गिरफ्तार IAS से ज्यादा चर्चा उनकी पत्नी के कारोबार की! पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट और बीयर फैक्ट्री मैडम के नाम ; 79 करोड़ घोटाले में CBI रिमांड पर अफसर
79.46 करोड़ रुपए के कथित फंड घोटाले में गिरफ्तार IAS आरके सिंह की पत्नी के नाम पेट्रोल पंप, माइक्रो ब्रेवरी और रेस्टोरेंट कारोबार का खुलासा हुआ है। CBI मामले की जांच कर रही है।
➤ गिरफ्तार IAS की पत्नी के नाम पेट्रोल पंप, माइक्रो ब्रेवरी और रेस्टोरेंट का कारोबार
➤ बेटे के दुबई खाते में भेजे गए ₹2.5 करोड़ की भी जांच कर रही CBI
➤ 79.46 करोड़ फंड घोटाले में IAS आरके सिंह को 3 दिन की रिमांड
पंचकूला नगर निगम के 79.46 करोड़ रुपए के कथित फंड घोटाले में गिरफ्तार IAS अधिकारी राम कुमार सिंह (आरके सिंह) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। CBI जांच के बीच अब उनकी पत्नी और परिवार के नाम दर्ज कारोबारी गतिविधियां भी चर्चा में आ गई हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उनकी पत्नी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर पेट्रोल पंप, माइक्रो ब्रेवरी (बीयर फैक्ट्री), रेस्टोरेंट, रेंटल प्रोजेक्ट्स और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़ी हुई हैं।
CBI की विशेष अदालत ने शुक्रवार को आरके सिंह और पंचायत विभाग के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट प्रिंस शर्मा को तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में कई वित्तीय और डिजिटल सबूतों की जांच अभी बाकी है।
दुबई खाते में भेजी गई रकम पर सवाल
CBI सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान आरके सिंह से उनके बेटे के दुबई स्थित खाते में भेजे गए करीब 2.5 करोड़ रुपए, करनाल में खरीदी गई 15 एकड़ कृषि भूमि और अन्य संपत्तियों के बारे में सवाल किए गए। सूत्रों का दावा है कि इन बिंदुओं पर एजेंसी को अभी संतोषजनक जवाब नहीं मिले हैं।
यही वजह है कि जांच एजेंसी अब बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है।
सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं कारोबार
आरके सिंह ने जनवरी 2025 में दाखिल अपने इमूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न (IPR) में कुल संपत्ति करीब 3.2 करोड़ रुपए घोषित की थी। इसमें अधिकांश संपत्ति पैतृक बताई गई है।
हालांकि IPR में उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि उनकी पत्नी कई वर्षों से स्वतंत्र कारोबारी गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। रिकॉर्ड के अनुसार वह परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर पेट्रोल पंप, माइक्रो ब्रेवरी, रेस्टोरेंट, खेती और रियल एस्टेट कारोबार संचालित करती हैं। दस्तावेजों में उन्हें नियमित GST और आयकर रिटर्न भरने वाला करदाता भी बताया गया है।
आबकारी इंस्पेक्टर से IAS बनने तक का सफर
आरके सिंह ने 1995 में हरियाणा आबकारी एवं कराधान विभाग में टैक्सेशन इंस्पेक्टर के रूप में नौकरी शुरू की थी। बाद में 1999 में HCS अधिकारी बने और वर्ष 2019 में उन्हें IAS कैडर मिला। प्रशासनिक सेवा में उनका सफर तीन दशकों से अधिक का रहा है।
CBI की जांच कई दिशाओं में आगे बढ़ी
जांच एजेंसी अदालत में यह भी कह चुकी है कि आरोपियों के मोबाइल फोन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण संदेश और संचार रिकॉर्ड गायब मिले हैं। CBI को आशंका है कि मामले से जुड़े कई अहम तथ्य अभी सामने आना बाकी हैं।
इसी कारण एजेंसी अब संपत्तियों, विदेशी ट्रांजैक्शन, बैंक खातों और कथित वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
Akhil Mahajan