नौंवी पास डेंटल डाक्टर बनकर कर रहा था मरीजों का ईलाज! सीएम फ्लाइंग की कार्रवाई में बड़ा खुलासा
हिसार में सीएम फ्लाइंग और स्वास्थ्य विभाग ने अवैध डेंटल क्लिनिक पर रेड की। जांच में 9वीं पास युवक मरीजों का इलाज करता मिला और कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
- हिसार में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था डेंटल हॉस्पिटल
- 9वीं पास युवक मरीजों का इलाज करता मिला, दवाइयां देकर वसूल रहा था पैसे
- सीएम फ्लाइंग की रेड में खुलीं कई गंभीर अनियमितताएं, पुलिस जांच शुरू
हिसार में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। सीएम फ्लाइंग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने शहर में चल रहे एक निजी डेंटल क्लिनिक पर छापा मारकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में सामने आया कि क्लिनिक बिना किसी सरकारी पंजीकरण और वैध अनुमति के संचालित किया जा रहा था। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि यहां एक 9वीं पास युवक मरीजों का इलाज करता मिला।
यह कार्रवाई बुधवार को सीएम फ्लाइंग हिसार रेंज इंचार्ज सुनैना के नेतृत्व में की गई। टीम में स्वास्थ्य विभाग के डेंटल सर्जन डॉ. पुलकित, एएसआई सुरेंद्र और एचसी जितेंद्र भी शामिल रहे।
सीएम फ्लाइंग को सूचना मिली थी कि हिसार में “गेरा डेंटल” नाम से चल रहे एक निजी क्लिनिक में अवैध तरीके से डेंटल उपचार किया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने मौके पर पहुंचकर रेड की और क्लिनिक से जुड़े दस्तावेजों तथा वहां मौजूद लोगों की जांच शुरू की।
जांच के दौरान सामने आया कि क्लिनिक किसी भी सरकारी अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं था। मौके पर न तो कोई वैध लाइसेंस मिला और न ही ओपीडी रजिस्टर या पंजीकृत डॉक्टर से जुड़ा कोई रिकॉर्ड उपलब्ध था। इससे टीम को अस्पताल के संचालन पर गंभीर संदेह हुआ।
रेड के दौरान सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब प्रदीप कुमार नाम का युवक डेंटल चेयर पर बैठकर मरीजों की जांच करता मिला। टीम के अनुसार प्रदीप केवल 9वीं कक्षा तक पढ़ा हुआ है, लेकिन वह मरीजों को दवाइयां दे रहा था और उनसे इलाज के नाम पर पैसे भी वसूल रहा था।
टीम ने मौके पर मौजूद मरीजों से पूछताछ की तो उन्होंने भी इसकी पुष्टि की। गांव सिसाय काली रावण निवासी राकेश ने बताया कि वह दांतों का इलाज करवाने क्लिनिक आए थे, जहां प्रदीप ने उनकी जांच की, दवाइयां दीं और फीस भी ली। वहीं दूसरे मरीज डॉ. संदीप ने भी बताया कि उनके दांतों की जांच और दवा देने का काम प्रदीप ने ही किया था।
क्लिनिक संचालक महेंद्र बजाज ने टीम को बताया कि अस्पताल का संचालन डॉ. तरुण गेरा द्वारा किया जाता है, लेकिन मौके पर डॉक्टर से संबंधित कोई दस्तावेज, ओपीडी स्लिप या बिल बुक नहीं मिली। इससे टीम को शक हुआ कि अस्पताल पूरी तरह अवैध तरीके से संचालित किया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि क्लिनिक ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी कोई अनुमति नहीं ली थी। मेडिकल वेस्ट के निपटान को लेकर भी मौके पर कोई रिकॉर्ड या व्यवस्था नहीं मिली। इसे स्वास्थ्य सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।
सीएम फ्लाइंग हिसार रेंज इंचार्ज सुनैना ने कहा कि बिना चिकित्सीय योग्यता और बिना पंजीकरण के अस्पताल चलाना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्देशानुसार अवैध रूप से इलाज करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
टीम ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पुलिस को सौंप दी है। अब आगामी कार्रवाई पुलिस द्वारा की जाएगी।
Akhil Mahajan