"पापा, मुझे खेत नहीं ले गए तो मैं बीमार हो जाऊंगा..." बेटे की वो आखिरी जिद, जो पिता को ताउम्र रुलाएगी

अंबाला बोरवेल हादसे में 4 वर्षीय निरवैर की दर्दनाक मौत से पहले पिता से कही गई आखिरी बात लोगों को भावुक कर रही है। 21 घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद बच्चे को बाहर निकाला गया।

"पापा, मुझे खेत नहीं ले गए तो मैं बीमार हो जाऊंगा..." बेटे की वो आखिरी जिद, जो पिता को ताउम्र रुलाएगी

"पापा, अगर आप मुझे खेत नहीं ले गए तो मैं बीमार हो जाऊंगा, फिर स्कूल भी नहीं जाऊंगा।"

4 वर्षीय निरवैर की खेत जाने की मासूम जिद बन गई आखिरी सफर

220 फीट गहरे बोरवेल में गिरने के बाद 21 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

सेना, NDRF और SDRF की कोशिशों के बावजूद नहीं बच सका मासूम


4 साल के मासूम निरवैर ने जब मंगलवार की सुबह अपने पिता मनजीत सिंह से यह बात कही, तो पिता का दिल पसीज गया। किस पिता से अपने जिगर के टुकड़े की यह मासूम 'धमकी' बर्दाश्त होती? बेटे के प्यार के आगे पिता हार गए और उसकी जिद मानकर उसे अपने साथ खेत ले जाने के लिए तैयार हो गए। लेकिन, मनजीत सिंह को क्या पता था कि बेटे की यह जिद उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगी और यह मासूम संवाद उनके कानों में ताउम्र एक दर्दनाक गूंज बनकर रह जाएगा।

बुधवार तड़के साढ़े 3 बजे निरवैर का शव बोरवेल से निकाला गया।

एक आम सुबह, जो जिंदगी का सबसे काला दिन बन गई

अंबाला के उस खेत में मंगलवार की सुबह रोज जैसी ही थी। सुबह करीब 6:30 बजे निरवैर अपने पिता के साथ दादा करनैल सिंह के लिए नाश्ता लेकर पहुंचा था। दादा खाना खा रहे थे और पिता खेतों के काम में लग गए। निरवैर खेलता हुआ थोड़ी दूर निकल गया। वहां एक 220 फीट गहरा खुला बोरवेल था। बच्चे के मन में बालसुलभ उत्सुकता जागी, वह उसमें मिट्टी डालने और नीचे झांकने लगा। बोरवेल के आसपास की मिट्टी गीली थी, मासूम के छोटे कदम फिसले और पलक झपकते ही वह उस अंधेरे, गहरे बोरवेल में समा गया।

निरवैर के शव को अंबाला सिटी सिविल अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है।

मन्नतों का वो धागा, जो अचानक टूट गया

निरवैर इस परिवार के लिए सिर्फ एक बच्चा नहीं था, वह उनकी बरसों की तपस्या का फल था। बड़ी बहन के जन्म के करीब 8 साल बाद, न जाने कितनी मन्नतों के धागे बांधने और दुआएं मांगने के बाद इस आंगन में उसकी किलकारी गूंजी थी। वह पूरे घर की आंखों का तारा था। कुछ ही दिन पहले वह अपनी नानी के घर से लाड़-प्यार पाकर लौटा था। 1 जुलाई से स्कूल खुलने वाले थे, जिसे लेकर वह बेहद उत्साहित था। लेकिन, स्कूल की नई ड्रेस और किताबों का इंतजार करता वह मासूम अब कभी लौटकर नहीं आएगा।

21 घंटे की जद्दोजहद और टूटती उम्मीदें

जैसे ही निरवैर गिरा, परिजनों ने खुद उसे बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। सुबह 7:30 बजे तक पुलिस, फायर ब्रिगेड, NDRF, SDRF और सेना की टीमें मौके पर पहुंच गईं।

  • रेस्क्यू ऑपरेशन: अत्याधुनिक उपकरणों के साथ सेना और बचाव दलों ने समानांतर गड्ढा खोदकर बच्चे तक पहुंचने की कोशिश की।

  • लंबा इंतजार: 21 घंटे तक मशीनें चलती रहीं और साथ-साथ चलती रहीं उस परिवार और पूरे गांव की सांसें।

  • दुखद अंत: बुधवार तड़के 3:30 बजे जब मासूम के शरीर को बाहर निकाला गया, तो उसमें कोई हलचल नहीं थी। अस्पताल में प्राथमिक जांच और ECG के बाद डॉक्टरों ने उसकी मौत की पुष्टि कर दी।

  • पोते के बोरवेल में गिरने के बाद रोते उसके दादा करनैल सिंह हाथ से मिट्टी टटोलते रहे।

पथराई आंखें और बेसुध पिता

उस पिता मनजीत का हाल शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, जो बेटे की जिद के आगे हारकर उसे अपने साथ ले गया था। वे इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाए और बेसुध हो गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। वहीं, खेत में बैठे दादा करनैल सिंह पूरी रात उसी जगह टकटकी लगाए बैठे रहे, अपने पोते की वापसी की आस में। गांव के सरपंच कप्तान सिंह बताते हैं कि इस घटना ने पूरे इलाके को गहरे सदमे और शोक में धकेल दिया है। देर रात पूर्व मंत्री अनिल विज भी इस गमगीन परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे।

"मैं बीमार हो जाऊंगा, स्कूल नहीं जाऊंगा..." कहने वाला 4 साल का निरवैर अब न कभी बीमार होगा, और न ही कभी अपने उस स्कूल की चौखट लांघ पाएगा जिसके लिए वह इतना उत्साहित था। एक खुले बोरवेल की लापरवाही और एक मासूम सी जिद ने मन्नतों से भरे एक परिवार का आंगन हमेशा के लिए सूना कर दिया।


May be an image of text that says "ကိး cT иpTb गमगीन माहौल में हुआ निरवेर का अंतिम संस्कार, हर किसी की आंखों में थे आंसू"

धनयोड़ा गांव में 4 साल के मासूम निरवैर की बोरवेल में गिरने से मौत हो गई। बोरवेल में गिरे 4 साल के मासूम निरवैर सिंह को बचाने की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं। आज सुबह करीब 3:30 बजे निरवैर का श*व बोरवेल से बाहर निकाला गया। वहीं गमगीन माहौल में 4 साल के मासूम निरवैर का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।