हरियाणा बोर्ड का बड़ा फैसला, 9वीं से 12वीं के छात्रों को अब 7 विषय पढ़ने होंगे
हरियाणा बोर्ड ने नई शिक्षा नीति के तहत 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए 7 विषय अनिवार्य किए, त्रिभाषा फॉर्मूला लागू, QR कोड किताबों से पढ़ाई आसान बनाने की तैयारी।
➤ 9वीं से 12वीं के छात्रों को अब 7 विषय पढ़ने होंगे
➤ त्रिभाषा फॉर्मूला के तहत संस्कृत, पंजाबी या उर्दू अनिवार्य विकल्प
➤ QR कोड वाली किताबों से आसान पढ़ाई, ट्यूशन से छुटकारे का दावा
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने नई शिक्षा नीति के तहत बड़ा फैसला लेते हुए 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए एक अतिरिक्त विषय अनिवार्य कर दिया है। अब छात्रों को 6 की बजाय 7 विषय पढ़ने होंगे, जिससे शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
यह फैसला त्रिभाषा फॉर्मूला के तहत लिया गया है, जिसके अनुसार छात्रों को हिंदी और अंग्रेज़ी के साथ एक अतिरिक्त भाषाई विषय भी पढ़ना होगा। संस्कृत, पंजाबी या उर्दू में से किसी एक भाषा को चुनना अनिवार्य होगा, जिससे छात्रों की भाषाई समझ को मजबूत करने का उद्देश्य रखा गया है।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने बताया कि यह नया नियम इसी शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार तीसरी भाषा चुनने का विकल्प मिलेगा, लेकिन इसे पढ़ना सभी के लिए जरूरी होगा।
हालांकि विषय बढ़ने से छात्रों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ने की आशंका है, लेकिन बोर्ड ने इसे कम करने के लिए भी नई पहल की है। नई किताबों में QR कोड जोड़े जाएंगे, जिन्हें स्कैन करते ही छात्रों को कठिन प्रश्नों और प्रैक्टिकल का आसान समाधान मिल सकेगा।
इन QR कोड के जरिए छात्रों को शिक्षक की तरह सरल भाषा में समझाया जाएगा, जिससे उनकी पढ़ाई आसान होगी। बोर्ड का दावा है कि इससे छात्रों को ट्यूशन की जरूरत काफी हद तक खत्म हो जाएगी, जो अभिभावकों के लिए भी राहत की खबर मानी जा रही है।
डॉ. पवन कुमार के अनुसार नई किताबें आधुनिक तरीके से तैयार की जाएंगी, जिनमें डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे छात्रों को आत्मनिर्भर तरीके से पढ़ाई करने में मदद मिलेगी।
नई शिक्षा नीति को तेजी से लागू करने के मामले में हरियाणा अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही यह भी देखना अहम होगा कि बढ़े हुए विषयों का दबाव छात्रों पर कितना असर डालता है।
कुल मिलाकर, हरियाणा बोर्ड का यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाला है, जिसमें एक तरफ विषयों की संख्या बढ़ी है तो दूसरी तरफ डिजिटल माध्यम से पढ़ाई को आसान बनाने की कोशिश भी की गई है।
Akhil Mahajan