₹7100 के लिए 60 घंटे गड्ढे में दबाया, स्टंटमैन की दर्दनाक मौ*त
नूंह में स्टंट शो के दौरान 27 वर्षीय स्टंटमैन दीपक की 60 घंटे तक गड्ढे में दबे रहने के बाद मौत हो गई। परिजनों ने आयोजक पर लापरवाही और लालच का आरोप लगाया है।
नूंह में ₹7100 के चंदे के लिए 60 घंटे गड्ढे में दबाए गए स्टंटमैन की मौत
8 दिन तक लगातार साइकिल पर करतब दिखाने के बाद कराया गया खतरनाक स्टंट
परिजनों ने आयोजक पर लापरवाही और लालच में जान लेने का लगाया आरोप
हरियाणा के नूंह जिले में एक खतरनाक स्टंट के दौरान 27 वर्षीय स्टंटमैन दीपक की मौत हो गई। आरोप है कि ₹7100 का चंदा इकट्ठा करने के लिए दीपक को 60 घंटे से अधिक समय तक मिट्टी के गड्ढे में दबाकर रखा गया। जब तय राशि पूरी नहीं हुई और उसे बाहर निकाला गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
मृतक के भाई मनीष का आरोप है कि दीपक को केवल 24 घंटे तक गड्ढे में रहने की ट्रेनिंग थी, लेकिन आयोजक सतीश ने अधिक पैसे जुटाने के लालच में उसे करीब 60 घंटे तक बिना खाना-पानी दिए गड्ढे में रखा। उनका कहना है कि यही उसकी मौत का कारण बना।
8 दिन तक साइकिल से नहीं उतरा
परिजनों के मुताबिक, स्टंट की शुरुआत 15 जुलाई के आसपास नूंह के खोरी गांव में हुई थी। पहले दीपक ने लगातार आठ दिन तक साइकिल पर बैठकर करतब दिखाए। इस दौरान उसका खाना-पीना भी साइकिल पर ही कराया जाता रहा और वह एक बार भी नीचे नहीं उतरा।
आठ दिन तक लगातार प्रदर्शन करने के बाद भी आयोजकों ने उसे आराम नहीं दिया। इसके बजाय अगले चरण के स्टंट के तहत उसे मिट्टी के गड्ढे में उतार दिया गया।
₹7100 पूरे होने तक बाहर नहीं निकालने की शर्त
मनीष के अनुसार आयोजक सतीश ने लोगों के सामने घोषणा की कि जब तक दर्शकों से ₹7100 का चंदा इकट्ठा नहीं होगा, तब तक दीपक को गड्ढे से बाहर नहीं निकाला जाएगा। हालांकि कार्यक्रम के दौरान केवल करीब ₹3000 ही जुट पाए।
इसके बाद दीपक को बाहर निकालने का फैसला लिया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।
भाई बोला- यह आखिरी स्टंट होगा
मृतक के भाई ने बताया कि पत्नी से तलाक के बाद दीपक ने स्टंट शो करना लगभग छोड़ दिया था। करीब डेढ़ महीने पहले उसने फिर से टीम के साथ जाना शुरू किया था। कार्यक्रम में जाने से पहले उसने परिवार से कहा था कि "यह मेरा आखिरी स्टंट होगा, इसके बाद यह काम छोड़ दूंगा।"
बिहार से फरीदाबाद तक का सफर
दीपक मूल रूप से बिहार का रहने वाला था और फिलहाल फरीदाबाद के गांव गौंछी में अपनी मां बबीता के साथ किराये के मकान में रहता था। वह गांव-गांव जाकर स्टंट शो करने वाली टीम के साथ काम करता था। ऐसे कार्यक्रमों से टीम को आमतौर पर 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी होती थी।
स्टंट में वर्षों की ट्रेनिंग जरूरी
मृतक के भाई और पूर्व स्टंटमैन मनीष के अनुसार इस तरह के स्टंट में शरीर पर ट्यूबलाइट तोड़ना, नुकीले हथियार चुभाना, सीने पर बाइक और ट्रैक्टर चलाना तथा गड्ढे में दबकर रहना शामिल होता है। उन्होंने बताया कि गड्ढे में हवा के लिए लकड़ी के तख्ते में छोटे-छोटे छेद बनाए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई भी स्टंटमैन सामान्य तौर पर 24 घंटे से अधिक सुरक्षित नहीं रह सकता।
पंचायत ने नहीं दी थी अनुमति
खोरी गांव के सरपंच सुरेश प्रजापति ने बताया कि ग्राम पंचायत ने इस कार्यक्रम की कोई अनुमति नहीं दी थी। आयोजकों ने बिना अनुमति गांव में स्टंट शो आयोजित किया था।
वहीं खोरी कलां पुलिस चौकी के जांच अधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
pooja