पानीपत-गोरखपुर हाईवे : 131 गांवों में जमीन अधिग्रहण शुरू, बैनामे और अनाधिकृत निर्माण पर प्रशासन की सख्त रोक
पानीपत–गोरखपुर ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए बिजनौर के 131 गांवों में जमीन अधिग्रहण शुरू। बैनामे और अनाधिकृत निर्माण पर प्रशासन ने रोक लगा दी है।
➤ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए 131 गांवों में जमीन अधिग्रहण तय
➤बैनामे और अनाधिकृत निर्माण पर प्रशासन की सख्त रोक
➤एनएचएआई ने डीएम को लिखा पत्र, एसएलओ नियुक्त
अब जमीन खरीदी-बेची नहीं जा सकेगी और नया निर्माण भी नहीं होगा। पानीपत से गोरखपुर तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हाईवे (शामली–पुवायां फेज-1) को लेकर एनएचएआई ने बिजनौर जिले में भूमि अर्जन की प्रक्रिया तेज कर दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस संबंध में डीएम बिजनौर को पत्र लिखकर 131 गांवों में जमीन अधिग्रहण की जानकारी दी है।
एनएचएआई के पत्र के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। डीएम बिजनौर ने जिले के सभी एसडीएम और सब-रजिस्ट्रार को पत्र जारी कर संबंधित गांवों में जमीन के बैनामों पर रोक लगाने और अनाधिकृत निर्माण न होने देने के निर्देश दे दिए हैं। इसका सीधा असर अब इन गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त और निर्माण गतिविधियों पर पड़ेगा।
गोरखपुर–शामली–पानीपत एक्सप्रेसवे के लिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है। यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के 22 जिलों से होकर गुजरेगा। शामली से गोरखपुर तक प्रस्तावित इस कॉरिडोर की कुल लंबाई 747.424 किलोमीटर होगी। यह हाईवे पानीपत से शुरू होकर शामली के रास्ते गोरखपुर में सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा।
बिजनौर जिले में यह परियोजना एनएच-734 के अंतर्गत किमी 86.860 से किमी 142.195 तक प्रस्तावित है। जिले में इसकी कुल लंबाई करीब 56 किलोमीटर रहेगी। एलाइनमेंट के अनुसार यह हाईवे बालावाली के पास से होकर स्योहारा क्षेत्र से गुजरेगा। एनएचएआई ने इन 131 गांवों की सूची प्रशासन को सौंप दी है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एनएचएआई ने बिजनौर में एसएलओ को सक्षम प्राधिकारी नियुक्त कर दिया है। एसएलओ का मुख्य कार्य जमीन अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया को पूरा करना होगा। परियोजना पूरी होने के बाद बिजनौर जिले को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलेगी और दिल्ली, हरियाणा व पूर्वांचल की ओर आवागमन कहीं अधिक सुगम होगा।
Akhil Mahajan