीटर पैदल चलती हैं

काजल ने बताया कि उनकी सास का वजन करीब 50 किलो है। वह प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलती हैं। इस यात्रा में उनका बेटा मनीष चौधरी भी साथ है और दोनों बारी-बारी से कांवड़ उठाते हैं। रात में वे कांवड़ शिविरों में विश्राम करते हैं।

पहले भी करा चुकी हैं 84 कोस परिक्रमा

यह पहली बार नहीं है जब काजल ने अपनी सास की सेवा के लिए ऐसा संकल्प लिया हो। 2025 में भी वह अपनी सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक करीब 250 किलोमीटर की यात्रा करा चुकी हैं। इसी वर्ष उन्होंने अपनी सास को कंधों पर बैठाकर ब्रज की 84 कोस परिक्रमा भी पूरी करवाई।

9 क्विंटल की नंदी कांवड़ लेकर लौट रहा पानीपत का किसान

उधर पानीपत जिले के नारा गांव का 35 वर्षीय किसान सतनाम भी अपनी अनोखी कांवड़ यात्रा को लेकर चर्चा में है। वह 30 जुलाई को हरिद्वार से रवाना हुआ था और फिलहाल मुजफ्फरनगर तक पहुंच चुका है। उसका लक्ष्य 11 अगस्त तक अपने गांव पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करना है।

365 लीटर गंगाजल के पीछे खास संकल्प

सतनाम की नंदी कांवड़ में 365 लीटर गंगाजल भरा हुआ है। बुग्गी और अन्य सामान सहित इसका कुल वजन करीब 9 क्विंटल है। उसका संकल्प है कि पूरे वर्ष हर दिन एक लीटर गंगाजल शिवलिंग पर अर्पित करेगा।

42 केले, 5 लीटर दूध और 5 किलो पपीता है डाइट

इतना भारी वजन खींचने के लिए सतनाम अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखता है। वह एक समय में 42 केले, 5 लीटर दूध और करीब 5 किलो पपीता खाता है। उसका कहना है कि यही भोजन उसे इतनी लंबी दूरी तक लगातार नंदी कांवड़ खींचने की ऊर्जा देता है।