12 करोड़ की लैंबॉर्गिनी से कुचले राहगीर, FIR में ‘अज्ञात’ बना रहा रईसजादा; सोशल मीडिया के दबाव में पुलिस बैकफुट पर
12 करोड़ की लैंबॉर्गिनी से हुए हादसे में आरोपी कारोबारी बेटे का नाम FIR से गायब रहा। सोशल मीडिया दबाव के बाद पुलिस ने नाम जोड़ने की बात कही।
➤ तंबाकू कारोबारी के बेटे का नाम FIR से रहा गायब
➤ 12 करोड़ की लैंबॉर्गिनी से 6 लोग घायल
➤ हंगामे के बाद FIR में नाम जोड़ने की तैयारी
रईसजादे की रफ्तार ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। इस बार 12 करोड़ रुपये की लैंबॉर्गिनी कार और करोड़पति चालक सुर्खियों में है। तेज रफ्तार कार ने छह लोगों को रौंद दिया है। सभी घायल हैं। लेकिन, चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी कारोबारी बेटे का नाम FIR में नहीं डाला गया। पुलिस ने पहले मामले में एक ‘अज्ञात व्यक्ति’ के खिलाफ केस दर्ज किया, जिस पर अब सवालों की बौछार हो रही है।
हादसे का आरोपी बंशीधर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक के.के. मिश्रा का बेटा शिवम मिश्रा बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने शुरुआती FIR में उसका नाम शामिल नहीं किया। मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर पुलिस की भूमिका को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं और नाम जोड़ दिया गया।
FIR से गायब रहा आरोपी का नाम
पुलिस के मुताबिक, सोमवार 9 फरवरी को लैंबॉर्गिनी कार से एक मोटरसाइकिल को टक्कर मारी गई। हादसे में तौफीक नामक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। बावजूद इसके, FIR में आरोपी चालक को ‘अज्ञात’ बताया गया।
यह तथ्य सामने आने के बाद सवाल उठे कि आखिर इतनी महंगी कार और पहचाने गए मालिक के बावजूद नाम क्यों छुपाया गया।
सोशल मीडिया पर बवाल, पुलिस बैकफुट पर
मामले ने जैसे ही तूल पकड़ा, पुलिस प्रशासन दबाव में आ गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाए कि क्या पैसे और रसूख के आगे कानून कमजोर पड़ गया है। इसके बाद पुलिस कमिश्नर को सामने आकर सफाई देनी पड़ी।
अब FIR में जोड़ा जाएगा नाम
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने कहा कि जांच के दौरान कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा का नाम सामने आया है और अब उसे FIR में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार एक मोटरसाइकिल से टकराई थी, जिसके पास तौफीक खड़ा था। टक्कर के बाद तौफीक कार पर गिर गया, जिससे उसके हाथ और पैरों में चोटें आईं।
कानून पर उठे बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या रसूखदारों के लिए कानून अलग होता है। सवाल यह भी है कि अगर सोशल मीडिया पर दबाव न बनता, तो क्या आरोपी का नाम कभी FIR में जुड़ता भी या नहीं।
Akhil Mahajan