रील बनाने का जुनून बना मौत की वजह, झज्जर में जीजा-साले ट्रेन से कटे
झज्जर में रेलवे ट्रैक पर रील बनाते समय जीजा-साले की बरेली एक्सप्रेस की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। शवों के टुकड़े दूर तक बिखरे, पुलिस को समेटने में पांच घंटे लगे।
- रील बनाने के चक्कर में झज्जर में जीजा-साले की दर्दनाक मौत
- बरेली एक्सप्रेस की चपेट में आने से शवों के टुकड़े दूर तक बिखरे
- पुलिस को शवों के हिस्से समेटने में लगे करीब पांच घंटे
झज्जर। हरियाणा के झज्जर जिले में रील बनाने का जुनून दो युवकों की जान ले गया। दिल्ली सीमा के पास रेलवे ट्रैक पर मोबाइल से वीडियो बना रहे जीजा-साले की बरेली एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि एक युवक के शरीर के छोटे-छोटे टुकड़े हो गए, जिन्हें समेटने में पुलिस को करीब पांच घंटे लग गए।
मृतकों की पहचान राहुल (20) और रोहित (21) के रूप में हुई है। दोनों बिहार के चंपारण जिले के रहने वाले थे। राहुल, रोहित के बड़े भाई का साला था। रोहित टीकरी बॉर्डर के पास किराए के मकान में रहता था और सैलून चलाता था। राहुल भी उसी के साथ सैलून में काम करता था। राहुल छह दिन पहले ही अपनी बहन की शादी से लौटकर बहादुरगढ़ आया था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि बुधवार शाम दोनों युवक खाली समय में रेलवे ट्रैक पर रील बनाने के लिए निकले थे। करीब शाम साढ़े चार बजे दिल्ली सीमा के पास रेलवे ट्रैक पर वीडियो बनाते समय तेज रफ्तार बरेली एक्सप्रेस वहां पहुंच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन की स्पीड काफी ज्यादा थी और दोनों युवकों को उसके आने का अंदाजा तक नहीं लगा।
ट्रेन की टक्कर से राहुल के शरीर के टुकड़े काफी दूर तक ट्रैक पर बिखर गए, जबकि रोहित के हाथ और शरीर के अन्य हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। सूचना मिलने पर जीआरपी और झज्जर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लिया। रोहित के शव के टुकड़े समेटने में पुलिस कर्मियों को रात तक टॉर्च की रोशनी में काम करना पड़ा।
दोनों शवों को नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़ में पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमॉर्टम के दौरान जब परिजनों को शवों की हालत दिखाई गई तो वे सहम उठे। कपड़ों और सामान के आधार पर ही कुछ टुकड़ों की पहचान हो सकी। गुरुवार दोपहर बाद पोस्टमॉर्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिए गए।
जांच अधिकारी ने बताया कि इससे पहले भी रील बनाने के दौरान रेलवे ट्रैक पर हादसों में युवाओं की जान जा चुकी है। यह चलन लगातार खतरनाक साबित हो रहा है।
Akhil Mahajan