सोनीपत में 80 घंटे का ड्रामा खत्म: 250 फीट टावर से उतरा किसान, मां से लिपटकर रोया, CM के संदेश के बाद बना समाधान का रास्ता
सोनीपत में 250 फीट टावर पर 80 घंटे से बैठे किसान सुनील CM के आश्वासन के बाद नीचे उतर गए। बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में किया था प्रदर्शन।
■ 80 घंटे बाद 250 फीट ऊंचे टावर से उतरा किसान सुनील
■ मां गले लगकर रोई, CM का संदेश—किसी का घर नहीं टूटेगा
■ बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में टावर पर चढ़ा था किसान
सोनीपत: हरियाणा के सोनीपत में पिछले चार दिनों से चला आ रहा हाई वोल्टेज ड्रामा आखिरकार शुक्रवार को खत्म हो गया, जब किसान सुनील करीब 80 घंटे बाद 250 फीट ऊंचे मोबाइल टावर से नीचे उतर आया। जैसे ही वह नीचे पहुंचा, उसकी मां ने उसे गले लगाकर जोर-जोर से रोना शुरू कर दिया और अपने हाथों से पानी पिलाया। यह भावुक दृश्य वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर गया।
दरअसल, किसान सुनील हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) द्वारा उसके घर और स्कूल पर चल रही बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में टावर पर चढ़ गया था। वह पिछले कई दिनों से भूखा-प्यासा वहीं बैठा था और उसने साफ कह दिया था कि जब तक प्रशासन लिखित आश्वासन नहीं देगा, वह नीचे नहीं उतरेगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष मोहनलाल बड़ोली मौके पर पहुंचे और उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का संदेश किसान तक पहुंचाया। बड़ोली ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फिलहाल किसी का घर नहीं तोड़ा जाएगा और मामले की जांच के लिए उच्च अधिकारियों की कमेटी गठित कर दी गई है, जो एक से डेढ़ महीने में रिपोर्ट देगी।
बताया जा रहा है कि मंगलवार को प्रशासन की टीम सोनीपत के गांव असावरपुर में नेशनल हाईवे-44 के पास सरकारी जमीन से करीब 150 अवैध कब्जों को हटाने पहुंची थी। इसी दौरान किसान सुनील का घर और उसके ऊपर चल रहा स्कूल भी कार्रवाई की जद में आ गया। विरोध में वह सीधे मोबाइल टावर पर चढ़ गया और कूदने की चेतावनी दे दी, जिससे प्रशासन को तुरंत कार्रवाई रोकनी पड़ी।
गौरतलब है कि किसान के घर के नीचे एक स्कूल भी संचालित हो रहा था, जहां करीब 150 बच्चे पढ़ते थे। कार्रवाई के दौरान स्कूल का एक कमरा गिरा दिया गया था, जिसके बाद गांव में विरोध तेज हो गया था। महिलाओं ने धरना शुरू कर दिया था और परिवार की एक महिला ने आत्मदाह की चेतावनी भी दी थी।
इस पूरे मामले में जमीन को लेकर विवाद भी लंबे समय से चल रहा है। प्रशासन के अनुसार, यह जमीन 2006 में अधिग्रहित की जा चुकी है और कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामला खारिज हो चुका है। वहीं परिवार का दावा है कि वे 1962 से इस जमीन पर रह रहे हैं और यह उनकी पुश्तैनी संपत्ति है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी इस मामले में पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे और सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। फिलहाल किसान के टावर से उतरने के बाद स्थिति शांत हो गई है, लेकिन यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
Akhil Mahajan