निकाय चुनाव में नियम तोड़ने पर अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई

हरियाणा निकाय चुनाव में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने सख्त गाइडलाइन जारी की है। नियम उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

निकाय चुनाव में नियम तोड़ने पर अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई
निकाय चुनाव में नियम तोड़ने पर अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई
  • हरियाणा निकाय चुनाव में नियम तोड़ने पर अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई
  • सरकारी कर्मचारियों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहने के निर्देश
  • ‘नो ड्यूज’ में देरी और पक्षपात पर भी आयोग का कड़ा रुख
  • चंडीगढ़ — हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने निकाय चुनावों में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने सरकारी कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि से दूर रहें।

आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कर्मचारी किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल के पक्ष में प्रचार, समर्थन या सक्रिय भूमिका निभाता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला 22 अप्रैल को राजनीतिक दलों के साथ हुई बैठक में सामने आया। इसमें आरोप लगाया गया कि कुछ स्थानों पर सरकारी कर्मचारी खुले तौर पर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होकर पक्षपात कर रहे हैं

आयोग ने इसे हरियाणा सिविल सेवा (सरकारी कर्मचारी आचरण) नियम, 2016 और मॉडल आचार संहिता का उल्लंघन माना है। इसके बाद आयोग ने सख्त गाइडलाइन जारी की है।

गाइडलाइन के अनुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार नहीं करेगा। चुनावी सभाओं में उसकी मौजूदगी केवल दर्शक के रूप में और पूर्व अनुमति के साथ ही संभव होगी।

इसके अलावा आयोग ने कहा है कि किसी एक उम्मीदवार की सभाओं में बार-बार उपस्थित रहना भी पक्षपात माना जाएगा और इस पर कार्रवाई हो सकती है।

आयोग ने यह भी साफ किया है कि चुनाव प्रचार के दौरान यदि कोई मंत्री या राजनीतिक व्यक्ति किसी निजी कार्यक्रम में शामिल होता है, तो सरकारी कर्मचारी उसमें हिस्सा नहीं लेंगे। इस संबंध में मुख्य सचिव को सभी विभागों को निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है।

चुनावी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आयोग ने सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया है, जिससे उम्मीदवारों को अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें।

साथ ही आयोग ने चेतावनी दी है कि ‘नो ड्यूज’ प्रमाण पत्र जारी करने में जानबूझकर देरी करना भी चुनावी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आयोग के इस फैसले के बाद निकाय चुनावों को लेकर प्रशासनिक सख्ती बढ़ गई है और अधिकारियों-कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।