रामचंद्र जांगड़ा ने भूपेंद्र हुड्डा पर साधा निशाना—“आपने भाईचारे को तोड़ा”
रोहतक के एमडीयू में हरियाणा दिवस पर राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा पर तीखा हमला बोला, 2016 आरक्षण आंदोलन का जिक्र किया और किसानों के मुआवजे व सरकार की नीतियों पर अपने दावे रखे।
➤ रामचंद्र जांगड़ा ने भूपेंद्र हुड्डा पर तीखा हमला
➤ 2016 आरक्षण आंदोलन व 'जातीय भाषा' के आरोपों का जिक्र
➤ किसानों के मुआवजे व विकास पर भी बोले, अभय चौटाला पर तंज़
एमडीयू में आयोजित हरियाणा दिवस कार्यक्रम के मौके पर राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर तीखा हमला बोला और कहा कि हरियाणा में कभी कास्ट वॉर जैसा माहौल नहीं था, लेकिन हुड्डा ने भाईचारे को बिगाड़ने का काम किया है। जांगड़ा ने आरोप लगाया कि हुड्डा ने सीएम रहते हुए सार्वजनिक रूप से कहा कि “मैं जाट पहले हूं, CM बाद में”, और ऐसे बयान समाज में जहर घोलने जैसे हैं, जिनका परिणाम 2016 के आरक्षण आंदोलन में देखने को मिला।
जांगड़ा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 2016 में आरक्षण आंदोलन के दौरान 20 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति जली, और यह सब उसी जहरीली राजनीति का नतीजा था जो जातिगत बयानबाज़ी से जन्म लेती है। उन्होंने कहा कि अब भाजपा ने हरियाणा में भाईचारे को फिर से कायम करने का काम किया है और जनता उन लोगों को माफ नहीं करेगी जिन्होंने समाज में दरारें पैदा कीं, इसलिए हुड्डा को अपने गुनाहों का प्रायश्चित करना चाहिए और सत्ता के सपने त्याग देने चाहिए।
देश-प्रदेश के मुद्दों के साथ-साथ रामचंद्र जांगड़ा ने किसानों के मुआवजे और आर्थिक विषयों पर भी लंबा बयान दिया। उन्होंने देवीलाल-चौटाला युग का ज़िक्र करते हुए कहा कि पहले आपदा में इनेलो के समय मात्र ₹150 का मुआवजा दिया जाता था; लोग शिकायत करते थे कि मुआवजा न के बराबर था। जांगड़ा ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने पहली बार ₹13,000 प्रति एकड़ मुआवजा देना शुरू किया और अब 24 फसलों पर MSP की व्यवस्था है, साथ ही किसानों को सशक्त बनाने के लिए कर्ज पर आसान शर्तें भी लागू की गईं। उन्होंने अभय चौटाला पर भी निशाना साधा और कहा कि उनके शासनकाल में जेलों से गुंडागर्दी और वसूली की घटनाएँ हुईं, और अब वे अपने अतीत पर ध्यान दें।
कार्यक्रम के दौरान जांगड़ा ने राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय विकास के संदर्भ में केंद्र व राज्य की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि वित्तीय नियमों में सुधार, कर्ज पर राहत और कृषि नीतियों से प्रदेश विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उनके भाषण में राजनीतिक तंज, तुलना और पुरानी सरकारों की नीतियों की आलोचना स्पष्ट रूप से झलकती रही, और इससे कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं व समर्थकों में जोश बना रहा।
जारी बयानवाणी व आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह भी देखा गया कि राजनीतिक माहौल और सियासत का रंग एक बार फिर किसान, जाति व विकास के एजेन्डे पर गहराता जा रहा है, और ये बयान आगामी राजनीतिक बहसों में नई लहर खड़ी कर सकते हैं।
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