HRTC हड़ताल पर सरकार और यूनियन आमने-सामने, HRTC कर्मी हड़ताल पर अड़े, ESMA लागू; डिप्टी सीएम बोले- बसें नहीं चलानी तो चाबियां सौंप दें
हिमाचल प्रदेश में HRTC हड़ताल को लेकर सरकार और यूनियन के बीच टकराव बढ़ गया है। ESMA लागू होने के बावजूद कर्मचारी हड़ताल पर अड़े हैं, जबकि सरकार ने सख्त चेतावनी दी है।
HRTC हड़ताल को लेकर सरकार और चालक-परिचालक यूनियन आमने-सामने
• सरकार ने प्रदेश में ESMA लागू किया, यूनियन आज रात 12 बजे से बसें बंद करने पर अड़ी
• डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री बोले- बसें नहीं चलानी तो चाबियां निगम को सौंप दें
शिमला। हिमाचल प्रदेश में HRTC चालक-परिचालक यूनियन की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बाधित होने से बचाने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है। वहीं यूनियन ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो आज रात 12 बजे के बाद प्रदेशभर में बस सेवाएं ठप कर दी जाएंगी।
यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य वित्तीय देनदारियों का भुगतान लंबे समय से लंबित है। कई बार सरकार और निगम प्रबंधन के समक्ष समस्याएं रखने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। इसी कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
यूनियन नेताओं का दावा है कि सरकार अस्थायी नियुक्तियों के जरिए परिवहन व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह आसान नहीं होगा। उनका कहना है कि नियमित चालक और परिचालक लंबे प्रशिक्षण और अनुभव के बाद सेवाओं में आते हैं, इसलिए अस्थायी कर्मियों के भरोसे व्यवस्था चलाना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
इस बीच HRTC पेंशनर्स संगठन ने भी यूनियन के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है। पेंशनर्स का कहना है कि उन्हें समय पर पेंशन का भुगतान नहीं हो रहा है और सरकार के दावों के विपरीत जमीनी स्तर पर हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं।
वहीं उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने हड़ताल को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बाधित करना कानूनन गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में ESMA लागू है और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि यदि चालक और परिचालक बसें नहीं चलाना चाहते तो वे बसों की चाबियां निगम प्रबंधन को सौंप दें। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी कर्मचारी को सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, यात्रियों को बीच रास्ते में उतारने या कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि गुरुवार से चालक और परिचालकों को उनके निर्धारित रूटों के संबंध में लिखित आदेश जारी किए जाएंगे, ताकि परिवहन सेवाएं प्रभावित न हों।
डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार ने HRTC को मजबूत बनाने के लिए 813 नई बसें खरीदी हैं, जिनमें 279 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इसके अलावा 2,198 कर्मचारियों को अनुबंध से नियमित किया गया है, 327 परिचालकों की नियमित भर्ती की गई है और 198 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के साथ हुई बैठक में कर्मचारियों की ओर से कोई बड़ी वित्तीय मांग प्रमुखता से नहीं रखी गई थी। बैठक में मुख्य रूप से तबादलों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन करीब ढाई करोड़ रुपये की आय अर्जित करने वाले निगम को हड़ताल से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
सरकार ने संभावित हड़ताल से निपटने के लिए प्रदेश के 31 डिपो में 656 चालक और परिचालकों की छह माह के लिए आपातकालीन आधार पर भर्ती का फैसला किया है। इन कर्मचारियों को 1500 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी दी जाएगी, ताकि बस सेवाएं बाधित न हों।
अब सभी की निगाहें सरकार और यूनियन के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हुई हैं। यदि देर रात तक कोई सहमति नहीं बनती है तो प्रदेशभर में बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
pooja