पानीपत के महाबीर की अनोखी विदाई, हाइड्रा क्रेन पर 100 फीट ऊंचाई से गांव पहुंचे; लोगों ने फूल बरसाकर किया स्वागत
पानीपत में फूड एंड सप्लाई विभाग से रिटायर हुए महाबीर बांगड़ ने हाइड्रा क्रेन पर सवार होकर गांव पहुंचकर अपनी विदाई को यादगार बना दिया। रास्ते भर लोगों की भीड़ जुटी।
➤ 23 साल की नौकरी के बाद हाइड्रा क्रेन पर सवार होकर पहुंचे घर
➤ फूलों से सजी क्रेन, थार-स्कॉर्पियो के काफिले ने बनाई विदाई यादगार
➤ पत्नी ने आरती उतारी, गांव वालों ने फूल बरसाकर किया स्वागत
हरियाणा के पानीपत जिले में रिटायरमेंट का ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। फूड एंड सप्लाई विभाग में 23 वर्ष तक सेवादार (चतुर्थ श्रेणी) के पद पर कार्यरत रहे 58 वर्षीय महाबीर बांगड़ ने अपनी विदाई को अनोखा और यादगार बनाने के लिए ऐसा तरीका चुना, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है।
जहां आमतौर पर कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद कार या सरकारी वाहन से घर लौटते हैं, वहीं महाबीर बांगड़ करीब 100 फीट ऊंची हाइड्रा क्रेन की बूम पर सवार होकर अपने पैतृक गांव कवि पहुंचे। फूलों, मालाओं और रंग-बिरंगी चुन्नियों से सजी क्रेन को देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
हाइड्रा क्रेन के आगे थार, स्कॉर्पियो समेत कई गाड़ियों का काफिला चल रहा था। डीजे की धुन पर लोग झूमते रहे और महाबीर बांगड़ भी क्रेन पर सवार होकर पूरे रास्ते लोगों का अभिवादन करते रहे। रास्ते में बड़ी संख्या में लोगों ने इस अनोखी विदाई के वीडियो और फोटो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किए।
महाबीर बांगड़ ने बताया कि उन्होंने वर्षों पहले ही तय कर लिया था कि रिटायरमेंट के दिन कुछ अलग करेंगे। कई साथियों की सामान्य विदाई देखने के बाद उन्होंने कार या रथ की बजाय हाइड्रा क्रेन से घर जाने का फैसला किया। उनका मानना था कि जिंदगी में रिटायरमेंट का दिन सिर्फ एक बार आता है, इसलिए इसे हमेशा याद रहने वाला बनाया जाना चाहिए।
परिवार के अनुसार, इस अनोखी विदाई की तैयारी जून 2026 की शुरुआत से ही शुरू हो गई थी। रिश्तेदारों और परिवार से सलाह लेने के बाद हाइड्रा क्रेन बुक कराई गई। रिटायरमेंट से करीब 10 दिन पहले क्रेन की बुकिंग हुई और 29 जून की रात उसे फूलों व रंग-बिरंगी चुन्नियों से सजाया गया। सुरक्षा के लिहाज से क्रेन की तकनीकी जांच भी कराई गई।
30 जून को रिटायरमेंट के दिन पहले मतलौडा तहसील और फिर पानीपत जिला लघु सचिवालय में अधिकारियों और सहकर्मियों ने महाबीर बांगड़ को फूल-मालाएं पहनाकर, स्मृति चिन्ह भेंट कर और मिठाई खिलाकर सम्मानपूर्वक विदाई दी।
इसके बाद करीब 5 किलोमीटर का सफर, जो सामान्य परिस्थितियों में लगभग 10 मिनट में पूरा हो जाता है, हाइड्रा की धीमी गति और रास्ते में लोगों की भीड़ के कारण करीब 50 मिनट में पूरा हुआ।
घर पहुंचने पर उनकी पत्नी शीला देवी ने आरती उतारी, तिलक लगाया और फूल बरसाकर स्वागत किया। इसके बाद पूरे परिवार और ग्रामीणों की मौजूदगी में उनका गृह प्रवेश कराया गया।
महाबीर बांगड़ फूड एंड सप्लाई विभाग से सेवादार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटे और एक बेटी हैं। बड़ा बेटा चानू अमेरिका में रहता है, जबकि दूसरे बेटे मोहित के साथ परिवार हरियाणा में रहता है।
Akhil Mahajan