राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा की संपत्ति पर सियासी संग्राम, भाजपा ने उठाए सवाल; कांग्रेस ने दिया पैतृक संपत्ति का जवाब
हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा की 230 करोड़ से अधिक संपत्ति को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने सवाल उठाए तो कांग्रेस ने इसे पैतृक संपत्ति बताते हुए झूठा प्रचार कहा।
■ राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा की 230 करोड़ से अधिक संपत्ति पर सियासी विवाद तेज
■ भाजपा ने सरकारी ठेकों और संपत्ति पर उठाए सवाल, कांग्रेस ने बताया पैतृक धन
■ सीएम सुक्खू और जयराम ठाकुर के बीच बयानबाजी से हिमाचल की राजनीति गरमाई
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा की संपत्ति को लेकर जबरदस्त सियासी घमासान छिड़ गया है। उनके शपथपत्र में दर्ज 230 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर विपक्षी दल भाजपा ने सवाल उठाए हैं, जबकि कांग्रेस इसे पूरी तरह झूठा प्रचार बता रही है।
दरअसल, हाल ही में अनुराग शर्मा निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं। इसके बाद उनके द्वारा दाखिल किए गए नामांकन शपथपत्र में दर्ज संपत्ति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा का आरोप है कि जिस व्यक्ति को कांग्रेस एक साधारण कार्यकर्ता बताकर राज्यसभा भेज रही है, उसकी संपत्ति करोड़ों में है और उसके पास कई सरकारी ठेके भी हैं।
इधर, इस पूरे विवाद पर अनुराग शर्मा ने साफ शब्दों में कहा है कि उनकी संपत्ति पैतृक है और वह अपने पिता के कारोबार को संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके शपथपत्र में कुछ भी गलत नहीं है और अगर किसी को शिकायत करनी है तो वह कर सकता है, उन्हें किसी से डर नहीं लगता।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को कांग्रेस साधारण कार्यकर्ता बताकर टिकट दे रही है, उसके पास 230 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सामने आई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में उसके पास करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके भी हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के ही कई नेता यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि यही साधारण कार्यकर्ता की परिभाषा है तो वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे अन्य कार्यकर्ताओं को यह अवसर क्यों नहीं मिला।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ने सैद्धांतिक निर्णय लेते हुए राज्यसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा, जिससे कांग्रेस को सीट मिलना तय था। इसके बावजूद पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ नेता इस फैसले से असंतुष्ट नजर आए।
वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अनुराग शर्मा का बचाव करते हुए कहा कि उनकी संपत्ति पिता की ओर से मिली पैतृक संपत्ति है। इसे राजनीति से जोड़ना सही नहीं है।
सीएम सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस संगठन से निकले एक कार्यकर्ता को राज्यसभा भेजना पार्टी के लिए गर्व की बात है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में भी संगठन से जुड़े और जनता के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले कार्यकर्ताओं को ही टिकट दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आम कार्यकर्ता भी करोड़पति हो सकता है, इसमें कोई असामान्य बात नहीं है। उनके मुताबिक अनुराग शर्मा कांग्रेस संगठन से जुड़े एक कार्यकर्ता हैं, जिन्हें पार्टी नेतृत्व ने संसद भेजने का फैसला लिया है।
इस पूरे मामले ने अब हिमाचल प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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