विदेश में नौकरी का झांसा देने पर होगी 10 साल तक जेल, हरियाणा सरकार ने लागू किया नया सख्त कानून

हरियाणा सरकार ने फर्जी ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ नया कानून लागू किया है। विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देने पर 10 साल तक जेल और लाखों का जुर्माना होगा।

विदेश में नौकरी का झांसा देने पर होगी 10 साल तक जेल, हरियाणा सरकार ने लागू किया नया सख्त कानून

हरियाणा में फर्जी ट्रैवल एजेंटों पर सख्त कानून लागू
विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देने पर होगी 10 साल तक जेल
दोषियों की संपत्ति जब्त कर पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा


हरियाणा सरकार ने विदेश में नौकरी और वर्क परमिट के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले फर्जी ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब नया कानून लागू कर दिया गया है, जिसके तहत विदेश में रोजगार दिलाने का झांसा देने वाले एजेंटों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

सरकार ने ‘हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ ट्रैवल एजेंट्स (अमेंडमेंट) एक्ट 2026’ लागू किया है। इस नए कानून के तहत ट्रैवल एजेंटों की भूमिका केवल यात्रा और टूर सेवाओं तक सीमित कर दी गई है। यानी अब एजेंट केवल टिकट, टूर पैकेज और यात्रा व्यवस्था से जुड़े कार्य ही कर सकेंगे।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेश में नौकरी दिलाने, भर्ती कराने या रोजगार के नाम पर लोगों को बाहर भेजने का दावा करना अब अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित एजेंटों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

हरियाणा में पिछले कुछ वर्षों में विदेश भेजने के नाम पर फर्जी वीजा, मानव तस्करी और करोड़ों रुपये की ठगी के कई मामले सामने आए थे। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए सरकार ने कानून को और सख्त बनाया है।

नए कानून के तहत यदि कोई एजेंट विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़ा करता है, नकली दस्तावेज तैयार करता है या मानव तस्करी में शामिल पाया जाता है, तो उसे 7 से 10 साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही दोषियों पर 2 से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।

बिना रजिस्ट्रेशन ट्रैवल एजेंट का काम करने वालों के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में 2 से 7 साल तक की कैद हो सकती है।

सरकार ने इस कानून में एक नई व्यवस्था ‘लोकपाल सिस्टम’ भी लागू की है। अब विदेश भेजने के नाम पर ठगी का शिकार हुए लोगों को पुलिस थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पीड़ित सीधे लोकपाल के पास शिकायत दर्ज करा सकेंगे, जहां मामलों की सुनवाई होगी। जरूरत पड़ने पर ही मामला पुलिस को सौंपा जाएगा।

कानून के तहत दोषी एजेंटों की संपत्ति जब्त कर पीड़ितों को मुआवजा देने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे लोगों को राहत मिलेगी और शिकायतों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।

दरअसल, पहले बने कानून पर केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय ने आपत्ति जताई थी। मंत्रालय का कहना था कि विदेश रोजगार और उत्प्रवास से जुड़े मामलों को पहले से ही ‘उत्प्रवास अधिनियम 1983’ नियंत्रित करता है। इसके बाद संशोधित कानून में यह स्पष्ट कर दिया गया कि यदि राज्य और केंद्र के कानून में किसी प्रकार का टकराव होता है, तो केंद्र का कानून ही प्रभावी रहेगा।