इस बार हिमाचली सेब का स्वाद नहीं पहुंचेगा मंडियों तक! पांच हजार करोड़ के सेब कारोबार पर संकट! जानें वजह
शिमला के चौपाल क्षेत्र में सेब सीजन से पहले खराब सड़कों, लंबित भुगतान और खरीद व्यवस्था को लेकर बागवानों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की।
➤ सेब सीजन शुरू होने से पहले चौपाल क्षेत्र की खराब सड़कों पर बागवानों ने जताई चिंता
➤ जिला परिषद सदस्य अतुल शर्मा ने प्रशासन से सड़क मरम्मत, भुगतान और खरीद व्यवस्था सुधारने की मांग की
➤ चेतावनी- समय रहते तैयारी नहीं हुई तो हजारों बागवानों को उठाना पड़ सकता है भारी आर्थिक नुकसान
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सेब कारोबार के नए सीजन से पहले बागवानों की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का योगदान देने वाले सेब उद्योग पर इस बार मौसम के साथ-साथ बदहाल सड़कों का भी संकट मंडराने लगा है। अर्ली वैरायटी का सेब मंडियों तक पहुंचना शुरू हो चुका है, लेकिन कई क्षेत्रों में सड़कें जर्जर हालत में हैं। ऐसे में किसानों और बागवानों को आशंका है कि यदि समय रहते सड़कें दुरुस्त नहीं हुईं तो परिवहन व्यवस्था प्रभावित होगी और उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर जिला शिमला के चौपाल क्षेत्र के जिला परिषद सदस्य अतुल शर्मा ने स्थानीय लोगों के साथ जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर सेब सीजन से पहले जरूरी तैयारियां पूरी करने की मांग उठाई है।
अतुल शर्मा ने कहा कि अगले करीब 15 दिनों में लोअर बेल्ट में सेब सीजन पूरी तरह शुरू हो जाएगा, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी तैयारी दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सड़कों की मरम्मत और अन्य व्यवस्थाएं नहीं की गईं तो बागवानों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष लंबे समय बाद बागवानों को अच्छी पैदावार मिली थी, लेकिन खराब सड़कें, कमजोर विपणन व्यवस्था और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। कई स्थानों पर HPMC के गोदामों में हजारों बोरियां सेब की खराब हो गईं, जबकि कई किसानों को मजबूरी में 250 से 400 रुपये प्रति पेटी तक के बेहद कम दाम पर अपनी फसल बेचनी पड़ी। इतना ही नहीं, कई आढ़तियों ने आज तक किसानों का भुगतान नहीं किया है और HPMC की ओर से भी पिछले सीजन का भुगतान लंबित है।
ज्ञापन में चौपाल-देहा मुख्य मार्ग पर 50 से 60 ऐसे पेड़ों का भी उल्लेख किया गया है, जो किसी भी समय गिर सकते हैं और बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा देहा से करगोली नाला तक लगभग आठ किलोमीटर सड़क की खराब स्थिति पर भी चिंता जताई गई है। वर्षों से सड़क पर मेटलिंग नहीं होने के कारण सेब से लदी पिकअप गाड़ियों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। पुलबाहल, सराहां, नेरी पुल और सोलन मार्ग की खराब हालत का मुद्दा भी प्रशासन के समक्ष रखा गया।
अतुल शर्मा ने सुझाव दिया कि इस बार केवल HPMC पर निर्भर रहने के बजाय हिमफैड सहित अन्य एजेंसियों को भी सेब खरीदने की अनुमति दी जाए, ताकि खरीद प्रक्रिया सुचारु रहे और किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो। उन्होंने पंचायतों को आपातकालीन स्थिति में संपर्क मार्ग बहाल करने के लिए पहले से विशेष फंड उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई, जिससे बारिश के दौरान बंद होने वाली सड़कों को तुरंत खोला जा सके।
उन्होंने यह भी मांग की कि मंडियों में केवल लाइसेंसधारी व्यापारी ही सेब खरीदें, ताकि गैर-लाइसेंसधारी खरीदार किसानों के साथ धोखाधड़ी न कर सकें। साथ ही सभी किसानों को सेब का भुगतान अधिकतम 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए तथा HPMC के लंबित भुगतान भी जल्द जारी किए जाएं।
जिला परिषद सदस्य ने कहा कि यदि सेब सीजन शुरू होने से पहले सड़क मरम्मत, भुगतान व्यवस्था और खरीद प्रणाली में आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो इस वर्ष भी हजारों बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
Akhil Mahajan