समालखा में महिला दिवस पर नारी सशक्तिकरण का संदेश
समालखा के गुलाटी रोड पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। साध्वी शिष्याओं ने महिलाओं को समान अधिकार, शिक्षा और नारी सशक्तिकरण के महत्व के बारे में बताया।
■ समालखा में महिला दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
■ दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की साध्वी शिष्याओं ने महिलाओं को किया प्रेरित
■ नारी सशक्तिकरण, शिक्षा और आध्यात्मिकता पर दिया विशेष संदेश
हरियाणा के समालखा के गुलाटी रोड स्थित परिसर में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से 8 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में माताओं, बहनों और बच्चियों ने भाग लिया और नारी सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में संस्थान के संस्थापक सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की साध्वी शिष्याएं साध्वी राजेश्वरी भारती जी और साध्वी रितु भारती जी ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को महिलाओं के समान अधिकारों, उपलब्धियों और सम्मान को समर्पित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और समाज में महिलाओं की भूमिका को स्वीकार करना है।
साध्वी बहनों ने महिला दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी शुरुआत 1908 में अमेरिका में हुई थी, जब महिलाओं ने अपने अधिकारों और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर आवाज उठाई थी। इसके बाद 1910 में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का निर्णय लिया गया और वर्ष 1977 में संयुक्त राष्ट्र ने इसे आधिकारिक रूप से मान्यता प्रदान की।
उन्होंने कहा कि यदि हम भारत के गौरवशाली और वैदिक इतिहास की बात करें तो नारी का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। प्राचीन काल में घोषा जैसी विदुषी महिलाओं ने वेदों के मंत्रों और ऋचाओं का अध्ययन और प्रचार-प्रसार किया। इसी प्रकार राजकुमारी विद्योत्मा जैसी महान विदुषियों ने अपने ज्ञान और प्रतिभा से बड़े-बड़े विद्वानों को परास्त किया था। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार इन महान नारियों के योगदान को भुला दिया गया, जबकि उन्होंने समाज और संस्कृति को समृद्ध बनाने में अहम भूमिका निभाई।
साध्वी बहनों ने रानी लक्ष्मीबाई का उदाहरण देते हुए बताया कि जब कोई महिला भीतर से जागरूक और मजबूत बनती है, तभी वह समाज में परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षणिक अधिकार प्रदान करना है।
उन्होंने बताया कि आज की महिलाएं अंतरिक्ष, विज्ञान, खेल, राजनीति और व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। भारत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला और कई महिला अधिकारी व खिलाड़ी इसका उदाहरण हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाएं खेती और अन्य कार्यों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं।
साध्वी शिष्याओं ने यह भी कहा कि समाज में अभी भी महिलाओं और बच्चियों के साथ होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए महिलाओं को स्वयं जागरूक और सशक्त बनना होगा। उन्होंने माताओं से अपील की कि वे अपनी बेटियों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक मूल्यों से भी जोड़ें, ताकि वे भीतर और बाहर दोनों रूपों में मजबूत बन सकें।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं जैसे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और सुकन्या समृद्धि योजना के बारे में भी जानकारी दी गई। अंत में सभी महिलाओं को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और नारी सम्मान को बढ़ाने का संकल्प दिलाया गया।
Akhil Mahajan