सोनीपत में सरपंच बर्खास्त, गबन का मामला साबित

सोनीपत के शाहजादपुर गांव के सरपंच को ₹4.63 लाख के गबन के मामले में बर्खास्त कर दिया गया है। सोलर लाइट घोटाले में FIR और रिकवरी के आदेश जारी हुए हैं।

सोनीपत में सरपंच बर्खास्त,  गबन का मामला साबित

सोनीपत में सरपंच दीपक शर्मा बर्खास्त, ₹4.63 लाख गबन साबित
सोलर लाइट मरम्मत के नाम पर निकाले पैसे, जांच में फर्जीवाड़ा उजागर
FIR और रिकवरी के आदेश, DC ने लिया सख्त एक्शन



हरियाणा के सोनीपत जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर बड़ा भ्रष्टाचार सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। शाहजादपुर गांव के सरपंच दीपक शर्मा को ₹4.63 लाख के गबन के मामले में पद से बर्खास्त कर दिया गया है। उपायुक्त सुशील सरवान द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब दीपक शर्मा सरपंच के किसी भी अधिकार और पद का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

यह कार्रवाई विस्तृत जांच रिपोर्ट, हाईकोर्ट के निर्देशों और कई चरणों की सुनवाई के बाद की गई है, जिसमें सार्वजनिक धन के दुरुपयोग, नियमों की अनदेखी और फर्जी दस्तावेज पेश करने जैसे गंभीर आरोप प्रमाणित पाए गए

जांच में सामने आया कि सरपंच दीपक शर्मा ने 92 सोलर स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत के नाम पर ग्राम पंचायत खाते से 4,63,680 रुपये की राशि निकाली थी। लेकिन मौके पर निरीक्षण के दौरान केवल 48 लाइटें ही सही हालत में मिलीं, जबकि कई लाइटें गायब पाई गईं या दोबारा लगाई ही नहीं गई थीं। इससे साफ हो गया कि यह मामला सीधे तौर पर सार्वजनिक धन के गबन का है।

जांच में एक और गंभीर लापरवाही सामने आई कि संबंधित फर्म को भुगतान करने से पहले न तो जूनियर इंजीनियर (JE) और न ही सब-डिविजनल इंजीनियर (SDE) से कोई तकनीकी सत्यापन कराया गया। बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के काम शुरू किया गया और भुगतान भी कर दिया गया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

इतना ही नहीं, रिकॉर्ड में सभी 92 लाइटों को ठीक दिखाया गया, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग थी। इससे यह साबित हुआ कि कागजी एंट्री में हेरफेर कर फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई

सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब सरपंच द्वारा पेश की गई जीपीएस टैग फोटो की जांच की गई। ये फोटो गांव की बजाय सोनीपत शहर की दूसरी लोकेशन की पाई गईं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि जांच को गुमराह करने के लिए फर्जी सबूत पेश किए गए

सरपंच द्वारा दिए गए जवाब और दस्तावेजों को भी जांच में संतोषजनक नहीं पाया गया और ग्रामीणों के समर्थन में दिए गए हलफनामों को भी स्वार्थपूर्ण मानते हुए खारिज कर दिया गया।

प्रशासन ने इस मामले में न केवल सरपंच को पद से हटाया है, बल्कि FIR दर्ज करने और गबन की राशि की रिकवरी के भी आदेश जारी किए हैं। इस कार्रवाई को पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।