रोहतक की सुपवा यूनिवर्सिटी में ABVP के खिलाफ प्रदर्शन
रोहतक की सुपवा यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों ने ABVP के सदस्यता अभियान और प्रस्तावित कार्यक्रम के खिलाफ प्रदर्शन किया। परिसर में ‘ABVP Go Back’ के नारे लगाए गए।
रोहतक की सुपवा यूनिवर्सिटी में ABVP के खिलाफ प्रदर्शन
स्टूडेंट्स ने लगाए ‘ABVP Go Back’ के नारे
विद्यार्थियों बोले- यूनिवर्सिटी में नहीं होने देंगे राजनीतिक हस्तक्षेप
हरियाणा के रोहतक स्थित दादा लखमीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला यूनिवर्सिटी (सुपवा) में विद्यार्थियों ने एबीवीपी के प्रस्तावित कार्यक्रम और सदस्यता अभियान के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान स्टूडेंट्स ने परिसर में ‘ABVP Go Back’ के नारे लगाए और विरोध स्वरूप हजारों पर्चे भी बांटे।
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि सुपवा की पहचान कला, संस्कृति, संवाद और स्वतंत्र अभिव्यक्ति से है। ऐसे में किसी राजनीतिक संगठन या वैचारिक एजेंडे को परिसर में हावी नहीं होने दिया जाएगा।
स्टूडेंट्स के अनुसार आगामी दो दिनों में एबीवीपी द्वारा यूनिवर्सिटी परिसर में कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं, जिनमें सदस्यता अभियान चलाने की भी योजना है। इसकी जानकारी मिलते ही विद्यार्थियों में नाराजगी बढ़ गई।
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने कहा कि सुपवा केवल एक यूनिवर्सिटी नहीं, बल्कि देशभर के युवा कलाकारों के लिए रचनात्मक और सांस्कृतिक मंच है। यहां छात्र अपने विचारों, संवेदनाओं और कला के जरिए अभिव्यक्ति करते हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक संगठन का हस्तक्षेप यूनिवर्सिटी के स्वतंत्र माहौल को प्रभावित करेगा।
विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि देश के कई शिक्षण संस्थानों में छात्र राजनीति के नाम पर वैचारिक ध्रुवीकरण और तनाव का माहौल बना है। सुपवा को उस दिशा में नहीं जाने दिया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे यूनिवर्सिटी का भगवाकरण नहीं होने देंगे और उसकी सांस्कृतिक पहचान तथा रचनात्मक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते रहेंगे।
स्टूडेंट्स का कहना है कि सुपवा में संवाद और कला को बढ़ावा दिया जाता है, न कि नफरत और वैचारिक टकराव को। कलाकार का दायित्व सत्ता का प्रचार करना नहीं, बल्कि समाज की सच्चाइयों को सामने लाना होता है।
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने बताया कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल वाइस चांसलर से मुलाकात करेगा और अपनी चिंताओं को औपचारिक रूप से उनके सामने रखेगा। साथ ही मांग की जाएगी कि यूनिवर्सिटी परिसर को राजनीतिक गतिविधियों और बाहरी वैचारिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाए।
pooja