UPS मंजूर नहीं, OPS लेकर रहेंगे: जंतर-मंतर पर हुंकार
जंतर-मंतर पर हजारों कर्मचारियों ने OPS बहाली की मांग उठाई। अध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल बोले— UPS किसी कीमत पर नहीं मंजूर, जब तक पुरानी पेंशन बहाल नहीं होती संघर्ष जारी रहेगा।
● जंतर-मंतर पर OPS बहाली की मांग, हजारों कर्मचारी जुटे
● UPS मंजूर नहीं, OPS लेकर रहेंगे : विजेंद्र धारीवाल
● 97% कर्मचारियों ने UPS को नकारा, केंद्र पर दबाव बढ़ा
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर मंगलवार, 25 नवंबर को पुरानी पेंशन बहाली (OPS) की मांग एक बार फिर जोर-शोर से गूंजी। पेंशन बहाली संघर्ष समिति हरियाणा के बैनर तले देशभर से आए हजारों कर्मचारियों ने रैली में शिरकत की। प्रदर्शन का नेतृत्व अध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल ने किया।
कर्मचारी तिरंगा झंडा, बैनर और स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर पहुंचे। बड़ी संख्या में महिलाएं और मातृशक्ति छोटे बच्चों के साथ धरने पर बैठीं। यूनिफॉर्मधारी कर्मचारी, शिक्षक, रेलवे और पैरामिलिट्री कर्मचारी भी इस आंदोलन का हिस्सा बने।
धारीवाल ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) किसी भी हाल में मंजूर नहीं। उन्होंने कहा कि संघर्ष के कारण ही राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश में OPS बहाल हुई। 1 अक्टूबर 2023 की रामलीला मैदान की ऐतिहासिक रैली के बाद केंद्र सरकार NPS से पीछे हटकर UPS लाई, लेकिन इससे कर्मचारी संतुष्ट नहीं। उन्होंने कहा “संघर्ष जारी रहेगा जब तक हूबहू पुरानी पेंशन (OPS) बहाल नहीं हो जाती।”
97% कर्मचारियों ने UPS को नकारा
संगठन के महासचिव ऋषि नैन ने बताया कि देशभर में UPS के खिलाफ भारी आक्रोश है और लगभग 97% कर्मचारियों ने UPS का फॉर्म भरने से इंकार किया, जो केंद्र सरकार की नीति के प्रति असंतोष दर्शाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि “जब सांसद-विधायक एक से अधिक पेंशन ले सकते हैं, तो जीवन भर सेवा करने वाले कर्मचारियों को पेंशन से क्यों वंचित?”
PFRDA से पैसा वापस मांगने की मांग
राष्ट्रीय प्रभारी प्रदीप ठाकुर ने कहा कि जिन राज्यों में OPS लागू है, वहां के कर्मचारियों का NPS फंड तुरंत लौटाया जाए। रेलवे से राष्ट्रीय संयोजक अमरीक सिंह ने रेलवे के निजीकरण का विरोध करते हुए कहा कि OPS बहाली के साथ निजीकरण भी बंद होना चाहिए। इस धरने में देशभर के विभिन्न राज्यों के अध्यक्ष, महासचिव और पदाधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात सहित प्रमुख संगठन शामिल रहे।
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