ओलिंपियन दीपक पुनिया ने रिंग सेरेमनी की, निलौठी गांव की आंशी के साथ होगा विवाह
बहादुरगढ़ के ओलिंपियन पहलवान दीपक पुनिया ने निलौठी गांव की आंशी के साथ रिंग सेरेमनी की। खेल और निजी जीवन में नई शुरुआत के साथ दीपक आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की तैयारी में जुटे हैं।
➤ ओलिंपियन पहलवान दीपक पुनिया ने बहादुरगढ़ में की रिंग सेरेमनी
➤ जल्द होने वाली शादी निलौठी गांव की आंशी के साथ
➤ दीपक का खेल सफर: टोकीओ ओलिंपिक से बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल तक
हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ में अंतरराष्ट्रीय पहलवान और ओलिंपियन दीपक पुनिया ने रविवार को अपनी रिंग सेरेमनी सम्पन्न की। यह कार्यक्रम पारिवारिक और मित्रों के बीच सादगीपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। दीपक पुनिया ने निलौठी गांव निवासी आंशी के साथ अपने विवाह का संकल्प लिया।
दीपक के पिता सुभाष पुनिया और आंशी के पिता लंबे समय से परिचित हैं और प्रॉपर्टी डीलिंग के कार्य में भी साथ रहे हैं। फिलहाल शादी की तिथि तय नहीं हुई है, लेकिन परिवारों की सहमति से जल्द ही घोषणा की जाएगी।
खेल में दीपक का सफर:
दीपक पुनिया का जन्म 19 मई 1999 को छारा गांव में हुआ। उनके पिता सुभाष भी पहलवान रहे, जिससे दीपक बचपन से कुश्ती में रुचि रखते थे। महज पांच साल की उम्र में अखाड़े में दाखिल हुए दीपक को गांव में “केतली पहलवान” का नाम मिला।
दीपक ने पारंपरिक मिट्टी के अखाड़े से दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम तक का सफर तय किया। टोक्यो ओलिंपिक 2021 में उन्होंने कांस्य पदक मुकाबले में मामूली अंतर से चूकने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और 2022 में बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
वर्तमान में दीपक छत्रसाल स्टेडियम, दिल्ली में अभ्यास कर रहे हैं और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुटे हैं। पिता हर रोज उन्हें दूध भेजते हैं ताकि उनकी फिटनेस और स्वास्थ्य में कोई कमी न आए।
दीपक की प्रमुख उपलब्धियां:
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2016: जूनियर एशियन चैंपियनशिप, मनीला - स्वर्ण
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2016: वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप, जॉर्जिया - स्वर्ण
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2018: एशियन जूनियर चैंपियनशिप - स्वर्ण
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2018: वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप, स्लोवाकिया - रजत
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2019: वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप - स्वर्ण
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2018-2025: एशियन और वर्ल्ड टूर्नामेंट में कांस्य और रजत पदक
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2022: बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स - स्वर्ण
दीपक पुनिया की खेल और निजी जीवन की यह नई शुरुआत उनके प्रशंसकों के लिए खुशी और प्रेरणा का कारण बनी है।
Akhil Mahajan